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महिला आरक्षण कानून लागू करने से भाग रही है सरकार: सीपीआई नेता एनी राजा का BJP पर सीधा हमला

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महिला आरक्षण कानून लागू करने से भाग रही है सरकार: सीपीआई नेता एनी राजा का BJP पर सीधा हमला

सारांश

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हो चुका है — फिर भी लागू नहीं। सीपीआई नेता एनी राजा का सीधा आरोप: BJP महिलाओं को संसद की सीट से दूर रखना चाहती है। तीस साल पुरानी लड़ाई अब क्रियान्वयन की दीवार से टकरा रही है।

मुख्य बातें

सीपीआई नेता एनी राजा ने 28 अगस्त को कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही कानून बन चुका है, अब सवाल केवल क्रियान्वयन का है।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान को एनी राजा ने 'गलत' करार दिया और सरकार पर महिलाओं को गुमराह करने का आरोप लगाया।
एनी राजा के अनुसार 1996 से यानी 30 वर्षों से महिलाएँ इस अधिकार के लिए लड़ रही हैं; 2010 में राज्यसभा में बिल पास भी हो चुका था।
राजा ने संसद स्थगन पर सवाल उठाए, कहा — सरकार का इरादा स्पष्ट नहीं।
सीपीआई ने नेपाल बाढ़ में फँसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पर भी चिंता जताई और केंद्र से तत्काल कार्रवाई की माँग की।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) की वरिष्ठ नेता एनी राजा ने 28 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के बयान को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 पहले ही संसद में पास होकर कानून बन चुका है — अब असली सवाल उसे लागू करने की राजनीतिक इच्छाशक्ति का है। उनका आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) जानबूझकर इस कानून को ठंडे बस्ते में डाले रखना चाहती है।

रिजिजू के बयान पर सीधा पलटवार

एनी राजा ने स्पष्ट शब्दों में कहा, 'संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू गलत बात कह रहे हैं। महिलाओं के अधिकारों पर बिल 2023 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम के नाम से पहले ही पास हो चुका है। यह अब एक कानून है, लेकिन मुद्दा इसे लागू करने का है।' उन्होंने सरकार से सीधे सवाल किया कि जब कानून अस्तित्व में है, तो महिलाओं को इंतजार करने को क्यों कहा जा रहा है।

एनी राजा ने आगे कहा, 'इस देश की महिलाओं को सच बताओ। कानून तो पहले ही पास हो चुका है। आपको इसे लागू करना होगा, और आपने जो शर्तें लगाई हैं, उन्हें हटाना होगा। यह एक सीधी-सी बात है।'

तीन दशकों की लड़ाई का संदर्भ

एनी राजा ने याद दिलाया कि महिला आरक्षण की माँग कोई नई नहीं है — 1996 से यानी पिछले 30 वर्षों से महिलाएँ इस अधिकार के लिए संघर्ष कर रही हैं। 2010 में राज्यसभा में यह विधेयक पारित भी हो चुका था, लेकिन तब लोकसभा में इसे पेश नहीं किया जा सका। अब जब दोनों सदनों ने 2023 में इसे पास कर दिया है, तो क्रियान्वयन में देरी को वे राजनीतिक विफलता मानती हैं।

BJP पर महिला-विरोधी मानसिकता का आरोप

एनी राजा ने आरोप लगाया कि भाजपा इस कानून को लागू इसलिए नहीं करना चाहती क्योंकि वह महिलाओं के समान अधिकारों में विश्वास नहीं रखती। उनके अनुसार सत्तारूढ़ दल नहीं चाहता कि महिलाएँ देश की सबसे बड़ी निर्णय-निर्माण संस्था — संसद — में बैठकर कानून बनाएँ। BJP ने इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी।

डी. राजा ने उठाए संसद स्थगन पर सवाल

सीपीआई के राष्ट्रीय महासचिव डी. राजा ने भी संसद के दोनों सदनों के स्थगन पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, 'सरकार क्या करने जा रही है? किरेन रिजिजू ने कुछ भी साफ नहीं किया है, प्रधानमंत्री ने कुछ भी स्पष्ट नहीं किया है। इतनी सारी अटकलें सार्वजनिक दायरे में हैं और सरकार उन सभी के लिए जिम्मेदार है।' उनका कहना है कि अस्पष्टता से अफवाहों को बल मिलता है।

