26 जुलाई 2026
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'मन की बात' के 136वें एपिसोड में PM मोदी ने कश्मीर की 'वगू' चटाई का जिक्र किया, गुलाम हुसैन और तंजीला की तारीफ

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'मन की बात' के 136वें एपिसोड में PM मोदी ने कश्मीर की 'वगू' चटाई का जिक्र किया, गुलाम हुसैन और तंजीला की तारीफ

सारांश

PM मोदी ने 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में कश्मीर की लुप्त होती 'वगू' चटाई को राष्ट्रीय मंच दिया — और श्रीनगर के साधारण कारीगर गुलाम हुसैन व उनकी बेटी तंजीला की उस जिद को सलाम किया जिसने एक पुरानी परंपरा को नई साँस दी।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में कश्मीर की 'वगू' चटाई का विशेष उल्लेख किया।
वगू चटाई सरकंडे, धान के पुआल और घास से बनती है; दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब 4 दिन लगते हैं।
श्रीनगर के गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला ने इस लुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करने का संकल्प लिया।
यह चटाई पूरी तरह इकोफ्रेंडली है — गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट देती है।
PM मोदी ने वगू को 'लोकल फॉर वोकल' अभियान से जोड़ते हुए नागरिकों से इसे अपनाने की अपील की।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 26 जुलाई 2026 को अपने रेडियो कार्यक्रम 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में कश्मीर की पारंपरिक हस्तशिल्प 'वगू' चटाई का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने इस लुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करने के लिए श्रीनगर के कारीगर गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला की सराहना की।

वगू चटाई की विशेषताएँ और निर्माण प्रक्रिया

प्रधानमंत्री ने बताया कि वगू चटाई सरकंडे, धान के पुआल और घास से तैयार की जाती है। कश्मीर के दलदली इलाकों से घास और सरकंडे की कटाई की जाती है, जिसे धूप में सुखाने के बाद छाँटा जाता है और फिर हाथों से बुनाई का काम शुरू होता है। उन्होंने बताया कि दो कारीगरों को एक चटाई बनाने में करीब 4 दिन लगते हैं।

इस चटाई की एक विशेष खूबी यह है कि यह पूरी तरह इकोफ्रेंडली है — गर्मियों में ठंडक और सर्दियों में गर्माहट देने में सक्षम। मोदी ने इसे 'अनूठी' बताते हुए कहा कि यह परंपरा बरसों पुरानी है।

गुलाम हुसैन और तंजीला का संकल्प

प्रधानमंत्री ने कहा कि पहले वगू चटाई हर घर में दिखती थी, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में इसका उपयोग घटने लगा था। ऐसे में गुलाम हुसैन और उनकी बेटी तंजीला ने इस शिल्प को नया जीवन देने का संकल्प लिया। मोदी ने कहा कि गुलाम हुसैन एक साधारण परिवार से आते हैं और उन्हें इस काम में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वगू संरक्षण का उनका इरादा अडिग रहा।

उनके प्रयासों से धीरे-धीरे स्थानीय स्तर पर सरकारी सहयोग भी मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़ते चले गए।

'लोकल फॉर वोकल' से जुड़ाव

प्रधानमंत्री ने वगू चटाई को 'लोकल फॉर वोकल' अभियान से जोड़ते हुए कहा कि आज यह शिल्प देश के अन्य हिस्सों में भी पहुँच रहा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि वे कश्मीर के वगू को अपने घर का हिस्सा बनाने पर विचार करें।

गौरतलब है कि 'मन की बात' कार्यक्रम के माध्यम से प्रधानमंत्री मोदी अक्सर स्थानीय हस्तशिल्प और उद्यमियों को राष्ट्रीय मंच पर उजागर करते हैं। वगू का यह उल्लेख कश्मीर की सांस्कृतिक विरासत को मुख्यधारा में लाने की उस व्यापक कोशिश का हिस्सा है।

आम जनता पर असर

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस उल्लेख से वगू चटाई की माँग में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है — जैसा कि पहले भी 'मन की बात' में चर्चित उत्पादों के साथ देखा गया है। इससे श्रीनगर और कश्मीर के दलदली इलाकों के कारीगरों को सीधा आर्थिक लाभ मिलने की उम्मीद है।

यह ऐसे समय में आया है जब सरकार कश्मीर में पारंपरिक शिल्पों के संरक्षण और स्थानीय रोज़गार को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दे रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इस चर्चा के बाद कारीगरों को टिकाऊ बाज़ार और उचित मूल्य मिलेगा, या यह महज एक सप्ताह की सुर्खी बनकर रह जाएगी। कश्मीर के पारंपरिक शिल्पों — पश्मीना से लेकर कनी शॉल तक — की कहानी बताती है कि मीडिया की रोशनी और नीतिगत समर्थन के बिना पुनरुद्धार अधूरा रहता है। गुलाम हुसैन और तंजीला की मेहनत सराहनीय है, पर उन्हें चाहिए स्थायी बाज़ार संपर्क, न सिर्फ राष्ट्रीय मंच पर एक जिक्र।
RashtraPress
26 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कश्मीर की 'वगू' चटाई क्या है?
वगू कश्मीर की एक पारंपरिक हस्तनिर्मित चटाई है जो सरकंडे, धान के पुआल और दलदली घास से बनाई जाती है। यह पूरी तरह इकोफ्रेंडली है और गर्मियों में ठंडक व सर्दियों में गर्माहट देने की अपनी विशेषता के लिए जानी जाती है।
PM मोदी ने 'मन की बात' में वगू का जिक्र कब और क्यों किया?
PM मोदी ने 26 जुलाई 2026 को 'मन की बात' के 136वें एपिसोड में वगू चटाई का उल्लेख किया। उन्होंने इसे 'लोकल फॉर वोकल' अभियान से जोड़ते हुए इस लुप्त होती परंपरा को पुनर्जीवित करने वाले कारीगरों की सराहना की।
गुलाम हुसैन और तंजीला कौन हैं?
गुलाम हुसैन श्रीनगर के एक साधारण परिवार से आने वाले कारीगर हैं, जिन्होंने अपनी बेटी तंजीला के साथ मिलकर वगू शिल्प को नया जीवन देने का संकल्प लिया। कई चुनौतियों के बावजूद उनके प्रयासों से स्थानीय सरकारी सहयोग भी मिला और बड़ी संख्या में लोग इस अभियान से जुड़े।
वगू चटाई बनाने में कितना समय लगता है?
दो कारीगरों को मिलकर एक वगू चटाई बनाने में करीब 4 दिन लगते हैं। इसमें घास और सरकंडे की कटाई, धूप में सुखाना, छँटाई और फिर हाथ से बुनाई शामिल है।
वगू चटाई कहाँ से खरीद सकते हैं?
प्रधानमंत्री के उल्लेख के अनुसार वगू चटाई अब देश के अन्य हिस्सों में भी पहुँच रही है। इच्छुक खरीदार कश्मीर के स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों या सरकारी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म के माध्यम से इसे प्राप्त कर सकते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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