10 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

महाराष्ट्र में स्टाम्प ड्यूटी गड़बड़ी और अवैध खनन की जांच को दो विशेष टास्क फोर्स गठित

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
महाराष्ट्र में स्टाम्प ड्यूटी गड़बड़ी और अवैध खनन की जांच को दो विशेष टास्क फोर्स गठित

सारांश

महाराष्ट्र सरकार ने स्टाम्प ड्यूटी घोटाले और अवैध खनन — दोनों मोर्चों पर एक साथ कार्रवाई का ऐलान किया है। अकाउंटेंट जनरल की निगरानी में पाँच साल के रजिस्ट्रेशन की जांच और राज्यभर में खनन पर विशेष टास्क फोर्स — यह महाराष्ट्र के राजस्व प्रशासन में जवाबदेही की दिशा में बड़ा कदम है।

मुख्य बातें

महाराष्ट्र सरकार ने 25 जून 2026 को विधानसभा में दो स्वतंत्र विशेष टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की।
स्टाम्प ड्यूटी जांच अकाउंटेंट जनरल (एजी) कार्यालय की निगरानी में होगी; 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 तक के मामले समीक्षा में आएंगे।
सीनियर क्लर्क राजकुमार दाहिफले पर आरोप — 10 दिनों में 941 से अधिक दस्तावेज़ रजिस्टर किए, कथित राजस्व नुकसान ₹13.91 करोड़ ।
दोषी अधिकारियों पर निलंबन, आपराधिक मामले और बर्खास्तगी की कार्रवाई होगी।
छोटे खनिजों के अवैध खनन पर अंकुश के लिए अलग टास्क फोर्स गठित की जाएगी।

महाराष्ट्र सरकार ने 25 जून 2026 को विधानसभा में दो स्वतंत्र विशेष टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की — पहली, स्टाम्प ड्यूटी रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की जांच के लिए, और दूसरी, राज्यभर में छोटे खनिजों के अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए। राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने प्रश्नकाल के दौरान ये घोषणाएं कीं।

स्टाम्प ड्यूटी जांच का दायरा

स्टाम्प ड्यूटी से जुड़ी जांच सीधे अकाउंटेंट जनरल (एजी) कार्यालय की निगरानी में होगी — राजस्व विभाग की आंतरिक जांच के बजाय। एजी 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच निपटाए गए सभी स्टाम्प ड्यूटी एडजुडिकेशन मामलों की गहन समीक्षा करेंगे। सरकार इस स्वतंत्र टास्क फोर्स को आवश्यक जनशक्ति, संसाधन और वित्तीय सहायता उपलब्ध कराएगी।

बावनकुले ने यह भी स्पष्ट किया कि स्टाम्प विभाग में एडजुडिकेशन की प्रक्रिया अर्ध-न्यायिक होने के बावजूद स्टाम्प अधिनियम का कड़ाई से पालन अनिवार्य है। गैर-कानूनी तरीके से एडजुडिकेशन करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज करने हेतु नई मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) और प्रशासनिक आदेश जारी किए जाएंगे।

एक अधिकारी का मामला — 10 दिन में 941 दस्तावेज़

मंत्री ने सीनियर क्लर्क राजकुमार दाहिफले का उदाहरण सदन के सामने रखा। आरोप है कि दाहिफले ने स्टाम्प ऑफिसर का पद संभालने के महज 10 दिनों के भीतर 941 से अधिक दस्तावेज़ रजिस्टर किए, जिससे कथित तौर पर महाराष्ट्र रीजनल एंड टाउन प्लानिंग (एमआरटीपी) अधिनियम, 1966 का उल्लंघन हुआ और राज्य को लगभग ₹13.91 करोड़ के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा। इस मामले में पुलिस केस दर्ज हो चुका है और अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है। अंतिम जांच रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद सरकार उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की प्रक्रिया भी शुरू करेगी।

दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की चेतावनी

बावनकुले ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में स्टाम्प अधिनियम का उल्लंघन सिद्ध होता है, तो दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा, उन पर आपराधिक मामले दर्ज होंगे और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यह घोषणा विधायक जितेंद्र आव्हाड के मूल प्रश्न और विधायक नाना पटोले के पूरक प्रश्न के जवाब में की गई।

