लुंगलेई: मिजोरम की संस्कृति और अद्भुत प्राकृतिक नजारों का अद्वितीय स्थल
सारांश
Key Takeaways
- लुंगलेई मिजोरम का एक अनोखा पर्यटन स्थल है।
- यहाँ की प्राकृतिक सुंदरता मन को शांति देती है।
- ट्रैकिंग और वन्यजीवों के लिए आदर्श गंतव्य।
- फुननाउमा की चट्टान की रोचक लोककथाएँ हैं।
- मिजो संस्कृति और ऑथेंटिक व्यंजनों का अनुभव।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गर्मियों की शुरुआत के साथ, जून और जुलाई में आने वाली छुट्टियों की योजना बनाना महीनों पहले से शुरू हो जाता है। यदि आप प्रकृति, ट्रैकिंग, और ब्रिटिश मिशनरियों की झलक एक साथ देखना चाहते हैं, तो हम आपको मिजोरम के उस अद्भुत स्थान के बारे में बता रहे हैं, जहां मन को शांति देने वाली कई चीजें एकत्रित होती हैं। हम बात कर रहे हैं लुंगलेई की।
अपने नाम की तरह, मिजोरम का यह शहर वास्तव में अनोखा है, जहां प्रकृति के सुंदर नज़ारे देखने को मिलते हैं। यहाँ की नदियों का पानी इतना साफ है कि आप तल में बैठे कंकड़ को स्पष्ट रूप से देख सकते हैं। आइजोल से 169 किलोमीटर की दूरी पर स्थित लुंगलेई, जमीन से 1222 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। लुंगलेई का अर्थ है "चट्टानों का पुल"। यहाँ पहाड़, नदियाँ, और प्रकृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। यही कारण है कि गर्मियों के मौसम में यहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होती है।
लुंगलेई पहुँचकर खावंगलुंग वन्यजीव अभयारण्य अवश्य जाएं। यह प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव प्रेमियों का प्रिय स्थान है। यहाँ आप तेंदुआ, सांभर, बार्किंग डियर और हूलॉक गिब्बन जैसे वन्यजीव देख सकते हैं। यहाँ सफारी का आनंद भी लिया जा सकता है। मार्च से अक्टूबर का समय यहाँ घूमने के लिए सबसे उत्तम होता है।
लुंगपुई शहर से 100 किमी दूर, लुंगपुई त्लांग मौजूद है, जिसे फुननाउमा की चट्टान कहा जाता है। यहाँ लुंगपुई की सबसे पुरानी और बड़ी चट्टान है, जिसके लिए पर्यटकों को कठिन ट्रैकिंग करनी पड़ती है। यहाँ से शहर का दृश्य देखना एक अद्भुत अनुभव होता है। फुननाउमा की चट्टान से संबंधित कई लोककथाएँ भी प्रचलित हैं। ऐसा माना जाता है कि यहाँ परियाँ शिकार के लिए आती थीं और इस चट्टान की खोज फुननाउमा नामक व्यक्ति ने की थी, इसलिए इसे यह नाम मिला।
लुंगलेई के हरे-भरे पहाड़ मन को विशेष शांति प्रदान करते हैं और यहाँ का मौसम भी सुखद रहता है। प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ, लुंगलेई में मिजोरम की संस्कृति का अद्भुत अनुभव भी मिलता है। गाँव के लोग आज भी मिजोरम की संस्कृति से जुड़े हुए हैं और यहाँ के ऑथेंटिक और शानदार व्यंजनों का स्वाद भी लिया जा सकता है।