मनोज जरांगे के अनशन का चौथा दिन: ब्लड शुगर 66 से 80 पहुँचने पर उठाए सवाल, मांगी पारदर्शी जांच
सारांश
मुख्य बातें
मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे का जालना में आमरण अनशन मंगलवार, 1 सितंबर को चौथे दिन भी जारी रहा। लगातार अनशन के बीच उनकी नियमित मेडिकल जांच हो रही है, लेकिन ब्लड शुगर की बदलती रीडिंग ने विवाद खड़ा कर दिया — जरांगे ने स्वयं इस पर सवाल उठाते हुए पारदर्शी जांच की माँग की।
ब्लड शुगर रीडिंग में बदलाव का पूरा क्रम
जरांगे के अनुसार, अनशन शुरू होने से पहले उनका ब्लड शुगर लेवल 94 था। अनशन के दूसरे दिन यह घटकर 66 पर आ गया। इसके बाद की जांचों में यह आँकड़ा पहले 72 और फिर 80 दर्ज किया गया। उपवास की स्थिति में शुगर लेवल के इस तरह ऊपर जाने पर जरांगे ने सीधे सवाल किया — '66 की 72 और फिर 80 कैसे हुई?'
जरांगे की माँग: आंदोलन स्थल पर आधुनिक मशीनें
जरांगे ने मेडिकल टीम से स्पष्टीकरण माँगते हुए कहा कि इस मामले में किसी भी प्रकार की शंका या भ्रम की गुंजाइश नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने माँग की कि आधुनिक मेडिकल मशीनें सीधे आंदोलन स्थल के मंडप में लाई जाएँ और वहीं जांच की जाए। उन्होंने कहा कि यदि डॉक्टरों को भी कोई संदेह हो तो तत्काल जांच कर पूरे मामले का 'सोक्षमोक्ष' किया जाए।
सरकारी षड्यंत्र का आरोप, डॉक्टरों पर सीधा संदेह नहीं
जरांगे ने यह भी पूछा कि कहीं ब्लड शुगर रीडिंग में इस बदलाव के पीछे सरकार का कोई षड्यंत्र तो नहीं है। हालाँकि उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्हें मेडिकल टीम के डॉक्टरों पर सीधे तौर पर कोई संदेह नहीं है। उनका कहना था कि मौजूदा परिस्थितियों को देखते हुए हर पहलू का पारदर्शी तरीके से स्पष्ट होना ज़रूरी है।
डॉक्टरों का स्पष्टीकरण
जरांगे की शंका के बाद मेडिकल टीम ने इस पर सफाई दी। डॉक्टरों के अनुसार, अलग-अलग समय पर ब्लड शुगर की जांच में रीडिंग का कुछ अंतर आना एक सामान्य चिकित्सकीय प्रक्रिया है। थोड़े समय के अंतराल में शुगर लेवल का ऊपर-नीचे होना अपने आप में किसी असामान्य स्थिति का संकेत नहीं होता। मेडिकल टीम ने जरांगे के साथ इस विषय पर चर्चा कर उनकी शंकाओं का समाधान भी किया।
आंदोलन की स्थिति और आगे की राह
जरांगे ने स्पष्ट किया कि उनका आमरण अनशन मराठा समाज की आरक्षण संबंधी माँगों को लेकर जारी है और वे अपनी माँगों से पीछे हटने वाले नहीं हैं। यह ऐसे समय में आया है जब मराठा आरक्षण का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में केंद्रीय स्थान बनाए हुए है। गौरतलब है कि जरांगे इससे पहले भी कई बार आमरण अनशन कर चुके हैं और सरकार के साथ बातचीत के बाद उन्हें स्थगित किया गया है। अब यह देखना होगा कि सरकार इस बार उनकी माँगों पर क्या रुख अपनाती है।