25 जुलाई 2026
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अलीगंज अग्निकांड: 15 मौतों वाली चार मंजिला इमारत पर एलडीए का बुलडोजर, ध्वस्तीकरण शुरू

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अलीगंज अग्निकांड: 15 मौतों वाली चार मंजिला इमारत पर एलडीए का बुलडोजर, ध्वस्तीकरण शुरू

सारांश

22 जून के अलीगंज अग्निकांड में 15 जानें गईं — और अब उस इमारत पर बुलडोजर चल गया। एलडीए की यह कार्रवाई अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा उल्लंघन के खिलाफ है, लेकिन भवन स्वामी पक्ष ने न्यायालय जाने की चेतावनी दी है।

मुख्य बातें

लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने 25 जुलाई को अलीगंज की चार मंजिला इमारत का ध्वस्तीकरण शुरू किया।
इस इमारत में 22 जून को लगी आग में 15 लोगों की मौत हुई थी; दूसरी मंजिल पर लाइब्रेरी और प्रशिक्षण केंद्र था।
भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला के अधिवक्ता ने कार्रवाई को नियमों के विरुद्ध बताया और न्यायालय में चुनौती देने की घोषणा की।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना के बाद चार अधिकारियों को निलंबित किया था; चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
एलडीए के अनुसार ध्वस्तीकरण का खर्च भी भवन स्वामी से वसूला जाएगा।

लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में 22 जून को हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की जान लेने वाली चार मंजिला इमारत को लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने शनिवार, 25 जुलाई को बुलडोजर और हाइड्रोलिक मशीनों से ध्वस्त करना शुरू कर दिया। भारी पुलिस बल की तैनाती और पूरे क्षेत्र की घेराबंदी के बीच यह कार्रवाई उस इमारत के खिलाफ हुई, जिसे अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन का दोषी पाया गया था।

ध्वस्तीकरण अभियान का घटनाक्रम

एलडीए की टीम शनिवार की सुबह बुलडोजर, हाइड्रोलिक मशीन और अधिकारियों-कर्मचारियों के बड़े दल के साथ मौके पर पहुँची। कार्रवाई शुरू होने से पहले आसपास की सड़कों पर बैरिकेडिंग लगाकर यातायात रोक दिया गया और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात रहे।

एलडीए अधिकारियों के अनुसार, भवन स्वामी को निर्माण स्वयं हटाने के लिए पर्याप्त समय दिया गया था। निर्धारित समयसीमा में कार्रवाई पूरी न होने पर प्राधिकरण ने स्वयं ध्वस्तीकरण शुरू कराया। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि पूरी कार्रवाई एलडीए को करनी पड़ी तो इसका खर्च भी भवन स्वामी से वसूला जाएगा।

भवन स्वामी पक्ष का विरोध

ध्वस्तीकरण के दौरान भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला की ओर से अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला मौके पर पहुँचे और कार्रवाई पर कड़ी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि भवन स्वामी को 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, ऐसे में उसी दिन सुबह ध्वस्तीकरण शुरू करना उचित नहीं है।

अधिवक्ता ने यह भी दावा किया कि ध्वस्तीकरण का अलग आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और केवल नोटिस के आधार पर कार्रवाई की जा रही है। भवन स्वामी पक्ष का आरोप है कि संबंधित कार्यालय बंद होने के कारण आदेश की प्रमाणित प्रति नहीं मिल सकी, जिससे कानूनी प्रक्रिया प्रभावित हुई। शुक्रवार को इसी मुद्दे पर अधिवक्ताओं ने विरोध भी दर्ज कराया था। अधिवक्ता ने घोषणा की कि इस मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।

22 जून का भीषण अग्निकांड: पृष्ठभूमि

22 जून को अलीगंज स्थित इस भवन की दूसरी मंजिल पर संचालित लाइब्रेरी और प्रशिक्षण केंद्र में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई थी। उस समय बड़ी संख्या में छात्र वहाँ मौजूद थे। कई लोगों ने पाइप और बिजली के तारों के सहारे नीचे उतरकर जान बचाई, जबकि एक युवक ऊँचाई से कूदने के कारण गंभीर रूप से घायल हो गया था।

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक भवनों में अग्नि सुरक्षा मानकों की अनदेखी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। गौरतलब है कि यह उत्तर प्रदेश में अग्नि सुरक्षा उल्लंघन से जुड़ी हालिया दुखद घटनाओं में से एक है।

सरकार और प्रशासन की प्रतिक्रिया

घटना के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित विभागों के चार अधिकारियों को निलंबित कर दिया था। पुलिस ने भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों में कथित लापरवाही के आरोप में चार लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया था। प्रारंभिक जाँच में भवन में अग्नि सुरक्षा व्यवस्थाओं और निर्माण संबंधी कई अनियमितताओं की बात सामने आई थी।

आगे क्या

भवन स्वामी पक्ष के न्यायालय में जाने की घोषणा के बाद यह मामला कानूनी मोड़ ले सकता है। एलडीए का ध्वस्तीकरण अभियान जारी है और प्राधिकरण ने संकेत दिया है कि अग्नि सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाली अन्य इमारतों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तब नियामक निगरानी कहाँ थी? चार अधिकारियों का निलंबन और चार गिरफ्तारियाँ जवाबदेही की शुरुआत हैं, अंत नहीं। जब तक अग्नि सुरक्षा ऑडिट को नियमित और बाध्यकारी नहीं बनाया जाता, ऐसे हादसे और उनके बाद की बुलडोजर कार्रवाइयाँ दोहराती रहेंगी।
RashtraPress
25 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलीगंज अग्निकांड में क्या हुआ था?
22 जून को लखनऊ के अलीगंज में एक चार मंजिला इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित लाइब्रेरी और प्रशिक्षण केंद्र में भीषण आग लगी, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई। उस समय बड़ी संख्या में छात्र वहाँ मौजूद थे और कई ने पाइप व तारों के सहारे उतरकर जान बचाई।
एलडीए ने इमारत क्यों गिराई?
एलडीए के अनुसार इमारत अवैध निर्माण और अग्नि सुरक्षा मानकों के उल्लंघन की दोषी थी। भवन स्वामी को स्वयं निर्माण हटाने का समय दिया गया था, लेकिन निर्धारित अवधि में कार्रवाई न होने पर प्राधिकरण ने 25 जुलाई को ध्वस्तीकरण शुरू कराया।
भवन स्वामी पक्ष ने क्या आपत्ति जताई?
भवन स्वामी वीरेंद्र शुक्ला के अधिवक्ता राजेंद्र शुक्ला ने कहा कि 25 जुलाई तक का समय दिया गया था, इसलिए उसी दिन सुबह कार्रवाई उचित नहीं है। उन्होंने यह भी दावा किया कि ध्वस्तीकरण का अलग आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया और मामले को न्यायालय में चुनौती दी जाएगी।
घटना के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटना का संज्ञान लेते हुए चार अधिकारियों को निलंबित किया। पुलिस ने कथित लापरवाही के आरोप में चार लोगों को गिरफ्तार किया और प्राथमिकी दर्ज की। प्रारंभिक जाँच में भवन में कई निर्माण और अग्नि सुरक्षा अनियमितताएँ पाई गईं।
ध्वस्तीकरण का खर्च कौन उठाएगा?
एलडीए अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यदि प्राधिकरण को पूरी ध्वस्तीकरण कार्रवाई स्वयं करनी पड़ी, तो इसका सारा खर्च भवन स्वामी से वसूला जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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