नेपाल बाढ़ त्रासदी पर सीपीआई की चिंता

इसी अवसर पर एनी राजा और डी. राजा ने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरी संवेदना व्यक्त की, जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लापता हैं। उन्होंने विशेष रूप से उन भारतीय नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताई जो वहाँ फँसे हुए हैं और जिनके बारे में कोई ठोस जानकारी उपलब्ध नहीं है। सीपीआई ने केंद्र सरकार से फँसे भारतीयों की तत्काल मदद की माँग की है।

यह मामला ऐसे समय में उठा है जब संसद का सत्र समाप्त हो चुका है और महिला आरक्षण कानून के क्रियान्वयन की समयसीमा को लेकर राजनीतिक बहस तेज होती जा रही है। अब देखना यह होगा कि सरकार परिसीमन और जनगणना की शर्तों पर कब स्पष्टता लाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन उसमें परिसीमन और जनगणना की शर्तें जोड़ी गई हैं जो क्रियान्वयन को अनिश्चितकाल के लिए टाल देती हैं। यह वही पुरानी रणनीति है — कानून पास करो, लागू करने की ज़िम्मेदारी किसी और शर्त पर डाल दो। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इस बारीकी को चूक जाती है कि 'बिल पास' और 'कानून लागू' दो बिल्कुल अलग राजनीतिक वास्तविकताएँ हैं। जब तक जनगणना और परिसीमन की कोई निश्चित समयसीमा नहीं आती, तब तक यह कानून कागज़ पर ही रहेगा — और इसकी जवाबदेही सत्तारूढ़ दल पर है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 क्या है और यह अब तक लागू क्यों नहीं हुआ?
नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 वह कानून है जो लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करता है। यह संसद के दोनों सदनों में 2023 में पास हो चुका है, लेकिन इसमें परिसीमन और जनगणना पूरी होने की शर्त जोड़ी गई है, जिसकी कोई निश्चित समयसीमा अभी तक सरकार ने नहीं बताई।
एनी राजा ने किरेन रिजिजू पर क्या आरोप लगाए?
सीपीआई नेता एनी राजा ने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू गलत बात कह रहे हैं, क्योंकि महिला आरक्षण का कानून पहले ही पास हो चुका है। उनका आरोप है कि मंत्री महिलाओं को भ्रमित कर रहे हैं और सरकार जानबूझकर इस कानून को लागू नहीं करना चाहती।
महिला आरक्षण की माँग कितनी पुरानी है?
महिला आरक्षण की माँग 1996 से यानी लगभग 30 वर्षों से चली आ रही है। 2010 में राज्यसभा में यह विधेयक पारित हो चुका था, लेकिन तब लोकसभा में पेश नहीं हो सका। 2023 में दोनों सदनों ने इसे पास किया, पर क्रियान्वयन अभी भी लंबित है।
सीपीआई महासचिव डी. राजा ने संसद स्थगन पर क्या कहा?
डी. राजा ने कहा कि संसद के दोनों सदनों के स्थगन के बाद सरकार का इरादा स्पष्ट नहीं है और न ही किरेन रिजिजू और न ही प्रधानमंत्री ने कोई स्पष्टीकरण दिया है। उन्होंने कहा कि इस अस्पष्टता के लिए सरकार जिम्मेदार है।
नेपाल बाढ़ पर सीपीआई ने क्या चिंता जताई?
सीपीआई नेताओं ने नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ पर गहरा दुख व्यक्त किया जिसमें सैकड़ों लोग मारे गए और सैकड़ों लापता हैं। पार्टी ने विशेष रूप से वहाँ फँसे भारतीय नागरिकों की स्थिति पर चिंता जताते हुए केंद्र सरकार से तत्काल सहायता की माँग की।
राष्ट्र प्रेस
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