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गुजरात: 1,140 मिलावटी प्लाज्मा यूनिट 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' घोषित, महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक जांच

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गुजरात: 1,140 मिलावटी प्लाज्मा यूनिट 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' घोषित, महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक जांच

सारांश

गुजरात के अहमदाबाद में पकड़े गए प्लाज्मा मिलावट रैकेट की परतें खुलती जा रही हैं। 1,140 जब्त यूनिट फोरेंसिक जांच में 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' निकलीं। असली प्लाज्मा में सलाइन मिलाकर मुनाफा कमाने वाले इस रैकेट की जड़ें अब महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक पहुँच गई हैं और 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

मुख्य बातें

1,140 प्लाज्मा यूनिट फोरेंसिक जांच में मिलावटी और ट्रांसफ्यूजन के लिए अनुपयुक्त पाई गईं; नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू।
मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी सहित 4 लोग गिरफ्तार ; महाराष्ट्र निवासी मोहन दाजीबा गायकवाड़ भी हिरासत में।
असली प्लाज्मा से उच्च गुणवत्ता वाला हिस्सा निकालकर उसमें सलाइन वॉटर मिलाया जाता था; मिलावटी प्लाज्मा वाशिम और जालना ब्लड बैंक को सप्लाई किया गया।
महाराष्ट्र के 5 अन्य ब्लड बैंकों — अहमदनगर, धुले, नासिक, भुसावल और छत्रपति संभाजीनगर — की भूमिका की जांच जारी।
मामला चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं के तहत दर्ज; यदि मरीज की मौत साबित हुई तो अतिरिक्त धाराएँ जोड़ी जाएंगी।
गुजरात की अब तक की जांच में राज्य के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा सप्लाई का कोई प्रमाण नहीं मिला।

अहमदाबाद के ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट की जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है — मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी के घर से जब्त की गई सभी 1,140 प्लाज्मा यूनिट फोरेंसिक जांच में मिलावटी, घटिया और ट्रांसफ्यूजन के लिए पूरी तरह अनुपयुक्त पाई गई हैं। बीजे मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर अधिकारियों ने जब्त स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है और जांच का दायरा महाराष्ट्र के कई ब्लड बैंकों तक बढ़ा दिया है।

फोरेंसिक रिपोर्ट के मुख्य निष्कर्ष

बीजे मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि जब्त प्लाज्मा फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के निर्धारित मानकों पर खरा नहीं उतरा। रिपोर्ट के अनुसार, 'प्लाज्मा बेहद घटिया गुणवत्ता का था, इससे मानव जीवन को खतरा हो सकता था और यह ट्रांसफ्यूजन के लिए उपयुक्त नहीं था।'

जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी ने असली प्लाज्मा यूनिट से उच्च गुणवत्ता वाला प्लाज्मा निकाल लिया और मात्रा बनाए रखने के लिए बचे हिस्से में सलाइन वॉटर (नमक का पानी) मिला दिया। नई खेप आने पर पहले से मिलावट की गई यूनिट से असली यूनिट बदल दी जाती थीं, ताकि फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर की संख्या पूरी दिखे।

रैकेट का तरीकाकार

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के अनुसार, चांगोदर की एक फार्मास्युटिकल कंपनी के लिए भेजे जाने वाले प्लाज्मा को डिलीवरी से पहले ही दूसरी जगह भेज दिया जाता था। आरोप है कि फार्मास्युटिकल कंपनियों में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रह चुके दिनेश चौधरी ने अपनी तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग करते हुए ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों जितेंद्र सोलंकी और रफीक खलीफा के साथ मिलकर यह काम किया।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से एकत्र असली प्लाज्मा में भी आगे बेचने से पहले मिलावट की जाती थी, ताकि मात्रा बढ़ाकर अधिकतम मुनाफा कमाया जा सके।

गिरफ्तारियाँ और महाराष्ट्र कनेक्शन

पुलिस अधीक्षक (SP) ओम प्रकाश जाट ने बताया कि अब तक इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच का दायरा बढ़ने पर महाराष्ट्र निवासी चौथे आरोपी मोहन दाजीबा गायकवाड़ को भी हिरासत में लिया गया।

SP जाट ने कहा, 'असली प्लाज्मा को नकली से बदलने और चुराने के बाद उन्होंने असली प्लाज्मा में भी मिलावट की। मिलावट के बाद यह प्लाज्मा महाराष्ट्र के दो ब्लड बैंकों — वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक — में भेजा गया। हमने इन दोनों ब्लड बैंकों के मालिकों को पकड़ लिया है।'

महाराष्ट्र के किन ब्लड बैंकों पर नज़र

SOG के अनुसार, वाशिम और जालना के अलावा जांच-पड़ताल और पूछताछ निम्नलिखित केंद्रों पर भी जारी है — अहमदनगर ब्लड बैंक (अहमदनगर), जीवनज्योति ब्लड बैंक (धुले), संजीवनी ब्लड बैंक (नासिक), धन्वंतरि ब्लड बैंक (भुसावल) और लायंस ब्लड बैंक (छत्रपति संभाजीनगर)। इन केंद्रों के संचालकों की संदिग्ध भूमिका की जांच की जा रही है।

