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जेजे ब्लड बैंक घोटाला: डॉ. पगारे और भिसे बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा

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जेजे ब्लड बैंक घोटाला: डॉ. पगारे और भिसे बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा

सारांश

मुंबई के जेजे सरकारी ब्लड बैंक से 55 रक्त बैग बिना अनुमति बदलापुर भेजे गए — और ब्लड बैंक प्रमुख खुद उस निजी बैंक के कथित मालिक हैं। विधान परिषद में जवाब-तलब के बाद सरकार ने दोनों दोषियों को बर्खास्त कर आपराधिक मामले का रास्ता खोल दिया है।

मुख्य बातें

हितेश पगारे (ब्लड बैंक प्रमुख) और डॉ.
भिसे (मेडिकल सोशल ऑफिसर) को जांच में दोषी पाया गया; दोनों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त।
चिंचपोकली रक्तदान शिविर के 128 बैगों में से 55 बैग बिना अनुमति माया ब्लड बैंक, बदलापुर भेजे गए।
निजी केंद्र को ₹665 प्रति बैग पर रक्त दिया गया; निजी संस्थाओं को ₹760–₹800 प्रति बैग का मुनाफा।
प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग और SOP लागू की जाएगी; तृतीय-पक्ष ऑडिट पर विचार।
राज्य में 417 ब्लड बैंक कार्यरत; 150 नए ब्लड बैंकों को मंजूरी का कोई प्रस्ताव नहीं — मंत्री बोर्डिकर।
सदस्यों ने राज्यव्यापी जांच की मांग की; सरकार ने एफआईआर के बाद और कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुंबई के सर जेजे मेट्रोपॉलिटन सरकारी ब्लड बैंक में खून की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं की जांच में ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. हितेश पगारे और मेडिकल सोशल ऑफिसर डॉ. भिसे को दोषी पाया गया है। सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डिकर ने सोमवार, 29 जून को महाराष्ट्र विधान परिषद में घोषणा की कि दोनों अधिकारियों की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं और उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।

मुख्य घटनाक्रम

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की विधान परिषद सदस्य चित्रा वाघ ने 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से यह मामला सदन के सामने रखा। उनके अनुसार, चिंचपोकली में आयोजित एक रक्तदान शिविर में एकत्र किए गए 128 रक्त बैगों में से 55 बैग बिना किसी पूर्व अनुमति या आधिकारिक अभिलेख के बदलापुर स्थित माया ब्लड बैंक को भेज दिए गए।

वाघ ने आरोप लगाया कि एक निजी भंडारण केंद्र को ₹665 प्रति बैग की दर से रक्त की आपूर्ति की गई, जिससे निजी संस्थाओं को ₹760 से ₹800 प्रति बैग तक का मुनाफा हुआ। उन्होंने दावा किया कि उनके पास साक्ष्य हैं कि डॉ. पगारे स्वयं बदलापुर स्थित माया ब्लड बैंक के मालिक हैं, जहाँ जेजे के कर्मचारियों, सामग्री और वाहनों का उपयोग किया जा रहा था।

अन्य अनियमितताएं

वाघ ने कई और गंभीर खामियों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इनमें डोनर कार्ड पर बारकोड की अनुपस्थिति, जरूरतमंद मरीजों से रक्त के बदले पैसे वसूलना, थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को रक्त आपूर्ति में व्यवधान, पिछले 10 वर्षों से ब्लड बैंक के ऑडिट का न होना और राज्य रक्त आधान परिषद (SBTC) में पूर्णकालिक अधिकारियों की कमी शामिल है। यह भी आरोप लगाया गया कि जबरन छुट्टी पर रहते हुए भी डॉ. पगारे ने अनधिकृत रूप से एक निजी कंपनी से फ्रीजर खरीदने की मांग की।

सरकार की प्रतिक्रिया

मंत्री बोर्डिकर ने सदन को बताया कि दोनों दोषी अधिकारियों की बर्खास्तगी के साथ-साथ ब्लड बैंक के लिए सहायक निदेशक का एक पूर्णकालिक पद भी सृजित किया जाएगा। रक्त बैगों की पारदर्शी निगरानी के लिए राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) और खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के दिशानिर्देशों पर आधारित एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी और प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्यभर के सभी ब्लड बैंकों की निगरानी के लिए एक समन्वय तंत्र स्थापित होगा, नियम उल्लंघन करने वाले ब्लड बैंकों का लाइसेंस रद्द किया जाएगा और तृतीय-पक्ष ऑडिट पर भी विचार किया जा रहा है।

