मालदा: बांग्लादेशी घुसपैठ का प्रमुख केंद्र, दिलीप जायसवाल का बयान
सारांश
Key Takeaways
- मालदा बांग्लादेशी घुसपैठ का केंद्र है।
- दिलीप जायसवाल ने टीएमसी सरकार की आलोचना की।
- सुप्रीम कोर्ट ने भी सरकार को लताड़ा।
- भारत की स्थिति युद्ध के बावजूद सामान्य है।
- अररिया में विकास कार्यों का शुभारंभ किया गया।
अररिया, 3 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार सरकार के मंत्री दिलीप जायसवाल ने पश्चिम बंगाल के मालदा में हुई घटना पर टीएमसी सरकार की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि मालदा हमेशा से बांग्लादेशी घुसपैठ का मुख्य केंद्र माना जाता रहा है।
मालदा में हुई हिंसा को दिलीप जायसवाल ने निंदनीय बताते हुए इसे राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों का केंद्र करार दिया है। उन्होंने कहा कि टीएमसी कार्यकर्ताओं की गुंडागर्दी को सभी ने देखा है।
दिलीप जायसवाल ने आगे कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने भी बंगाल की टीएमसी सरकार की आलोचना की है, पर ममता बनर्जी को इससे कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है।
उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि मालदा को लंबे समय से घुसपैठ का गढ़ माना जाता रहा है। मालदा में जो कुछ हुआ है, वह यह दर्शाता है कि देश विरोधी ताकतें मालदा के माध्यम से पूरे देश में फैलने का प्रयास कर रही हैं।
मध्य पूर्व में जारी युद्ध के संदर्भ में भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए दिलीप जायसवाल ने कहा कि भारत दुनिया का पहला देश है जहाँ युद्ध के बावजूद स्थिति सामान्य बनी हुई है। भारत किसी भी प्रकार की स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है।
दूसरी ओर, मंत्री दिलीप जायसवाल ने अररिया जिले में विकास कार्यों का शुभारंभ किया। उन्होंने बताया कि अररिया के घुरना में पथ प्रमंडल अंतर्गत जयनगर से घुरना सड़क (जो भारत-नेपाल सीमा तक जाती है) का शुभारंभ किया गया है। यह सड़क सामरिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और क्षेत्रीय आवागमन, व्यापार एवं जनसुविधा के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी।
एक सभा में उन्होंने क्षेत्र के समग्र विकास, आधारभूत संरचनाओं के सुदृढ़ीकरण एवं आमजन को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध कराने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को साझा किया। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य है कि राज्य के हर कोने को एक मजबूत सड़क नेटवर्क से जोड़ते हुए विकास की गति को तेज किया जाए।