मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना: MP में 1,164 मार्गों पर 5,206 बसें, CM मोहन यादव का शीघ्र शुभारंभ का निर्देश

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मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना: MP में 1,164 मार्गों पर 5,206 बसें, CM मोहन यादव का शीघ्र शुभारंभ का निर्देश

सारांश

मध्य प्रदेश में लोक परिवहन की कायापलट की तैयारी है — 7 क्षेत्रों में 1,164 मार्गों पर 5,206 बसें, एकीकृत एम्बुलेंस नेटवर्क और देशभर में पहला सड़क सुरक्षा सचिवालय। CM मोहन यादव का संदेश साफ है: परिवहन केवल यात्रा नहीं, विकास की जीवन रेखा है।

मुख्य बातें

मोहन यादव ने 21 मई 2026 को परिवहन विभाग समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के शीघ्र शुभारंभ का निर्देश दिया।
योजना के पहले चरण में 1,164 मार्गों पर 5,206 बसें अगले दो वर्षों में चलाई जाएंगी, जो 7 क्षेत्रों में विभाजित हैं।
वित्त वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग ने ₹4,400 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध ₹4,911.78 करोड़ राजस्व अर्जित किया — लक्ष्य से 111.6% अधिक।
पीएम-राहत और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर; 55 जिलों में नोडल अधिकारी ऑनबोर्ड।
दुर्घटना स्थल पर 30 मिनट से कम में एम्बुलेंस पहुँचाने के लिए सभी विभागों की सेवाएँ एक प्लेटफॉर्म पर एकीकृत होंगी।
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की अनुशंसा पर प्रदेश में 'म.प्र.
राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का गठन किया जा रहा है।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 21 मई 2026 को भोपाल में परिवहन विभाग की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए निर्देश दिया कि प्रदेश के नागरिकों को संस्थागत लोक परिवहन सुविधा देने के लिए मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना को जल्द से जल्द धरातल पर उतारा जाए। योजना के पहले चरण में प्रदेश के 1,164 मार्गों पर अगले दो वर्षों में 5,206 बसों का संचालन किया जाएगा। बैठक में परिवहन एवं स्कूल शिक्षा मंत्री उदय प्रताप सिंह भी उपस्थित रहे।

योजना की संरचना और क्षेत्रीय विभाजन

परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बैठक में बताया कि मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना दो चरणों में क्रियान्वित की जाएगी। इसके लिए प्रदेश को 7 क्षेत्रों में विभाजित किया गया है — इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) और रीवा (शहडोल सहित)।

पहले चरण में क्षेत्रवार बस संचालन इस प्रकार होगा: इंदौर क्षेत्र में 121 मार्गों पर 608 बसें, उज्जैन क्षेत्र में 120 मार्गों पर 371 बसें, भोपाल क्षेत्र में 104 मार्गों पर 398 बसें, जबलपुर क्षेत्र में 83 मार्गों पर 309 बसें, सागर क्षेत्र में 92 मार्गों पर 344 बसें, ग्वालियर क्षेत्र में 65 मार्गों पर 298 बसें और रीवा क्षेत्र में 35 मार्गों पर 184 बसें चलाई जाएंगी। सभी बसों का रंग एकसमान रखा जाएगा। क्षेत्रीय मुख्यालयों से उपनगरीय क्षेत्रों तक विस्तारित मार्गों की विभागीय अधिसूचना पहले ही जारी की जा चुकी है।

सड़क सुरक्षा और आपातकालीन सेवाओं पर जोर

मुख्यमंत्री यादव ने निर्देश दिया कि प्रदेश में सर्वाधिक दुर्घटना-प्रवण क्षेत्रों की मैपिंग कराई जाए, ताकि पीड़ितों को समय पर चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि विभिन्न विभागों की एम्बुलेंस सेवाओं को एक ही प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जाए, जिससे दुर्घटना स्थल के सबसे निकटतम एम्बुलेंस को ऑटो मोड में 30 मिनट से भी कम समय में भेजा जा सके।

यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या चिंताजनक बनी हुई है। मध्य प्रदेश सरकार की यह पहल 'गोल्डन ऑवर' के भीतर उपचार सुनिश्चित करने की दिशा में एक व्यावहारिक कदम मानी जा रही है।

राजस्व उपलब्धि और फेसलेस सेवाएँ

परिवहन सचिव मनीष सिंह ने बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 में विभाग को दिए गए ₹4,400 करोड़ के राजस्व लक्ष्य के विरुद्ध ₹4,911.78 करोड़ की आय अर्जित की गई, जो निर्धारित लक्ष्य से 111.6 प्रतिशत अधिक है। वर्तमान वित्त वर्ष 2026-27 के लिए ₹5,721 करोड़ का राजस्व लक्ष्य रखा गया है।

