जबलपुर से शुरू हुआ 11 लाख पौधों का अभियान, CM मोहन यादव ने दी मेट्रोपॉलिटन सिटी की सौगात
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 1 अगस्त 2026 को जबलपुर के गीता भवन परिसर में विकास कार्यों का शिलान्यास और लोकार्पण करते हुए राज्यव्यापी 11 लाख पौधरोपण अभियान का शुभारंभ किया। इसी अवसर पर उन्होंने घोषणा की कि जबलपुर नगर निगम को अगले एक वर्ष के भीतर मेट्रोपॉलिटन सिटी का दर्जा दिया जाएगा।
मेट्रोपॉलिटन सिटी और विकास की घोषणाएँ
मुख्यमंत्री यादव ने मौके पर ही कमिश्नर, कलेक्टर और अन्य संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि जबलपुर मेट्रोपॉलिटन सिटी का ड्राफ्ट प्रपोजल जल्द से जल्द तैयार किया जाए। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जबलपुर में एक फर्नीचर क्लस्टर स्थापित किया जाएगा, जो स्थानीय उद्योग को नई गति देगा।
इसके अलावा, प्रदेश की जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी को अब मध्यप्रदेश के एम्स (राज्यस्तरीय आयुर्विज्ञान संस्थान) के रूप में विकसित किया जाएगा। यह निर्णय क्षेत्र में उच्च-स्तरीय चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की माँग को देखते हुए लिया गया है।
पर्यटन और शिक्षा को बढ़ावा
पर्यटन के क्षेत्र में मुख्यमंत्री यादव ने घोषणा की कि जबलपुर और आसपास के नेशनल पार्क में आने वाले पर्यटकों के लिए मदन महल पहाड़ी के निकट एक चिड़ियाघर (जू) बनाया जाएगा, जहाँ वाइल्ड एनीमल्स विजिबिलिटी की विशेष सुविधा उपलब्ध होगी। शिक्षा के मोर्चे पर जिले की सभी विधानसभा क्षेत्रों में आवश्यकतानुसार सांदीपनि विद्यालय भी स्थापित किए जाएँगे।
पौधरोपण अभियान: मियावाकी पद्धति से हरियाली
मुख्यमंत्री यादव ने कहा कि प्रकृति के साथ संबंध को और मज़बूत करने के लिए यह सघन पौधरोपण अभियान जबलपुर से शुरू किया गया है। उन्होंने जापानी मियावाकी पद्धति का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत एक एकड़ भूमि पर 12,000 पौधे लगाए जा सकते हैं और यह क्षेत्र तीन वर्ष से कम समय में सघन वन में तब्दील हो जाता है।
उन्होंने कहा, 'पेड़ हमारे जीवन में ऋषि-मुनियों के समान होते हैं — वे सबको स्वच्छ हवा और जीवन देते हैं।' यह ऐसे समय में आया है जब पूरे देश में शहरीकरण के कारण हरित आवरण पर दबाव बढ़ रहा है।
नदियाँ और पर्यावरण: मध्यप्रदेश की विरासत
मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को 'देश में नदियों का मायका' बताया। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी गुजरात और राजस्थान को भी समृद्धि प्रदान करती है, जबकि चंबल और सोन जैसी नदियाँ गंगा-यमुना की धारा को गति देती हैं। उनके अनुसार, जंगलों को हरा-भरा रखना न केवल पर्यावरणीय ज़िम्मेदारी है, बल्कि भारत की 'वसुधैव कुटुम्बकम' की परंपरा का भी अभिन्न हिस्सा है।
आगे क्या
मेट्रोपॉलिटन सिटी का ड्राफ्ट प्रपोजल, फर्नीचर क्लस्टर की रूपरेखा और मेडिकल यूनिवर्सिटी के एम्स-स्तरीय उन्नयन की विस्तृत योजना अगले कुछ हफ्तों में सामने आने की उम्मीद है। 11 लाख पौधरोपण अभियान की प्रगति राज्य सरकार के पर्यावरण संकल्प की असली परीक्षा होगी।