अवैध खनन पर अलग टास्क फोर्स

छोटे खनिजों की गैर-कानूनी माइनिंग के मुद्दे पर — जिसे विधायक नाना पटोले ने उठाया और विधायक भास्कर जाधव ने समर्थन दिया — मंत्री ने कहा कि इस समस्या से निपटने के लिए एक पृथक विशेष टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। यह टास्क फोर्स राज्यभर में अवैध खनन गतिविधियों पर निगरानी और रोकथाम के लिए काम करेगी।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि महाराष्ट्र में स्टाम्प ड्यूटी से जुड़ी अनियमितताओं की शिकायतें लंबे समय से उठती रही हैं। एजी की स्वतंत्र निगरानी में जांच को विपक्ष और सत्तापक्ष दोनों ने महत्वपूर्ण कदम बताया है। दोनों टास्क फोर्स के गठन की अधिसूचना और उनकी कार्यप्रणाली का विवरण शीघ्र जारी होने की उम्मीद है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि टास्क फोर्स की रिपोर्ट कितनी जल्दी और कितनी पारदर्शिता से सार्वजनिक होती है। राजकुमार दाहिफले का मामला महज एक अधिकारी की चूक नहीं, बल्कि उस निगरानी तंत्र की विफलता का प्रतीक है जो 10 दिनों में 941 दस्तावेज़ों की असाधारण रजिस्ट्रेशन को रोक नहीं सका। अवैध खनन पर टास्क फोर्स की घोषणा पहले भी हो चुकी है — इस बार ठोस परिणाम तभी आएंगे जब फोर्स को वास्तविक अधिकार और जवाबदेही दी जाए, न कि सिर्फ प्रशासनिक ढांचा।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

महाराष्ट्र में स्टाम्प ड्यूटी जांच के लिए कौन सी संस्था जिम्मेदार होगी?
स्टाम्प ड्यूटी रजिस्ट्रेशन में कथित अनियमितताओं की जांच अकाउंटेंट जनरल (एजी) कार्यालय की सीधी निगरानी में एक स्वतंत्र टास्क फोर्स करेगी। यह जांच 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 के बीच के सभी एडजुडिकेशन मामलों को कवर करेगी।
राजकुमार दाहिफले मामले में क्या आरोप हैं?
सीनियर क्लर्क राजकुमार दाहिफले पर आरोप है कि उन्होंने स्टाम्प ऑफिसर का पद संभालने के 10 दिनों के भीतर 941 से अधिक दस्तावेज़ रजिस्टर किए, जिससे एमआरटीपी अधिनियम, 1966 का कथित उल्लंघन हुआ और लगभग ₹13.91 करोड़ का राजस्व नुकसान हुआ। उन्हें निलंबित कर दिया गया है और पुलिस केस दर्ज हो चुका है।
दोषी स्टाम्प अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी?
राजस्व मंत्री बावनकुले के अनुसार, स्टाम्प अधिनियम का उल्लंघन सिद्ध होने पर दोषी अधिकारियों को निलंबित किया जाएगा, उन पर आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे और कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। गैर-कानूनी एडजुडिकेशन के लिए नई एसओपी और प्रशासनिक आदेश भी जारी होंगे।
महाराष्ट्र में अवैध खनन रोकने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
सरकार छोटे खनिजों के अवैध खनन पर अंकुश लगाने के लिए एक अलग विशेष टास्क फोर्स गठित करेगी। यह मुद्दा विधायक नाना पटोले और भास्कर जाधव ने विधानसभा में उठाया था, जिसके जवाब में राजस्व मंत्री ने यह घोषणा की।
ये घोषणाएं विधानसभा में किसने और कब कीं?
राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने 25 जून 2026 को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान ये घोषणाएं कीं। ये घोषणाएं विधायक जितेंद्र आव्हाड के मूल प्रश्न और विधायक नाना पटोले के पूरक प्रश्न के जवाब में की गईं।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 4 दिन पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 3 महीने पहले
  5. 4 महीने पहले
  6. 4 महीने पहले
  7. 5 महीने पहले
  8. 8 महीने पहले