मुंबई JJ ब्लड बैंक घोटाला: डॉ. पगारे और भिसे बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा
सारांश
मुख्य बातें
महाराष्ट्र विधान परिषद में 29 जून 2026 को सोमवार के दिन सर जेजे मेट्रोपॉलिटन सरकारी ब्लड बैंक, मुंबई में कथित खून की चोरी, वित्तीय अनियमितता और प्रशासनिक लापरवाही का मामला गूँजा। सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डिकर ने सदन में घोषणा की कि प्रारंभिक जाँच में ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. हितेश पगारे और मेडिकल सोशल ऑफिसर डॉ. भिसे को दोषी पाया गया है और उनकी सेवाएँ तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं।
मुख्य घटनाक्रम
भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एमएलसी चित्रा वाघ ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से यह मुद्दा उठाया। उनके अनुसार, चिंचपोकली में आयोजित एक रक्तदान शिविर में एकत्र किए गए 128 रक्त बैग में से 55 बैग बिना किसी पूर्व अनुमति या आधिकारिक रिकॉर्ड के बदलापुर स्थित माया ब्लड बैंक को भेज दिए गए।
वाघ ने आरोप लगाया कि एक निजी भंडारण केंद्र को ₹665 प्रति बैग की दर से रक्त की अनधिकृत आपूर्ति की गई, जबकि उस केंद्र ने प्रति बैग ₹760 से ₹800 तक वसूले — यानी प्रति बैग ₹95 से ₹135 तक का मुनाफा। उन्होंने इसे सरकारी खजाने की सीधी लूट बताया।
वाघ ने यह भी दावा किया कि उनके पास साक्ष्य हैं कि डॉ. पगारे स्वयं बदलापुर के निजी माया ब्लड बैंक के मालिक हैं, और जेजे ब्लड बैंक के कर्मचारी, सामग्री व वाहन उस निजी इकाई के लिए उपयोग किए जा रहे थे। साथ ही, जबरन छुट्टी पर रहते हुए भी डॉ. पगारे ने कथित तौर पर एक निजी कंपनी से अनाधिकृत रूप से फ्रीजर खरीदने की माँग की।
अनियमितताओं की पूरी सूची
वाघ ने सदन के समक्ष कई और गंभीर खामियाँ उजागर कीं:
डोनर कार्ड पर बारकोड की अनुपस्थिति, ज़रूरतमंद रोगियों से रक्त के बदले अवैध रूप से पैसे की माँग, थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को रक्त आपूर्ति में व्यवधान, पिछले 10 वर्षों से ब्लड बैंक का कोई ऑडिट नहीं, और राज्य रक्त आधान परिषद (SBTC) में पूर्णकालिक अधिकारियों की अनुपस्थिति — ये सभी मुद्दे उन्होंने सदन के सामने रखे।
सरकार की प्रतिक्रिया
मंत्री बोर्डिकर ने सदन को आश्वस्त किया कि दोनों दोषी अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामले दर्ज किए जाएँगे और ब्लड बैंक के लिए एक सहायक निदेशक का पूर्णकालिक पद सृजित किया जाएगा।
पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के दिशानिर्देशों के आधार पर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी, तथा प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी।
मंत्री ने यह भी बताया कि राज्य के सभी ब्लड बैंकों की निगरानी के लिए एक समन्वय तंत्र स्थापित होगा, नियमों का उल्लंघन करने वाले ब्लड बैंकों के लाइसेंस रद्द किए जाएँगे, और सभी ब्लड बैंकों के तृतीय-पक्ष ऑडिट पर भी विचार किया जा रहा है।
विस्तृत जाँच की माँग
BJP एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में 417 ब्लड बैंक कार्यरत हैं और राज्य पहले से आवश्यकता से अधिक रक्त एकत्र कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में 150 अतिरिक्त ब्लड बैंकों को अनुमति देने की चर्चा क्यों हो रही है। मंत्री बोर्डिकर ने स्पष्ट किया कि सरकार के समक्ष फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
सदन के अन्य सदस्यों ने आशंका जताई कि ये गड़बड़ियाँ केवल जेजे अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकतीं और राज्यव्यापी जाँच की माँग की। मंत्री ने आश्वासन दिया कि FIR दर्ज होने के बाद जाँच में यदि और गंभीर खुलासे सामने आते हैं, तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
आगे क्या होगा
यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब महाराष्ट्र में सार्वजनिक स्वास्थ्य ढाँचे की जवाबदेही पर पहले से सवाल उठ रहे हैं। QR कोड ट्रैकिंग, तृतीय-पक्ष ऑडिट और नए पूर्णकालिक पद जैसे सुधारों की घोषणा तो हुई है, लेकिन इनके क्रियान्वयन की समयसीमा और निगरानी तंत्र अभी स्पष्ट नहीं है। आपराधिक मामले दर्ज होने के बाद जाँच की दिशा तय होगी।