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अलीगंज अग्निकांड: ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर हमला — '15 मौतें आपकी सरकार के भ्रष्टाचार का नतीजा'

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अलीगंज अग्निकांड: ब्रजेश पाठक का अखिलेश पर हमला — '15 मौतें आपकी सरकार के भ्रष्टाचार का नतीजा'

सारांश

लखनऊ के अलीगंज में 15 लोगों की जान लेने वाले अग्निकांड पर सियासत तेज हो गई है। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव को सीधे जिम्मेदार ठहराया — कहा, 2014-16 में सपा सरकार ने अवैध नक्शा पास किया, ध्वस्तीकरण आदेश रद्द किया। योगी सरकार ने SIT बनाई, 4 अधिकारी निलंबित किए।

मुख्य बातें

अलीगंज अग्निकांड में 15 लोगों की मौत पर उत्तर प्रदेश में सियासी संग्राम छिड़ा।
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने आरोप लगाया कि अवैध इमारत का नक्शा 20 अगस्त 2014 को अखिलेश सरकार ने पास किया था।
10 मई 2016 का ध्वस्तीकरण आदेश महज दो महीने बाद 5 जुलाई 2016 को सपा सरकार ने रद्द कर दिया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने घटनास्थल का दौरा किया; 4 अधिकारी निलंबित, SIT गठित।
पाठक ने कहा कि जवाबदेह पाए जाने वाले सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने 23 जून को अलीगंज अग्निकांड पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा पलटवार किया। पाठक ने आरोप लगाया कि जिस अवैध इमारत में आग लगी और 15 लोगों की जान गई, उसका निर्माण एवं संरक्षण अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में हुआ था। उन्होंने कहा कि विपक्ष को मृतकों पर राजनीति करने के बजाय अपने कार्यकाल की जवाबदेही स्वीकार करनी चाहिए।

मुख्य आरोप: अखिलेश सरकार में हुआ 'असली खेल'

ब्रजेश पाठक ने कहा कि प्रश्नगत भवन 1980 में लॉटरी के माध्यम से आवंटित हुआ था, लेकिन निर्माण की असली कहानी अखिलेश यादव के शासनकाल में लिखी गई। उनके अनुसार, 20 अगस्त 2014 को तत्कालीन सरकार ने 1,992 वर्गफुट का आवासीय नक्शा पास किया। 2016 में अवैध निर्माण का मुकदमा दर्ज हुआ और 10 मई 2016 को ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया गया।

पाठक ने कहा कि इसके मात्र दो महीने बाद, 5 जुलाई 2016 को, अखिलेश सरकार ने वह ध्वस्तीकरण आदेश रद्द कर दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि यह निर्णय किसके दबाव में लिया गया। उपमुख्यमंत्री ने दावा किया कि सैटेलाइट तस्वीरें भी इस पूरे घटनाक्रम को उजागर करती हैं — दिसंबर 2015 में प्लॉट खाली था, फरवरी 2016 में निर्माण आरंभ हुआ और जून 2016 तक इमारत तैयार हो गई।

योगी सरकार की तत्काल कार्रवाई

पाठक ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर तत्काल घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मुलाकात की। उसी रात कार्रवाई शुरू करते हुए चार अधिकारियों को निलंबित किया गया। घटना की विस्तृत जाँच के लिए एसआईटी (विशेष जाँच दल) का गठन भी कर दिया गया है।

उपमुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जो भी व्यक्ति इस अग्निकांड में जवाबदेह पाया जाएगा, उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि पीड़ित परिवारों को न्याय दिलाना सरकार की प्राथमिकता है।

विपक्ष पर निशाना: 'एसी कमरे में राजनीति'

पाठक ने अखिलेश यादव पर सीधा प्रहार करते हुए कहा कि जब 15 परिवार अपने प्रियजनों को खोने के दर्द में डूबे हैं, तब विपक्ष के नेता वातानुकूलित कमरों में बैठकर राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सरकार के भ्रष्टाचार के 'इकोसिस्टम' ने पूरे प्रदेश में ऐसी खतरनाक और अवैध इमारतों को पनपने का मौका दिया, जो आज आम नागरिकों की जान ले रही हैं।

जवाबदेही का सवाल

उपमुख्यमंत्री ने पूछा कि अखिलेश यादव के कार्यकाल में अवैध निर्माण पर किसी अधिकारी के विरुद्ध क्या कार्रवाई हुई और क्या कोई जवाबदेही तय की गई। उन्होंने दावा किया कि इसका उत्तर 'बिल्कुल नहीं' है। पाठक ने इस अग्निकांड को तत्कालीन सपा सरकार की भ्रष्टाचार और प्रशासनिक लापरवाही का प्रमाण बताया।

एसआईटी जाँच के नतीजे और आगे की कानूनी कार्रवाई यह तय करेगी कि इस त्रासदी के लिए वास्तविक जिम्मेदारी किस पर निर्धारित होती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो यह गंभीर प्रशासनिक विफलता है जिसकी स्वतंत्र जाँच ज़रूरी है। लेकिन यह भी उतना ही महत्वपूर्ण है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में — जो लगभग आठ वर्षों से सत्ता में है — इस 'खतरनाक इमारत' पर क्यों कोई कार्रवाई नहीं हुई। SIT की जाँच तभी विश्वसनीय होगी जब वह केवल 2014-16 तक सीमित न रहे, बल्कि 2017 के बाद की निगरानी विफलताओं की भी पड़ताल करे।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अलीगंज अग्निकांड क्या है और इसमें कितने लोगों की मौत हुई?
लखनऊ के अलीगंज इलाके में एक इमारत में भीषण आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गई। यह इमारत कथित तौर पर अवैध निर्माण थी, जिसके नक्शे और ध्वस्तीकरण आदेश को लेकर अब राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।
ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव को जिम्मेदार क्यों ठहराया?
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के अनुसार, इस इमारत का अवैध नक्शा 20 अगस्त 2014 को अखिलेश सरकार ने पास किया और 5 जुलाई 2016 को ध्वस्तीकरण आदेश रद्द कर दिया गया। उनका कहना है कि यह सब अखिलेश यादव के मुख्यमंत्री काल में हुआ, इसलिए नैतिक जिम्मेदारी उन पर है।
योगी सरकार ने अग्निकांड के बाद क्या कदम उठाए?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने सभी कार्यक्रम रद्द कर घटनास्थल का दौरा किया और पीड़ित परिवारों से मिले। उसी रात चार अधिकारियों को निलंबित किया गया और विस्तृत जाँच के लिए SIT का गठन किया गया।
SIT की जाँच में क्या देखा जाएगा?
SIT इस अग्निकांड में जवाबदेह सभी पक्षों की जाँच करेगी। सरकार के अनुसार, नक्शा स्वीकृति से लेकर ध्वस्तीकरण आदेश रद्द होने तक की पूरी प्रक्रिया की पड़ताल होगी और दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
इस इमारत का निर्माण कब और कैसे हुआ?
पाठक के बयान के अनुसार, प्लॉट 1980 में लॉटरी से आवंटित हुआ था। सैटेलाइट तस्वीरों के हवाले से उन्होंने बताया कि दिसंबर 2015 तक प्लॉट खाली था, फरवरी 2016 में निर्माण शुरू हुआ और जून 2016 तक इमारत बनकर तैयार हो गई — यानी नियम-कानून की अनदेखी कर तेज़ी से निर्माण कराया गया।
राष्ट्र प्रेस
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