जेपीएससी-जेएसएससी आंदोलन: देवेंद्र का BP 84/39, हबीबा की CM सोरेन से अपील — 16वें दिन भी अनशन जारी
सारांश
मुख्य बातें
रांची में जेपीएससी-जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरुद्ध चल रहे आंदोलन के बीच दो प्रमुख अनशनकारियों की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई है। 17 अगस्त 2026 को भूख हड़ताल के 16वें दिन देवेंद्र नाथ महतो का ब्लड प्रेशर 84/39 दर्ज किया गया, जबकि 14वें दिन से अनशन पर बैठी हबीबा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से संवाद की अपील की। दोनों ने स्पष्ट किया कि न्याय मिलने तक वे अपना अनशन नहीं तोड़ेंगे।
अनशनकारियों की बिगड़ती सेहत
सदर अस्पताल, रांची में भर्ती देवेंद्र नाथ महतो ने बताया कि पिछले दो दिनों से उनका ब्लड प्रेशर लगातार गिर रहा है। उन्हें सीने में दर्द, चक्कर और सांस लेने में कठिनाई हो रही है। जांच के दौरान शरीर में कीटोन की मात्रा भी पाई गई है, जो लंबे समय तक उपवास रखने पर उत्पन्न होती है। अस्पताल में एक्स-रे, रक्त जांच और शुगर जांच सहित कई चिकित्सकीय परीक्षण लगातार किए जा रहे हैं।
महतो ने कहा कि उनकी यह लड़ाई केवल आज की नहीं है — वे चाहते हैं कि झारखंड की शिक्षा और भर्ती व्यवस्था में ऐसे ठोस सुधार हों जिससे आने वाली पीढ़ी को अपने अधिकारों के लिए इस तरह संघर्ष न करना पड़े।
हबीबा की मुख्यमंत्री से भावुक अपील
भूख हड़ताल के 14वें दिन अनशन पर बैठी हबीबा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को सीधे संबोधित करते हुए कहा, 'मुख्यमंत्री, मैं आपसे टकराव नहीं, संवाद चाहती हूं।' उन्होंने कहा कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य की उम्मीद ने उन्हें अब तक मजबूती दी है। हबीबा ने सरकार से अपील की कि छात्रों की मांगों पर संवेदनशीलता के साथ विचार किया जाए और बातचीत के ज़रिए इस गतिरोध का समाधान निकाला जाए।
उन्होंने कहा, 'मैं अपने लिए नहीं, झारखंड के लाखों बेटे-बेटियों के भविष्य के लिए लड़ रही हूं।'
आंदोलन की मुख्य मांगें
आंदोलनकारी अभ्यर्थी वर्ष 2024 में हुई जेएसएससी-सीजीएल परीक्षा रद्द करने और जेपीएससी-जेएसएससी की भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की सीबीआई जांच की मांग कर रहे हैं। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के नेतृत्व में चल रहे इस आंदोलन को 24 दिन पूरे हो चुके हैं।
सरकार और छात्रों के बीच स्थिति
पूर्व में हुई वार्ता में परीक्षा सुधार से जुड़ी कई मांगों पर सहमति बनी थी। राज्य सरकार ने 14वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा और बैकलॉग सिविल सेवा परीक्षा रद्द करने की घोषणा भी की है। हालांकि, सीजीएल परीक्षा रद्द करने और सीबीआई जांच की मांग पर अब तक कोई सहमति नहीं बन सकी है।
यह ऐसे समय में आया है जब 17 अगस्त की देर शाम सरकार और छात्रों के बीच वार्ता प्रस्तावित है। गतिरोध के बीच दोनों पक्षों की बैठक पर सभी की नज़रें टिकी हैं।
आगे क्या
प्रस्तावित वार्ता का नतीजा ही तय करेगा कि यह आंदोलन किस दिशा में जाता है। चिकित्सकों के अनुसार दोनों अनशनकारियों की स्थिति नाज़ुक बनी हुई है और यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो स्वास्थ्य जोखिम और बढ़ सकता है। झारखंड के हज़ारों युवा अभ्यर्थी इस वार्ता के परिणाम पर नज़र रखे हुए हैं।