उज्जैन: आषाढ़ कृष्ण तृतीया पर बाबा महाकाल की भव्य भस्म आरती, मस्तक पर श्री राम नाम और वैष्णव तिलक
सारांश
मुख्य बातें
उज्जैन के श्री महाकालेश्वर मंदिर में 3 जुलाई 2026 को आषाढ़ कृष्ण पक्ष तृतीया के पावन अवसर पर बाबा महाकाल की अलौकिक भस्म आरती संपन्न हुई। हजारों श्रद्धालुओं ने देर रात से ही मंदिर परिसर में कतार लगाकर इस दिव्य दृश्य के दर्शन किए। पूरा मंदिर परिसर 'जय श्री महाकाल' के जयघोष, घंटियों और शंखध्वनि से गुंजायमान हो उठा।
कपाट खुलने का दिव्य क्रम
शुक्रवार तड़के भगवान वीरभद्र की आज्ञा लेने के पश्चात ढोल-नगाड़ों की गूँज के बीच बाबा महाकाल के कपाट विधिवत खोले गए। मंत्रोच्चार के साथ जलाभिषेक किया गया और इसके बाद दूध, दही, घी, शक्कर और फलों के रस से निर्मित पंचामृत से अभिषेक संपन्न हुआ। बाबा को हरि ओम का जल भी अर्पित किया गया।
विशेष शृंगार और भस्म आरती
इस अवसर पर बाबा महाकाल के मस्तक पर श्री राम का नाम और वैष्णव तिलक लगाया गया — जो इस विशेष तिथि की धार्मिक परंपरा का अभिन्न अंग है। मंदिर के पुजारियों ने दिव्य शृंगार के बाद महाआरती संपन्न कराई। गौरतलब है कि पहले भस्म आरती में श्मशान की राख का उपयोग होता था, किंतु अब कपिला गाय के गोबर और औषधीय जड़ी-बूटियों से विशेष रूप से तैयार भस्म का उपयोग किया जाता है।
श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़
भस्म आरती के दर्शन के लिए देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उज्जैन पहुँचे। भक्त बीती रात से ही कतारबद्ध होकर खड़े रहे। आरती के दौरान पुरुषों के लिए पारंपरिक धोती-सोला और महिलाओं के लिए साड़ी पहनना अनिवार्य है — यह परंपरा मंदिर की गरिमा और धार्मिक अनुशासन को बनाए रखती है।
सुरक्षा और व्यवस्था
मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी ताकि श्रद्धालुओं की भीड़ का सुचारू प्रबंधन हो सके। बाबा महाकाल की भस्म आरती की ख्याति देश की सीमाओं से परे है — इसे देखने के लिए आम जनमानस के साथ-साथ著名 हस्तियाँ भी उज्जैन आती रही हैं। आने वाले सावन माह में श्रद्धालुओं की संख्या और भी अधिक बढ़ने की संभावना है।