25 अक्टूबर 2026
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लखनऊ कचहरी में 200+ अवैध चैंबर तोड़े, हाईकोर्ट के आदेश पर बुलडोजर; 2,000 वकील सड़क पर

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लखनऊ कचहरी में 200+ अवैध चैंबर तोड़े, हाईकोर्ट के आदेश पर बुलडोजर; 2,000 वकील सड़क पर

सारांश

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर लखनऊ कचहरी में 200 से अधिक अवैध चैंबर तोड़े जा रहे हैं — 7-8 बुलडोजर और पुलिस-पीएसी की बड़ी तैनाती के बीच। लगभग 2,000 अधिवक्ता सड़क पर हैं और दीपावली के मौके पर वैकल्पिक व्यवस्था की माँग कर रहे हैं।

मुख्य बातें

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर 25 अक्टूबर 2026 को लखनऊ कचहरी परिसर में ध्वस्तीकरण अभियान शुरू हुआ।
200 से अधिक अवैध चैंबर चिह्नित; 7-8 बुलडोजर तैनात, कार्रवाई बिना समय सीमा के जारी।
करीब 2,000 अधिवक्ता विरोध में सड़क पर धरने पर बैठे; वैकल्पिक कार्यस्थल की माँग।
एसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा ने कहा — सभी चिह्नित चैंबर तोड़े जाएंगे, कोई छूट नहीं।
अधिवक्ताओं का आरोप — दीपावली के मौके पर बिना पूर्व व्यवस्था के की गई कार्रवाई से पेशेवर और आर्थिक संकट।

लखनऊ कचहरी परिसर में 25 अक्टूबर 2026 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम ने 200 से अधिक अवैध चैंबरों के विरुद्ध ध्वस्तीकरण अभियान शुरू किया, जिसमें 7 से 8 बुलडोजर तैनात किए गए और बड़ी संख्या में पुलिस तथा पीएसी के जवान मौके पर मौजूद रहे। इस कार्रवाई के विरोध में लगभग 2,000 अधिवक्ता सड़क पर धरने पर बैठ गए और वैकल्पिक व्यवस्था दिए बिना चैंबर न तोड़ने की माँग की।

मुख्य घटनाक्रम

कार्रवाई के दौरान मौके पर मौजूद एसीपी पश्चिमी धनंजय कुशवाहा ने स्पष्ट किया कि सभी चिह्नित चैंबरों पर लाल निशान लगाए जा चुके हैं और सभी को तोड़ा जाएगा। उन्होंने कहा, 'जितने चैंबर हैं, सब पर लाल निशान लगे हैं, सब तोड़े जाएंगे। कार्रवाई शुरू हो गई है। जब तक चैंबर टूटेंगे नहीं, कार्रवाई चलती रहेगी। इसकी कोई समय सीमा नहीं है। सात से आठ बुलडोजर लगाए गए हैं और अभी और बुलडोजर आ रहे हैं।'

प्रशासन ने यह कार्रवाई उच्च न्यायालय के उस आदेश के अनुपालन में की, जिसमें कचहरी परिसर से अनधिकृत निर्माणों को हटाने का निर्देश दिया गया था। गौरतलब है कि यह मामला न्यायालय में लंबे समय से विचाराधीन था।

अधिवक्ताओं का विरोध और आरोप

कार्रवाई के विरोध में धरने पर बैठे एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोप लगाया कि प्रशासन ने कोई ठोस वैकल्पिक व्यवस्था किए बिना चैंबर तोड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने कहा कि पहले वकीलों के बैठने और काम करने के लिए दूसरी जगह तय की जानी चाहिए थी, उसके बाद ही ध्वस्तीकरण होना चाहिए था।

अधिवक्ताओं का तर्क है कि ये चैंबर उनके पेशेवर जीवन का केंद्र हैं — यहीं वे अपने मुवक्किलों से मिलते हैं, मुकदमों की तैयारी करते हैं और न्यायिक प्रक्रिया को गति देते हैं। चैंबर हट जाने के बाद उनके सामने रोज़ी-रोटी और कामकाज की गंभीर समस्या उत्पन्न हो जाएगी।

