मणिशंकर अय्यर के भारत-पाक बयान पर मंत्री संजय निषाद का पलटवार, बोले- राष्ट्रहित सर्वोपरि
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री संजय निषाद ने 5 अक्टूबर 2026 को लखनऊ में कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर के भारत-पाकिस्तान संबंधी बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि किसी भी नेता के बयान राष्ट्रहित में होने चाहिए। इसी दौरान उन्होंने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी, समाजवादी पार्टी (सपा) प्रमुख अखिलेश यादव और सपा-कांग्रेस गठबंधन पर भी तीखा निशाना साधा।
मणिशंकर अय्यर के बयान पर प्रतिक्रिया
मंत्री संजय निषाद ने मणिशंकर अय्यर के भारत-पाकिस्तान संबंधी बयान को लेकर कहा, 'बयान राष्ट्रहित में होना चाहिए। राष्ट्र सर्वोपरि होता है और राष्ट्र के प्रति सबको समर्पित भी होना चाहिए। राष्ट्र के नाम पर सबको कर्तव्यनिष्ठ भी होना चाहिए।' निषाद ने स्पष्ट किया कि किसी भी राजनेता की जिम्मेदारी है कि वह अपने बयानों में देशहित को प्राथमिकता दे।
ओवैसी और मुस्लिम आरक्षण पर सवाल
असदुद्दीन ओवैसी की विपक्ष संबंधी टिप्पणी पर संजय निषाद ने कहा कि ये नेता मुसलमानों के तथाकथित ठेकेदार बने हुए हैं, जबकि इतने वर्षों में उन्हें उचित हिस्सेदारी नहीं दिला सके। उन्होंने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए कहा कि 1930 में गरीब मुसलमानों को आरक्षण मिला था, और 1931 में निषाद समुदाय के लोगों ने इसमें अगुवाई की थी। उनके अनुसार 1950 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के सत्ता में आने के बाद मुसलमानों का आरक्षण समाप्त कर दिया गया। निषाद ने ओवैसी से प्रश्न किया कि जब कांग्रेस ने मुसलमानों का आरक्षण छीना, तो उसका साथ क्यों दिया जा रहा है।
अखिलेश यादव और वोट की राजनीति पर निशाना
अखिलेश यादव को लेकर ओवैसी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय निषाद ने कहा कि मुसलमान भी इस देश का नागरिक है और उसे वोट के लिए बाँटने की कोशिश करने वाले दलों को एक भी सीट नहीं मिलेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की राजनीति मुसलमानों को लोकतंत्र की मुख्यधारा से दूर करती है, न कि उनके नेतृत्व को आगे लाती है।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर तंज
उत्तर प्रदेश में सीट बँटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच चल रही खींचतान पर निषाद ने कटाक्ष किया कि ये दोनों दल मूलतः एक-दूसरे की विचारधारा के विरोध में खड़े हुए हैं, इसलिए उनके गठबंधन में आंतरिक टकराव स्वाभाविक है।
निषाद समुदाय और गोरखपुर कार्यक्रम
संजय निषाद ने चेतावनी दी कि यदि गोरखपुर के कार्यक्रम में अखिलेश यादव उनकी बात नहीं मानते, तो उन्होंने धरने पर बैठने की तैयारी कर ली थी। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि यदि किसी भी जिले में निषाद समुदाय के पूजनीय व्यक्तियों के विरुद्ध अपमानजनक घटना होती है, तो उसकी जिम्मेदारी संबंधित पार्टी के अध्यक्ष की होगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में विभिन्न सामाजिक समूहों के बीच राजनीतिक गोलबंदी तेज हो रही है।