मालवीय नगर अग्निकांड: दिल्ली पुलिस ने दर्ज की गैर-इरादतन हत्या की FIR, 21 की मौत; 17 विदेशी नागरिक
सारांश
मुख्य बातें
दिल्ली पुलिस ने मालवीय नगर स्थित होटल में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत गैर-इरादतन हत्या और अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। इस हादसे में अब तक 21 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 17 विदेशी नागरिक शामिल हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, होटल मालिक की पहचान लोकेश बजाज के रूप में हुई है और संचालन में तीन साझेदार शामिल हैं।
मुख्य घटनाक्रम
सूत्रों के अनुसार, होटल के संचालन में तीन साझेदार जुड़े हैं और इनके पास दिल्ली में कई अन्य होटल व गेस्ट हाउस भी हैं। दिल्ली पुलिस और अन्य जाँच एजेंसियाँ होटल के स्वामित्व, संचालन और अग्नि-सुरक्षा मानकों से जुड़े पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार मारे गए 17 विदेशी नागरिकों में अधिकांश लाइबेरिया, नाइजीरिया, मोज़ाम्बिक और बांग्लादेश से हैं।
अस्पताल में हालात
मैक्स हेल्थकेयर के ग्रुप मेडिकल डायरेक्टर डॉ. संदीप बुद्धिराजा के अनुसार, उनके पास कुल 39 लोग लाए गए, जिनमें से 18 को मृत अवस्था में लाया गया था। उन्होंने बताया कि शेष मरीज़ों में से 15 आईसीयू में हैं और इनमें से 8 वेंटिलेटर पर हैं। बुद्धिराजा ने कहा, “हमारे पास केवल उन लोगों की जानकारी है जिनसे हम बात कर सके; कई मरीज़ बेहोश थे और वेंटिलेटर पर रखे गए थे।”
एम्स में भर्ती मरीज़
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), दिल्ली द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अस्पताल में 13 मरीज़ लाए गए थे। बताया गया कि तीन मरीज़ ऊँचाई से गिरने के कारण घायल हुए — वे आग से बचने के लिए कथित तौर पर इमारत से कूद गए थे। अस्पताल के अनुसार, तीन शवों को बर्न्स एवं प्लास्टिक सर्जरी विभाग में स्थानांतरित किया गया है।
घायलों में 10 पुलिसकर्मी
ट्रॉमा सेंटर के अनुसार, भर्ती मरीज़ों में 10 बचावकर्मी शामिल हैं और ये सभी दिल्ली पुलिस के जवान हैं — पाँच हेड कांस्टेबल और पाँच कांस्टेबल। बताया गया कि ये जवान ही जलती हुई इमारत में प्रवेश करने वाले पहले लोग थे। दिल्ली पुलिस, दिल्ली अग्निशमन सेवा और बचाव दलों के वरिष्ठ अधिकारी घटनास्थल पर डटे हुए हैं।
क्या होगा आगे
जाँच एजेंसियाँ अब होटल के अग्नि-सुरक्षा प्रमाणपत्र, आपातकालीन निकास और लाइसेंसिंग स्थिति की समीक्षा कर रही हैं। राजधानी में पिछले कुछ वर्षों में यह कई बड़ी अग्नि-त्रासदियों में से एक है, और इसने एक बार फिर वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों के सुरक्षा ऑडिट पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आगे की कानूनी कार्रवाई FIR में नामित व्यक्तियों के बयानों और फॉरेंसिक रिपोर्ट पर निर्भर करेगी।