30 जून 2026
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JJ ब्लड बैंक घोटाला: डॉ. पगारे और भिसे बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा

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JJ ब्लड बैंक घोटाला: डॉ. पगारे और भिसे बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा

सारांश

मुंबई के जेजे सरकारी ब्लड बैंक में रक्त चोरी और वित्तीय गड़बड़ी का मामला विधान परिषद पहुँचा — नतीजा: दो अधिकारी बर्खास्त, आपराधिक मामला दर्ज होगा, और QR ट्रैकिंग सहित राज्यव्यापी ऑडिट का वादा। सवाल यह है कि 10 साल तक यह सब कैसे चलता रहा।

मुख्य बातें

हितेश पगारे (ब्लड बैंक प्रमुख) और डॉ.
भिसे (मेडिकल सोशल ऑफिसर) को जाँच में दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया गया।
चिंचपोकली शिविर से एकत्र 128 में से 55 रक्त बैग बिना अनुमति बदलापुर के माया ब्लड बैंक भेजे गए।
निजी केंद्र को ₹665 प्रति बैग पर रक्त देकर ₹760–₹800 प्रति बैग मुनाफा कमाने की सुविधा दी गई।
पिछले 10 वर्षों से जेजे ब्लड बैंक का कोई ऑडिट नहीं हुआ था।
सरकार ने QR कोड ट्रैकिंग , तृतीय पक्ष ऑडिट और सहायक निदेशक का पूर्णकालिक पद सृजित करने का वादा किया।
महाराष्ट्र में 417 ब्लड बैंक कार्यरत; 150 नए बैंकों को मंजूरी का कोई प्रस्ताव सरकार के समक्ष नहीं।

मुंबई के सर जेजे मेट्रोपॉलिटन सरकारी ब्लड बैंक में रक्त की चोरी, वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही का मामला 29 जून 2026 को महाराष्ट्र विधान परिषद में गूँजा, जहाँ सार्वजनिक स्वास्थ्य राज्य मंत्री मेघना बोर्डिकर ने घोषणा की कि प्रारंभिक जाँच में दोषी पाए गए ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. हितेश पगारे और मेडिकल सोशल ऑफिसर डॉ. भिसे की सेवाएँ तत्काल प्रभाव से समाप्त की जा रही हैं। दोनों अधिकारियों के विरुद्ध आपराधिक मामले भी दर्ज किए जाएँगे।

विधान परिषद में उठा मुद्दा

भारतीय जनता पार्टी (BJP) की एमएलसी चित्रा वाघ ने सोमवार को 'ध्यान आकर्षण प्रस्ताव' के माध्यम से यह मामला सदन के सामने रखा। उन्होंने आरोप लगाया कि चिंचपोकली में आयोजित एक रक्तदान शिविर के दौरान एकत्र किए गए 128 रक्त बैगों में से 55 बैग बिना किसी पूर्व अनुमति या आधिकारिक रिकॉर्ड के बदलापुर स्थित माया ब्लड बैंक में भेज दिए गए। वाघ ने इसे सरकारी रक्त की सीधी चोरी और आधिकारिक तंत्र का घोर दुरुपयोग करार दिया।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक निजी भंडारण केंद्र को ₹665 प्रति बैग की दर से रक्त की आपूर्ति करते हुए अनधिकृत रियायत दी गई, जिससे निजी संस्थाओं को प्रति बैग ₹760 से ₹800 तक का मुनाफा हुआ — जिसे वाघ ने 'सरकारी खजाने की लूट' कहा।

डॉ. पगारे पर अतिरिक्त आरोप

चित्रा वाघ ने दावा किया कि उनके पास इस बात के साक्ष्य हैं कि डॉ. हितेश पगारे बदलापुर स्थित निजी माया ब्लड बैंक के मालिक हैं, जहाँ जेजे अस्पताल के कर्मचारी, सामग्री और वाहनों का उपयोग किया जा रहा था। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जबरन छुट्टी पर रहने के दौरान भी डॉ. पगारे ने अनधिकृत रूप से एक निजी कंपनी से फ्रीजर खरीदने की माँग की।

इसके अतिरिक्त, वाघ ने कई अन्य गंभीर अनियमितताओं की ओर ध्यान दिलाया — जिनमें डोनर कार्ड पर बारकोड की अनुपस्थिति, ज़रूरतमंद मरीज़ों से रक्त के बदले पैसे की माँग, थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को रक्त आपूर्ति में बाधा, पिछले 10 वर्षों से ब्लड बैंक का ऑडिट न होना, और राज्य रक्त आधान परिषद (SBTC) में पूर्णकालिक अधिकारियों की अनुपस्थिति शामिल है।

