लखनऊ अग्निकांड: 15 मौतें, आदित्य की मां बोलीं — '10 मिनट देर से आता तो बच जाता मेरा बेटा'
सारांश
मुख्य बातें
लखनऊ के अलीगंज इलाके में स्थित एक इमारत में 22 जून 2026 को भड़की भीषण आग ने 15 लोगों की जान ले ली और कई अन्य को घायल कर दिया। मृतकों में आदित्य श्रीवास्तव भी शामिल हैं, जिनकी मौत धुएं से दम घुटने के कारण हुई — उनका शरीर आग से नहीं जला था। इस हादसे ने कई परिवारों को अपूरणीय क्षति पहुँचाई है।
परिवार की पीड़ा: 'दस मिनट की देरी होती तो...'
आदित्य की माँ कल्पना श्रीवास्तव ने आँसुओं के बीच बताया कि उनके बेटे को इसी साल जनवरी 2026 में नौकरी मिली थी और वह अपने करियर को लेकर बेहद उत्साहित था। उन्होंने कहा, 'सब खत्म हो गया। मेरा बेटा वहाँ नौकरी करने गया था। उसका लंच टाइम दोपहर एक से दो बजे के बीच होता था। वह लंच करके करीब 10 मिनट पहले ही वापस ऑफिस पहुँच गया था — दो बजने में लगभग 10 मिनट बाकी थे, तभी वहाँ आग लग गई। अगर वह कुछ देर बाद पहुँचता तो शायद उसकी जान बच जाती।'
आदित्य के रिश्तेदार विशाल श्रीवास्तव ने बताया कि आदित्य उनके बुआ के बेटे थे। विशाल के अनुसार, 'वह बिल्डिंग के अंदर फंस गए थे और संभवतः धुएं की वजह से उनकी जान चली गई।' कल्पना ने स्पष्ट किया कि उनके बेटे का शरीर आग से नहीं जला — मौत केवल धुएं से दम घुटने के कारण हुई।
मुख्यमंत्री का दौरा और राहत घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ हादसे के बाद घटनास्थल पर पहुँचे और राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। इसके बाद वे किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) भी गए, जहाँ घायलों और उनके परिजनों से मुलाकात की तथा चिकित्सकों से उपचार की स्थिति की जानकारी ली।
योगी सरकार ने मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50,000 की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।
उच्चस्तरीय बैठक और SIT गठन
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, सीएम योगी की अध्यक्षता में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें दुर्घटना की स्थिति और राहत-बचाव कार्यों की समीक्षा हुई।
इस बैठक में दो सदस्यीय विशेष जाँच दल (SIT) के गठन का निर्णय लिया गया। SIT में अपर मुख्य सचिव (पर्यटन, धर्मार्थ एवं संस्कृति विभाग) अमृत अभिजात और लखनऊ जोन के अपर पुलिस महानिदेशक प्रवीण कुमार को शामिल किया गया है। मुख्यमंत्री ने SIT को घटना की विस्तृत जाँच कर सात दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।
आम जनता और परिवारों पर असर
यह हादसा ऐसे समय में आया है जब शहरी इमारतों में अग्नि सुरक्षा मानकों की पालना को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। गौरतलब है कि आदित्य जैसे युवा, जो नई नौकरी के साथ अपना भविष्य बना रहे थे, इस त्रासदी में असमय काल के गाल में समा गए। अलीगंज क्षेत्र के कई परिवार अभी भी सदमे में हैं और मृतकों के परिजन न्याय की माँग कर रहे हैं।
आगे क्या होगा
SIT को सात दिनों में अपनी रिपोर्ट देनी है, जिसमें आग लगने के कारण, इमारत में सुरक्षा मानकों की स्थिति और जिम्मेदारी तय करने के बिंदु शामिल होने की उम्मीद है। प्रशासन की ओर से राहत राशि के वितरण की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस हादसे के बाद लखनऊ में व्यावसायिक इमारतों की अग्नि सुरक्षा जाँच को लेकर दबाव बढ़ने की संभावना है।