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ममता की धर्म-राजनीति उन्हीं पर पड़ी भारी, इंडिया ब्लॉक जमीन पर नहीं: किरणमय नंदा

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ममता की धर्म-राजनीति उन्हीं पर पड़ी भारी, इंडिया ब्लॉक जमीन पर नहीं: किरणमय नंदा

सारांश

सपा के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा का दावा — ममता बनर्जी ने बंगाल में जो धर्म-राजनीति शुरू की, वही उनके पतन का कारण बनी। साथ ही इंडिया ब्लॉक को 'कागज पर बना समझौता' बताते हुए सवाल उठाया कि जब सहयोगी दल ही आपस में लड़ रहे हों, तो गठबंधन का मतलब क्या?

मुख्य बातें

समाजवादी पार्टी के नेता किरणमय नंदा ने 15 जून को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर धार्मिक तुष्टिकरण का आरोप लगाया।
नंदा के अनुसार BJP की 208 सीटें जीतना TMC के 15 साल के खराब शासन के खिलाफ जनाक्रोश का परिणाम है।
इंडिया ब्लॉक को 'कागजी गठबंधन' बताया — पश्चिम बंगाल और केरल में घटक दलों के बीच कोई चुनावी तालमेल नहीं था।
नंदा ने कहा कि बंगाल में जाति-राजनीति नहीं चलती, यहाँ मतदान 'लोगों के मूड' से तय होता है।
बार-बार दलबदल को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया, भले ही यह कानूनी हो।

पश्चिम बंगाल में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता किरणमय नंदा ने सोमवार, 15 जून को पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर सीधा हमला बोला। उन्होंने अपनी पार्टी की चुनावी हार के लिए तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार के शासन-रिकॉर्ड और धार्मिक तुष्टिकरण की राजनीति को जिम्मेदार ठहराया। नंदा का यह बयान विपक्षी एकता और बंगाल की बदलती राजनीतिक जमीन पर एक तीखी टिप्पणी के रूप में सामने आया है।

इंडिया ब्लॉक: कागज का गठबंधन?

विपक्षी गठबंधन की स्थिति पर नंदा ने कहा, 'इंडिया ब्लॉक असल में कागज पर बना एक राजनीतिक समझौता है। अगर सहयोगी होने का दावा करने वाली पार्टियाँ ही चुनावों में एक-दूसरे से लड़ रही हैं, तो असल में गठबंधन कहाँ है?' उन्होंने रेखांकित किया कि पश्चिम बंगाल और केरल जैसे प्रमुख राज्यों में इंडिया ब्लॉक के घटक दलों के बीच कोई सीट-बँटवारा या चुनावी तालमेल नहीं था। उनके अनुसार, 'क्या बंगाल में कोई गठबंधन था? नहीं। क्या केरल में कोई गठबंधन था? नहीं।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्षी एकता को लेकर राष्ट्रीय बहस तेज है।

ममता सरकार के खिलाफ जनता का गुस्सा

नंदा ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का 208 सीटें जीतना सीधे तौर पर TMC शासन से जनता की नाराजगी का परिणाम था। उन्होंने कहा, 'पिछली सरकार के 15 साल के कार्यकाल में अच्छा नहीं, बल्कि खराब कामकाज देखने को मिला। BJP का यह प्रदर्शन ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ लोगों के गुस्से का नतीजा था।' गौरतलब है कि यह बंगाल के चुनावी इतिहास में BJP के लिए एक उल्लेखनीय उभार माना जा रहा है।

धर्म की राजनीति: ममता पर उल्टा पड़ा दाँव

नंदा ने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी ने बंगाल में धर्म-आधारित राजनीति की शुरुआत की, जो परंपरागत रूप से इस राज्य की पहचान नहीं रही। उनके शब्दों में, 'बंगाल में पारंपरिक रूप से धर्म पर आधारित राजनीति नहीं होती थी। ममता बनर्जी ही थीं जिन्होंने राज्य में धर्म की राजनीति शुरू की और आखिरकार यह उन्हीं पर भारी पड़ी।' आलोचकों का कहना है कि इस रणनीति ने बंगाल के बहुलवादी राजनीतिक चरित्र को कमजोर किया।

