मनिंदरजीत सिंह बिट्टा का कांग्रेस पर पलटवार: 'मोदी के इस्तीफे की मांग देशहित के खिलाफ'
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडियन एंटी-टेररिस्ट फ्रंट (AIATF) के चेयरमैन मनिंदरजीत सिंह बिट्टा ने 11 अगस्त 2026 को बागपत में कांग्रेस की ओर से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग को 'राजनीतिक स्वार्थ' करार देते हुए कड़ी आलोचना की। बिट्टा ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और देशहित को दलगत राजनीति से ऊपर रखा जाना चाहिए।
मुख्य बयान और तर्क
बिट्टा ने कहा, 'जिस प्रधानमंत्री ने आर्टिकल 370 हटाया, उनके इस्तीफे की मांग करना उचित नहीं है।' उन्होंने तर्क दिया कि आर्टिकल 370 के दौर में जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और हिंसा की घटनाएं लगातार होती थीं, जिनमें सैनिकों के साथ-साथ आम नागरिकों को भी जान गंवानी पड़ती थी। उनके अनुसार, यह निर्णय देश को मजबूत करने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था।
राम मंदिर और आतंकवाद-विरोधी कार्रवाई
बिट्टा ने राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह प्रक्रिया बिना किसी हिंसा, दंगे या गोलीबारी के संपन्न हुई। उन्होंने पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान में कथित तौर पर की गई सैन्य कार्रवाई का भी उल्लेख किया और कहा कि आतंकवादी कैंपों को नष्ट किया गया। उनके अनुसार, यह 'आज के बदले हुए भारत' की पहचान है, जो अब आतंकवाद का मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है।
दिल्ली बम साजिश और सुरक्षा एजेंसियों की सराहना
बिट्टा ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर संभावित बम विस्फोट की साजिश का जिक्र करते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की सतर्कता के कारण एक बड़ी त्रासदी टल गई। उन्होंने कहा कि यदि यह घटना होती, तो राजनीतिक दल केंद्र सरकार को ही कठघरे में खड़ा करते।
राष्ट्रीय एकता और अलगाववाद पर कड़ा रुख
बिट्टा ने पंजाब में खालिस्तान की मांग का संदर्भ देते हुए स्पष्ट किया कि देश की एकता और अखंडता से किसी भी कीमत पर समझौता नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से माँगें रखना और प्रदर्शन करना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन राष्ट्र को बाँटने की किसी भी कोशिश को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
राजनीतिक दलों से तुलनात्मक आह्वान
खुद को कांग्रेस का पुराना समर्थक बताते हुए बिट्टा ने कहा कि उनकी प्रशंसा किसी दल विशेष के लिए नहीं, बल्कि उन नीतियों के लिए है जिन्हें वह देशहित में मानते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से आग्रह किया कि वे दस साल पहले के भारत और आज के भारत की तुलना करें और सुरक्षा परिदृश्य में आए बदलाव को स्वीकार करें। बिट्टा ने कहा कि उन्होंने स्वयं आतंकवाद का दौर झेला है और कई जानलेवा हमलों से बचे हैं — इसलिए राष्ट्रीय सुरक्षा उनके लिए केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि व्यक्तिगत अनुभव है।