राज्यव्यापी जांच की मांग

BJP के विधान परिषद सदस्य श्रीकांत भारतीय ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में 417 ब्लड बैंक कार्यरत हैं और राज्य आवश्यकता से अधिक रक्त एकत्र कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में अतिरिक्त 150 ब्लड बैंकों को अनुमति देने की चर्चा क्यों हो रही है। मंत्री बोर्डिकर ने स्पष्ट किया कि सरकार के समक्ष फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

सदन के अन्य सदस्यों ने चेताया कि ये अनियमितताएं केवल जेजे अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकतीं और राज्यव्यापी जांच की मांग की। मंत्री ने आश्वासन दिया कि एफआईआर दर्ज होने के बाद जांच में यदि और गंभीर खुलासे होते हैं, तो और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

क्या होगा आगे

गौरतलब है कि सरकारी ब्लड बैंकों में इस प्रकार की अनियमितताएं सीधे तौर पर उन मरीजों को प्रभावित करती हैं जो थैलेसीमिया, सिकल सेल और अन्य गंभीर बीमारियों के कारण नियमित रक्त आधान पर निर्भर हैं। QR कोड ट्रैकिंग और तृतीय-पक्ष ऑडिट जैसे सुधारात्मक कदम यदि समयबद्ध तरीके से लागू होते हैं, तो भविष्य में ऐसी घटनाओं पर अंकुश लग सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

व्यक्तिगत नहीं। QR ट्रैकिंग और तृतीय-पक्ष ऑडिट की घोषणाएं स्वागतयोग्य हैं, लेकिन असली कसौटी यह होगी कि ये कब तक और कितनी पारदर्शिता से लागू होती हैं — क्योंकि थैलेसीमिया और सिकल सेल जैसे मरीजों के लिए रक्त की उपलब्धता जीवन और मृत्यु का प्रश्न है।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

जेजे ब्लड बैंक घोटाला क्या है?
मुंबई के सर जेजे मेट्रोपॉलिटन सरकारी ब्लड बैंक में खून की चोरी और वित्तीय अनियमितताओं का मामला है, जिसमें 128 रक्त बैगों में से 55 बैग बिना अनुमति बदलापुर के एक निजी ब्लड बैंक को भेजे गए। जांच में ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. हितेश पगारे और मेडिकल सोशल ऑफिसर डॉ. भिसे को दोषी पाया गया है।
डॉ. हितेश पगारे पर क्या कार्रवाई हुई?
सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डिकर ने विधान परिषद में घोषणा की कि डॉ. पगारे और डॉ. भिसे की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं और उनके विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज कराया जाएगा।
सरकार ने भविष्य में ऐसी घटनाएं रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं?
सरकार ने प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली, NACO और FDA दिशानिर्देशों पर आधारित SOP, राज्यव्यापी समन्वय तंत्र और तृतीय-पक्ष ऑडिट की घोषणा की है। नियम उल्लंघन करने वाले ब्लड बैंकों का लाइसेंस रद्द किया जाएगा।
थैलेसीमिया और सिकल सेल मरीजों पर इस घोटाले का क्या असर पड़ा?
BJP एमएलसी चित्रा वाघ ने आरोप लगाया कि इन अनियमितताओं के कारण थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को रक्त आपूर्ति में व्यवधान आया। ये मरीज नियमित रक्त आधान पर निर्भर होते हैं, इसलिए आपूर्ति में रुकावट उनके लिए जीवन-घातक स्थिति बन सकती है।
क्या महाराष्ट्र के अन्य ब्लड बैंकों की भी जांच होगी?
विधान परिषद के कई सदस्यों ने राज्यव्यापी जांच की मांग की, यह कहते हुए कि ऐसी अनियमितताएं केवल जेजे अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकतीं। मंत्री बोर्डिकर ने आश्वासन दिया कि सभी ब्लड बैंकों का नियमित ऑडिट होगा और आवश्यकतानुसार विशेष निरीक्षण किया जाएगा।
राष्ट्र प्रेस
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