विभाग द्वारा प्रदेश में 51 प्रकार की फेसलेस सेवाएँ दी जा रही हैं, जिससे नागरिकों को बिचौलियों से मुक्ति मिली है और पारदर्शी सेवा प्रदाय सुनिश्चित हुआ है।

PM-राहत और राहवीर योजना में राष्ट्रीय अव्वल

बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना और राहवीर योजना के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश पूरे देश में पहले स्थान पर है। पीएम-राहत योजना में राज्य के सभी 55 जिलों में जिला नोडल अधिकारियों को ऑनबोर्ड किया जा चुका है और कुल 2,298 प्रकरणों में से 1,692 को अनुमोदित किया जा चुका है। राहवीर योजना में 109 आवेदनों में से 49 प्रकरण मंजूर किए गए हैं, जिसमें बालाघाट जिले का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की हाल ही में मध्य प्रदेश में हुई बैठक में कमेटी के अध्यक्ष एवं सदस्यों ने इन दोनों योजनाओं के सफल क्रियान्वयन के लिए राज्य सरकार की भूरि-भूरि प्रशंसा की। इसी कमेटी की अनुशंसा पर प्रदेश में 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का गठन भी किया जा रहा है।

आगे की राह

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने परिवहन चौकियों और टोल नाकों को आधुनिक एवं एकीकृत बनाने, परिवहन विभाग में मानव संसाधन की कमी दूर करने और राहवीर योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार के भी निर्देश दिए। योजना के दूसरे चरण के मार्गों की अधिसूचना शीघ्र जारी होने की उम्मीद है, और एक इंटेलीजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम स्थापित किया जा रहा है जो सभी बसों की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

206 बसों का यह लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, लेकिन असली कसौटी क्रियान्वयन की गति होगी — राज्य में सार्वजनिक बस सेवाओं का इतिहास घोषणाओं और वास्तविक संचालन के बीच लंबे अंतराल का रहा है। एकीकृत एम्बुलेंस नेटवर्क और 30 मिनट की प्रतिक्रिया समय की प्रतिबद्धता सराहनीय है, परंतु इसके लिए अंतर-विभागीय समन्वय की जो चुनौती है वह कागज़ पर सरल दिखती है, ज़मीन पर नहीं। ₹5,721 करोड़ का राजस्व लक्ष्य और 51 फेसलेस सेवाएँ विभाग की क्षमता का प्रमाण देती हैं, लेकिन ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में बस संचालन की व्यावसायिक व्यवहार्यता पर अभी स्पष्टता नहीं है।
RashtraPress
21 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना क्या है?
यह मध्य प्रदेश सरकार की लोक परिवहन योजना है, जिसके तहत प्रदेश के 7 क्षेत्रों में 1,164 मार्गों पर 5,206 बसें चलाई जाएंगी। योजना दो चरणों में लागू होगी और इसका उद्देश्य ग्रामीण व शहरी नागरिकों को संस्थागत एवं सुरक्षित परिवहन सुविधा देना है।
योजना के पहले चरण में कौन-कौन से क्षेत्र शामिल हैं?
पहले चरण में इंदौर, उज्जैन, भोपाल (नर्मदापुरम सहित), जबलपुर, सागर, ग्वालियर (चंबल सहित) और रीवा (शहडोल सहित) — कुल 7 क्षेत्र शामिल हैं। इनमें सबसे अधिक 608 बसें इंदौर क्षेत्र के 121 मार्गों पर चलेंगी।
MP परिवहन विभाग ने 2025-26 में कितना राजस्व अर्जित किया?
वित्त वर्ष 2025-26 में परिवहन विभाग ने ₹4,400 करोड़ के लक्ष्य के विरुद्ध ₹4,911.78 करोड़ राजस्व अर्जित किया, जो निर्धारित लक्ष्य से 111.6 प्रतिशत अधिक है। 2026-27 के लिए ₹5,721 करोड़ का लक्ष्य रखा गया है।
राहवीर योजना और पीएम-राहत योजना में MP की क्या उपलब्धि है?
दोनों योजनाओं के क्रियान्वयन में मध्य प्रदेश देश में पहले स्थान पर है। पीएम-राहत योजना में 2,298 में से 1,692 प्रकरण अनुमोदित हो चुके हैं और राहवीर योजना में 109 में से 49 प्रकरण मंजूर किए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी ने भी इन उपलब्धियों की प्रशंसा की है।
MP में सड़क सुरक्षा सचिवालय क्यों बनाया जा रहा है?
सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी की अनुशंसा पर 'म.प्र. राज्य सड़क सुरक्षा सचिवालय' का गठन किया जा रहा है, ताकि सड़क सुरक्षा से जुड़े सभी प्रयासों को एक केंद्रीकृत ढाँचे के तहत संचालित किया जा सके। इसका उद्देश्य दुर्घटनाओं में कमी लाना और आपातकालीन प्रतिक्रिया को तेज़ करना है।
राष्ट्र प्रेस
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