मरीजों पर असर और आगे की कार्रवाई

SP जाट ने कहा कि यदि आगे की पूछताछ में यह सामने आता है कि मिलावटी प्लाज्मा सीधे किसी मरीज को चढ़ाया गया या किसी अन्य ब्लड बैंक को सप्लाई किया गया, तो उस पहलू की भी जांच होगी। उन्होंने कहा, 'अगर जांच में साबित होता है कि इसकी वजह से किसी मरीज की मौत हुई या कोई बीमार पड़ा, तो मामले में और उचित धाराएँ जोड़ी जाएंगी और अतिरिक्त आरोपियों के नाम भी शामिल किए जाएंगे।'

गौरतलब है कि अब तक की जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है जो यह दर्शाए कि गुजरात के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा सप्लाई किया गया था। पुलिस स्वास्थ्य विभाग, फूड एंड ड्रग्स विभाग, प्रयोगशालाओं और गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ समन्वय में काम कर रही है।

चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(3), 338(2), 125, 276, 328(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज है। जब्त सामग्री में 1,140 ब्लड प्लाज्मा यूनिट, एक डीप फ्रीजर, रासायनिक बोतलें, एक सीलिंग मशीन, खाली प्लाज्मा बैग और एक पिक-अप वाहन शामिल हैं। जांच के निष्कर्ष रेगुलेटरी खामियों को उजागर करने और भविष्य में ऐसे अपराधों को रोकने के लिए सुझाव तैयार करने में भी सहायक होंगे।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की ब्लड सप्लाई चेन में व्यापक रेगुलेटरी विफलता का आईना है। जब एक पूर्व कलेक्शन एग्जीक्यूटिव सलाइन वॉटर से 1,140 यूनिट प्लाज्मा मिलावटी बना सके और वे महाराष्ट्र के कई ब्लड बैंकों तक पहुँच सकें, तो सवाल उठता है कि FDA और स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन की निगरानी कहाँ थी। पुलिस द्वारा SOP की पड़ताल सराहनीय है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह जांच केवल आरोपियों को दंडित करने तक सीमित रहेगी या रेगुलेटरी ढाँचे में ठोस बदलाव भी लाएगी। जब तक ब्लड बैंकों के लाइसेंसिंग और आपूर्ति सत्यापन में स्वतंत्र तृतीय-पक्ष ऑडिट अनिवार्य नहीं होता, ऐसे रैकेट की पुनरावृत्ति से इनकार नहीं किया जा सकता।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में मिलावटी प्लाज्मा रैकेट क्या है?
यह अहमदाबाद जिले में उजागर हुआ एक आपराधिक रैकेट है जिसमें मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी और उसके साथियों ने असली ब्लड प्लाज्मा में सलाइन वॉटर मिलाकर उसे मिलावटी बनाया और फार्मास्युटिकल कंपनियों तथा महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों को सप्लाई किया। फोरेंसिक जांच में जब्त 1,140 यूनिट मानव उपयोग के लिए अनुपयुक्त पाई गई हैं।
क्या मिलावटी प्लाज्मा किसी मरीज को चढ़ाया गया?
अभी तक की जांच में ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि गुजरात के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा सप्लाई किया गया। हालांकि SP ओम प्रकाश जाट ने कहा है कि यदि आगे की पूछताछ में मरीज को नुकसान या मौत का प्रमाण मिला, तो मामले में अतिरिक्त धाराएँ जोड़ी जाएंगी।
महाराष्ट्र के कौन-से ब्लड बैंक जांच के दायरे में हैं?
वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक के मालिकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके अलावा अहमदनगर ब्लड बैंक, जीवनज्योति ब्लड बैंक (धुले), संजीवनी ब्लड बैंक (नासिक), धन्वंतरि ब्लड बैंक (भुसावल) और लायंस ब्लड बैंक (छत्रपति संभाजीनगर) में भी पूछताछ जारी है।
आरोपियों ने प्लाज्मा में मिलावट कैसे की?
जांचकर्ताओं के अनुसार, आरोपी असली प्लाज्मा यूनिट से उच्च गुणवत्ता वाला प्लाज्मा निकाल लेते थे और मात्रा बनाए रखने के लिए बचे हिस्से में सलाइन वॉटर मिला देते थे। नई खेप आने पर मिलावटी यूनिट से असली यूनिट बदल दी जाती थीं ताकि फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर की संख्या पूरी दिखे।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और क्या धाराएँ लगाई गई हैं?
अब तक 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है — दिनेश चौधरी, जितेंद्र सोलंकी, रफीक खलीफा और महाराष्ट्र निवासी मोहन दाजीबा गायकवाड़। चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(3), 338(2), 125, 276, 328(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज है।
राष्ट्र प्रेस
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