जाति-राजनीति और बंगाल का अनूठा मतदान पैटर्न

इस अनुभवी समाजवादी नेता ने यह भी स्पष्ट किया कि बंगाल में जाति-आधारित राजनीति उतनी प्रभावी नहीं है जितनी अन्य राज्यों में। उन्होंने कहा, 'बंगाल में जाति की राजनीति नहीं होती। यहाँ वोटिंग का पैटर्न ज्यादातर लोगों के मूड से तय होता है। इस मामले में बंगाल ऐतिहासिक रूप से कई अन्य राज्यों से अलग रहा है।' यह टिप्पणी उन विश्लेषकों के लिए महत्वपूर्ण है जो बंगाल के चुनावी समीकरणों को जाति के चश्मे से देखते हैं।

दलबदल और लोकतंत्र पर चिंता

राजनेताओं के बार-बार पार्टी बदलने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नंदा ने चिंता जताई। उनका मानना है कि भले ही दलबदल विरोधी कानून और मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था के तहत ऐसी गतिविधियाँ कानूनी हों, फिर भी 'बार-बार पार्टी बदलना लोकतंत्र के लिए खतरनाक है।' आने वाले समय में बंगाल की राजनीति में विपक्षी पुनर्गठन और TMC की रणनीति पर सबकी नजरें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो 'विपक्षी एकता' का नारा खोखला लगता है। ममता बनर्जी पर धर्म-राजनीति का आरोप भी उल्लेखनीय है — एक ऐसी नेता जो खुद को धर्मनिरपेक्षता की प्रतीक बताती हैं, उन पर उनके ही विपक्षी सहयोगी यह इल्जाम लगा रहे हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस आंतरिक विपक्षी टकराव को अक्सर नजरअंदाज करती है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

किरणमय नंदा ने इंडिया ब्लॉक को 'कागजी गठबंधन' क्यों कहा?
नंदा ने कहा कि पश्चिम बंगाल और केरल जैसे राज्यों में इंडिया ब्लॉक के घटक दल आपस में ही चुनाव लड़े, कोई सीट-बँटवारा नहीं हुआ। उनके अनुसार जमीनी स्तर पर ठोस तालमेल के बिना गठबंधन केवल कागज पर है।
ममता बनर्जी की धर्म-राजनीति उन्हीं पर कैसे भारी पड़ी?
नंदा के अनुसार बंगाल में परंपरागत रूप से धर्म-आधारित राजनीति नहीं होती थी, लेकिन ममता बनर्जी ने इसे शुरू किया। आलोचकों का कहना है कि इस रणनीति ने उनके मतदाता आधार को विभाजित किया और BJP को लाभ पहुँचाया।
BJP ने पश्चिम बंगाल में कितनी सीटें जीतीं और इसका कारण क्या बताया गया?
BJP ने पश्चिम बंगाल में 208 सीटें जीतीं। नंदा ने इसे TMC के 15 साल के शासन के खिलाफ जनाक्रोश का परिणाम बताया, जिसमें खराब प्रशासन को मुख्य कारण माना।
क्या पश्चिम बंगाल में जाति-राजनीति प्रभावी है?
किरणमय नंदा ने स्पष्ट किया कि बंगाल में जाति की राजनीति नहीं चलती। उनके अनुसार यहाँ मतदान का पैटर्न 'लोगों के मूड' से तय होता है, जो इसे कई अन्य राज्यों से अलग बनाता है।
नंदा ने दलबदल पर क्या कहा?
नंदा ने बार-बार पार्टी बदलने की प्रवृत्ति को लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने माना कि दलबदल विरोधी कानून और मौजूदा व्यवस्था के तहत यह कानूनी है, लेकिन लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए यह नुकसानदेह है।
राष्ट्र प्रेस
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