सरकार की प्रतिक्रिया और सुधार के वादे

मंत्री मेघना बोर्डिकर ने सदन को आश्वस्त किया कि प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली लागू की जाएगी और राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) तथा खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) के दिशानिर्देशों के अनुसार एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) विकसित की जाएगी। ब्लड बैंक की निगरानी के लिए सहायक निदेशक का एक पूर्णकालिक पद भी सृजित किया जाएगा।

राज्यभर के सभी ब्लड बैंकों की निगरानी के लिए एक समन्वय तंत्र बनाया जाएगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले ब्लड बैंकों का लाइसेंस रद्द किया जाएगा, और सरकार सभी ब्लड बैंकों के तृतीय पक्ष ऑडिट पर विचार कर रही है।

राज्यव्यापी जाँच की माँग

BJP एमएलसी श्रीकांत भारतीय ने बताया कि महाराष्ट्र में वर्तमान में 417 ब्लड बैंक कार्यरत हैं और राज्य आवश्यकता से अधिक रक्त एकत्र कर रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि ऐसे में अतिरिक्त 150 ब्लड बैंकों को अनुमति देने की चर्चा क्यों हो रही है। मंत्री बोर्डिकर ने स्पष्ट किया कि सरकार के समक्ष फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है।

सदन के अन्य सदस्यों ने आशंका जताई कि इस तरह की गड़बड़ियाँ केवल जेजे अस्पताल तक सीमित नहीं हो सकतीं और राज्यव्यापी जाँच की माँग की। मंत्री ने आश्वासन दिया कि FIR दर्ज होने के बाद जाँच में और गंभीर खुलासे होने पर और कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो सवाल उठता है कि राज्य के बाकी 417 ब्लड बैंकों में क्या चल रहा है। QR ट्रैकिंग और SOP के वादे तब तक अर्थहीन हैं जब तक FIR से परे स्वतंत्र जाँच और जवाबदेही का ढाँचा नहीं बनता। थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को रक्त न मिलना इस मामले का सबसे मानवीय और गंभीर पहलू है — जिसे राजनीतिक बयानबाज़ी में दबने नहीं देना चाहिए।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

JJ ब्लड बैंक घोटाला क्या है?
मुंबई के सर जेजे मेट्रोपॉलिटन सरकारी ब्लड बैंक में रक्त की चोरी, अनधिकृत रक्त बैग स्थानांतरण और वित्तीय अनियमितताओं का मामला है। जाँच में पाया गया कि 55 रक्त बैग बिना अनुमति बदलापुर के एक निजी ब्लड बैंक को भेजे गए और निजी केंद्रों को सस्ती दर पर रक्त देकर मुनाफा कमाने दिया गया।
इस मामले में किन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई?
प्रारंभिक जाँच में दोषी पाए गए ब्लड बैंक प्रमुख डॉ. हितेश पगारे और मेडिकल सोशल ऑफिसर डॉ. भिसे को तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया गया है। दोनों के विरुद्ध आपराधिक मामला भी दर्ज किया जाएगा।
महाराष्ट्र सरकार ने ब्लड बैंकों में सुधार के लिए क्या कदम उठाने की घोषणा की?
सरकार ने प्रत्येक रक्त बैग के लिए QR कोड-आधारित ट्रैकिंग प्रणाली, NACO और FDA दिशानिर्देशों पर आधारित SOP, सभी ब्लड बैंकों का तृतीय पक्ष ऑडिट, एक समन्वय निगरानी तंत्र और जेजे ब्लड बैंक में सहायक निदेशक का पूर्णकालिक पद सृजित करने की घोषणा की है।
क्या यह घोटाला केवल जेजे अस्पताल तक सीमित है?
सदन के सदस्यों ने आशंका जताई कि इस तरह की अनियमितताएँ अन्य ब्लड बैंकों में भी हो सकती हैं। मंत्री बोर्डिकर ने आश्वासन दिया कि FIR दर्ज होने के बाद जाँच में और खुलासे होने पर राज्यव्यापी कार्रवाई की जाएगी।
थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों पर इस घोटाले का क्या असर पड़ा?
BJP एमएलसी चित्रा वाघ के अनुसार, इन अनियमितताओं के चलते थैलेसीमिया और सिकल सेल रोगियों को नियमित रक्त आपूर्ति में व्यवधान आया। ये मरीज़ नियमित रक्त चढ़ाने पर निर्भर होते हैं, इसलिए आपूर्ति में बाधा उनके जीवन के लिए सीधा खतरा बन सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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