गुजरात में 1,140 मिलावटी प्लाज्मा यूनिट 'इंसानों के लिए अनुपयोगी' घोषित, जांच महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक फैली
सारांश
मुख्य बातें
अहमदाबाद जिले में उजागर हुए ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट में बीजे मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की है कि मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी के घर से जब्त की गई सभी 1,140 ब्लड प्लाज्मा यूनिट मिलावटी, घटिया गुणवत्ता की और मानव उपयोग के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त हैं। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने 29 जून 2026 को बताया कि जब्त स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच का दायरा महाराष्ट्र के कई ब्लड बैंकों तक विस्तारित हो गया है।
मिलावट का तरीका
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ने असली प्लाज्मा यूनिट्स से उच्च गुणवत्ता वाला प्लाज्मा निकालकर शेष बचे हिस्से में सलाइन वॉटर (नमकीन पानी) मिला दिया, जिससे मात्रा तो बनी रही लेकिन गुणवत्ता गंभीर रूप से प्रभावित हुई। जब भी असली प्लाज्मा की नई खेप आती थी, आरोपी पहले से मिलावट की गई यूनिट उसकी जगह रख देते थे ताकि फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर के अनुसार संख्या पूरी लगे। फोरेंसिक रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि यह प्लाज्मा 'ट्रांसफ्यूजन के लिए उपयुक्त नहीं था और इससे मानव जीवन को गंभीर खतरा हो सकता था।'
महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों तक पहुंची जांच
पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश जाट ने बताया कि आरोपियों ने चुराए गए असली प्लाज्मा में भी मिलावट करके उसे महाराष्ट्र के वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक को बेचा। इन दोनों ब्लड बैंकों के मालिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (एसओजी) के मुताबिक, अहमदनगर के अहमदनगर ब्लड बैंक, धुले के जीवनज्योति ब्लड बैंक, नासिक के संजीवनी ब्लड बैंक, भुसावल के धन्वंतरि ब्लड बैंक और छत्रपति संभाजीनगर के लायंस ब्लड बैंक में भी जांच-पड़ताल जारी है।
आरोपी और कानूनी कार्रवाई
पुलिस के अनुसार, चांगोदर की एक फार्मास्युटिकल कंपनी में पूर्व ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रहे दिनेश चौधरी ने अपनी तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग करते हुए ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों जितेंद्र सोलंकी और रफीक खलीफा के साथ मिलकर इस रैकेट को संचालित किया। महाराष्ट्र निवासी चौथे आरोपी मोहन दाजीबा गायकवाड़ को भी गिरफ्तार किया गया है। चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(3), 338(2), 125, 276, 328(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज है। पुलिस ने 1,140 प्लाज्मा यूनिट, एक डीप फ्रीजर, रासायनिक बोतलें, एक सीलिंग मशीन, खाली प्लाज्मा बैग और एक पिक-अप वाहन जब्त किया है।
मरीजों पर संभावित खतरे की जांच
एसपी जाट ने कहा, 'अगर आगे की पूछताछ में यह साबित होता है कि यह प्लाज्मा सीधे किसी मरीज को चढ़ाया गया था या किसी की मौत हुई, तो मामले में और धाराएं जोड़ी जाएंगी और अधिक आरोपियों को शामिल किया जाएगा।' गौरतलब है कि अब तक की जांच में गुजरात के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा की आपूर्ति का कोई प्रमाण नहीं मिला है।
नियामक खामियों की पड़ताल
पुलिस गुजरात स्वास्थ्य विभाग, फूड एंड ड्रग्स डिपार्टमेंट, प्रयोगशालाओं और गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ समन्वय कर रही है। जांचकर्ता ब्लड बैंकों के लाइसेंसिंग नियमों, योग्यता आवश्यकताओं और फार्मास्युटिकल कंपनियों के साथ प्लाज्मा खरीद-बिक्री के कानूनी प्रावधानों की भी समीक्षा कर रहे हैं। एसपी जाट के अनुसार, जांच के नतीजे उन नियामक कमियों को उजागर करेंगे जिनका आरोपियों ने फायदा उठाया और भविष्य में ऐसे अपराधों की रोकथाम के लिए सुझाव तैयार करने में सहायक होंगे।