महाराष्ट्र कैबिनेट का बड़ा फैसला: पिंक ई-रिक्शा योजना में सब्सिडी 20% से बढ़ाकर 40% की गई
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र सरकार ने 14 जुलाई 2026 को महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता को मज़बूत करने की दिशा में एक ठोस कदम उठाते हुए अपनी प्रमुख पिंक ई-रिक्शा योजना में व्यापक बदलावों को मंजूरी दी। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सब्सिडी को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने का निर्णय लिया गया, जिससे महिला लाभार्थियों के लिए ई-रिक्शा खरीदना अब पहले की तुलना में कहीं अधिक सुलभ हो जाएगा।
योजना में क्या-क्या बदला
महिला एवं बाल विकास मंत्री अदिति तटकरे के कार्यालय द्वारा जारी विज्ञप्ति के अनुसार, संशोधित ढाँचे के तहत नई लाभार्थी महिलाओं के साथ-साथ पहले से वाहन प्राप्त कर चुकी महिलाओं को भी बढ़ी हुई सब्सिडी का लाभ मिलेगा। इससे उन महिलाओं के बचे हुए ऋण का बोझ सीधे तौर पर कम होगा जो पहले से योजना में शामिल हैं।
वित्तीय ढाँचे के अनुसार, लाभार्थी महिला को वाहन की कुल लागत का कम से कम 10 प्रतिशत स्वयं वहन करना होगा। शेष राशि का भुगतान आपूर्तिकर्ता कंपनी द्वारा दिए जाने वाले ब्याज मुक्त आंशिक स्थगित भुगतान के माध्यम से, अथवा राष्ट्रीयकृत बैंकों, निजी बैंकों, शहरी सहकारी बैंकों या जिला केंद्रीय सहकारी बैंकों से स्वीकृत ऋण के ज़रिये किया जा सकेगा।
भौगोलिक विस्तार और प्रशासनिक सुधार
यह योजना अब तक महाराष्ट्र के आठ जिलों तक सीमित थी। मंत्रिमंडल ने इसे अन्य जिलों तक विस्तार देने की भी स्वीकृति दे दी है। इसके साथ ही, महिला एवं बाल विकास मंत्री को विभिन्न जिलों में लाभार्थियों के लक्ष्य का पुनर्वितरण करने का अधिकार दिया गया है, ताकि योजना का लाभ समान रूप से सभी क्षेत्रों तक पहुँच सके।
पारदर्शिता और प्रक्रिया में तेज़ी लाने के उद्देश्य से सब्सिडी वितरण की पूरी व्यवस्था को महिला एवं बाल विकास आयुक्त कार्यालय, पुणे के माध्यम से केंद्रीकृत किया गया है। यह कदम पहले की विकेंद्रीकृत प्रणाली में आ रही देरी और विसंगतियों को दूर करने के लिए उठाया गया है।
महिलाओं पर प्रभाव
यह ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार महिला उद्यमिता को नीतिगत प्राथमिकता के रूप में आगे बढ़ा रही है। पिंक ई-रिक्शा योजना का मूल उद्देश्य महिलाओं को परिवहन क्षेत्र में स्वरोज़गार के अवसर उपलब्ध कराना है — एक ऐसा क्षेत्र जो परंपरागत रूप से पुरुष-प्रधान रहा है। सब्सिडी दोगुनी होने से प्रवेश की वित्तीय बाधा उल्लेखनीय रूप से कम होगी।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, ये बदलाव महिलाओं के लिए स्थायी और आत्मनिर्भर रोज़गार के अवसर पैदा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं, जिससे वे राज्य के आर्थिक विकास में सक्रिय योगदान दे सकेंगी।
प्रशासनिक लचीलापन
मंत्रिमंडल ने महिला एवं बाल विकास मंत्री को योजना के संचालन ढाँचे में आवश्यकतानुसार बदलाव करने की प्रशासनिक छूट भी दी है। इसका उद्देश्य भविष्य में आने वाली व्यावहारिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है। गौरतलब है कि यह लचीलापन योजना के क्रियान्वयन में आने वाली बाधाओं को बिना अतिरिक्त कैबिनेट अनुमोदन के दूर करने में सहायक होगा।