दीपावली के समय बढ़ी परेशानी

यह ध्वस्तीकरण अभियान ऐसे समय में चलाया गया है जब दीपावली का त्योहार निकट है। अधिवक्ताओं ने आरोप लगाया कि त्योहारी सीजन में इस कार्रवाई से उनकी आर्थिक और व्यावसायिक कठिनाइयाँ और भी बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि जो लोग दूसरों को न्याय दिलाने का काम करते हैं, आज उन्हें खुद अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है।

सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक तैयारी

किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए नगर निगम ने पुलिस और पीएसी की बड़ी तैनाती सुनिश्चित की। मौके पर माहौल तनावपूर्ण बना रहा, लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक किसी हिंसक घटना की सूचना नहीं थी। प्रशासन के अनुसार ध्वस्तीकरण बिना किसी समय सीमा के तब तक जारी रहेगा जब तक सभी चिह्नित चैंबर नहीं हटा दिए जाते।

आगे क्या होगा

अधिवक्ताओं ने माँग की है कि प्रशासन तत्काल वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराए ताकि न्यायिक कार्य बाधित न हो। यह देखना होगा कि नगर निगम और राज्य सरकार अधिवक्ताओं की इस माँग पर कोई समाधान निकालती है या मामला उच्च न्यायालय तक पहुँचता है। इस विवाद का असर लखनऊ की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई पर भी पड़ सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन प्रशासन की असली विफलता यह है कि उसने वर्षों तक अतिक्रमण को चुपचाप बढ़ने दिया और अब एकाएक बुलडोजर चला दिया। 2,000 अधिवक्ताओं के लिए वैकल्पिक व्यवस्था का न होना यह बताता है कि योजना निष्पादन से कहीं आगे नहीं बढ़ पाई। दीपावली के ठीक पहले यह कार्रवाई प्रशासनिक संवेदनहीनता का उदाहरण है — अदालत का आदेश मानना ज़रूरी था, पर उसकी टाइमिंग और पुनर्वास की तैयारी प्रशासन के विवेक पर थी।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

लखनऊ कचहरी में अवैध चैंबरों पर कार्रवाई क्यों हुई?
इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश पर नगर निगम ने लखनऊ कचहरी परिसर में अवैध रूप से बने चैंबरों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। न्यायालय ने अनधिकृत निर्माणों को परिसर से हटाने का निर्देश दिया था।
कितने चैंबर तोड़े जाने हैं और कितने बुलडोजर लगाए गए?
रिपोर्टों के अनुसार 200 से अधिक चैंबर ध्वस्त करने की तैयारी है और मौके पर 7 से 8 बुलडोजर तैनात किए गए हैं। एसीपी धनंजय कुशवाहा ने बताया कि और बुलडोजर भी आ रहे हैं और कार्रवाई बिना किसी समय सीमा के जारी रहेगी।
वकील इस कार्रवाई का विरोध क्यों कर रहे हैं?
अधिवक्ताओं का कहना है कि प्रशासन ने कोई वैकल्पिक कार्यस्थल उपलब्ध कराए बिना ध्वस्तीकरण शुरू कर दिया। लगभग 2,000 वकीलों के सामने मुवक्किलों से मिलने और काम करने की जगह का संकट खड़ा हो गया है, खासकर दीपावली के त्योहार के समय।
अधिवक्ताओं की मुख्य माँग क्या है?
अधिवक्ता चाहते हैं कि पहले उनके लिए वैकल्पिक बैठने और काम करने की व्यवस्था की जाए, उसके बाद ही चैंबर हटाए जाएं। उनका तर्क है कि बिना पुनर्वास के यह कार्रवाई उनकी आजीविका और न्यायिक कार्य दोनों को बाधित करती है।
इस कार्रवाई का न्यायिक कामकाज पर क्या असर पड़ेगा?
यदि अधिवक्ताओं को वैकल्पिक स्थान नहीं मिला, तो लखनऊ की अदालतों में मुकदमों की सुनवाई बाधित हो सकती है। अधिवक्ताओं ने चेताया है कि चैंबर टूटने के बाद मुवक्किलों से परामर्श और वकालत का काम करना मुश्किल हो जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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