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सिंधु जल समझौता निलंबन से जम्मू-कश्मीर में बाढ़ का खतरा, विशेषज्ञ रशीद राहिल ने जताई गंभीर चिंता

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सिंधु जल समझौता निलंबन से जम्मू-कश्मीर में बाढ़ का खतरा, विशेषज्ञ रशीद राहिल ने जताई गंभीर चिंता

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिंधु जल समझौते का निलंबन सिर्फ पाकिस्तान को नहीं — जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञ रशीद राहिल की चेतावनी: बांध बनाने से घाटी में बाढ़ का खतरा, और दोनों देशों के बीच नए तनाव की आशंका — हालाँकि ट्रैक टू डिप्लोमेसी से बहाली की उम्मीद भी बनी है।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने की घोषणा की।
विशेषज्ञ रशीद राहिल के अनुसार, बांध निर्माण से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
कश्मीर घाटी को सबसे अधिक नुकसान की आशंका जताई गई है।
राहिल ने इसे भारत के लिए रणनीतिक लाभ का बिंदु बताया — जल-संसाधन से पाकिस्तान पर दबाव बनाने की संभावना।
ट्रैक टू डिप्लोमेसी के संकेतों के बीच समझौते की पुनर्बहाली को भविष्य में संभव बताया गया।

राजनीतिक विशेषज्ञ रशीद राहिल ने श्रीनगर में चेतावनी दी है कि 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद भारत द्वारा सिंधु जल समझौते को निलंबित करने की घोषणा का सबसे पहला और सबसे गहरा असर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख पर पड़ सकता है। उनके अनुसार, नदियों पर बांध बनाकर जल-प्रवाह रोकने से घाटी में बाढ़ का खतरा बढ़ेगा और भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव और गहरा हो सकता है।

मुख्य घटनाक्रम

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को रोकने की घोषणा की। इस पृष्ठभूमि में विशेषज्ञ रशीद राहिल ने कहा कि 1947 में भारत-पाकिस्तान विभाजन के समय जल-संसाधनों का बंटवारा एक जटिल मुद्दा रहा है। उन्होंने कहा, 'पानी एक कुदरती देन है, लेकिन इस पर सबसे पहला हक उन लोगों का है, जिनके लिए यह आधार है। उसके बाद दूसरे लोगों को हक है।'

जम्मू-कश्मीर पर संभावित असर

राहिल ने स्पष्ट किया कि जब बांध बनाकर पानी रोका जाएगा, तो बांध-क्षेत्रों में जलभराव और बाढ़ का खतरा स्वाभाविक रूप से बढ़ जाता है। उनके अनुसार, जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ क्षेत्र इस खतरे की जद में आ सकते हैं — और विशेष रूप से कश्मीर घाटी को अधिक नुकसान की आशंका है। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री भी यह कह चुके हैं कि इन नदियों के पानी पर पहला हक यहाँ के निवासियों का है।

भारत-पाकिस्तान तनाव की आशंका

विशेषज्ञ राहिल के अनुसार, समझौते को इस तरह निलंबित रखने से दोनों देशों के बीच नए सिरे से तनाव उत्पन्न हो सकता है। उन्होंने कहा कि जिस देश के पास जल-संसाधन हैं, वह दूसरे देश को इस मुद्दे पर कमज़ोर कर सकता है। उनके शब्दों में, 'यह भारत के लिए एक रणनीतिक प्वाइंट है। भारत एक रणनीतिक योजना बना सकता है, जिससे पाकिस्तान को झुकना पड़ेगा।'

कूटनीतिक बहाली की उम्मीद

हालाँकि राहिल ने यह भी संकेत दिया कि स्थिति स्थायी नहीं रहेगी। उनका मानना है कि ट्रैक टू डिप्लोमेसी के संकेत मिल रहे हैं और दोनों देशों के बीच संवाद की गुंजाइश बनी हुई है। उन्होंने कहा, 'जहाँ जम्मू-कश्मीर के हवाले से हिन्दुस्तान और पाकिस्तान मिल रहे हैं, ट्रैक टू डिप्लोमेसी पर काम करने को लेकर संकेत दे रहे हैं, तो इससे लगता है कि दोनों देशों के बीच आने वाले समय में फिर से बात हो सकती है।' उनके अनुसार, किसी न किसी रूप में इस समझौते की पुनर्बहाली संभव है।

विशेषज्ञ क्या कहते हैं

राहिल का विश्लेषण इस बात पर केंद्रित है कि जल-संसाधन केवल पर्यावरणीय नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक हथियार भी बन सकते हैं। यह ऐसे समय में आया है जब दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव के बाद कूटनीतिक संपर्क के शुरुआती संकेत दिखने लगे हैं। आने वाले हफ्तों में भारत सरकार की जल-नीति पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह सवाल नीति-निर्माताओं से जवाब माँगता है। ट्रैक टू डिप्लोमेसी के संकेतों के बीच यह भी स्पष्ट है कि दोनों सरकारें जानती हैं कि यह स्थिति अनिश्चित काल तक नहीं चल सकती — असली परीक्षा यह है कि बातचीत की मेज़ पर लौटने से पहले कितना नुकसान उठाना पड़ेगा।
RashtraPress
15 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सिंधु जल समझौता निलंबन से जम्मू-कश्मीर को क्या खतरा है?
विशेषज्ञ रशीद राहिल के अनुसार, बांध बनाकर नदियों का प्रवाह रोकने से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के कुछ क्षेत्रों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। विशेष रूप से कश्मीर घाटी को सबसे अधिक नुकसान की आशंका जताई गई है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद सिंधु जल समझौते पर भारत का क्या रुख है?
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत सरकार ने सिंधु जल समझौते को निलंबित करने की घोषणा की है। यह समझौता 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था और छह दशकों से अधिक समय से भारत-पाकिस्तान के बीच जल-बंटवारे का आधार रहा है।
क्या भविष्य में सिंधु जल समझौते की बहाली संभव है?
विशेषज्ञ रशीद राहिल का मानना है कि ट्रैक टू डिप्लोमेसी के संकेतों के बीच दोनों देशों के बीच संवाद की गुंजाइश बनी हुई है। उनके अनुसार, किसी न किसी रूप में इस समझौते की पुनर्बहाली भविष्य में संभव है।
सिंधु जल समझौते पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री का क्या कहना है?
रशीद राहिल के अनुसार, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री यह स्पष्ट कर चुके हैं कि इन नदियों के पानी पर पहला हक यहाँ के निवासियों का है। इसके बाद ही अन्य क्षेत्रों या देशों के उपयोग का प्रश्न उठता है।
सिंधु जल समझौते का निलंबन भारत के लिए रणनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है?
विशेषज्ञ राहिल के अनुसार, जल-संसाधन पर नियंत्रण भारत को पाकिस्तान पर रणनीतिक दबाव बनाने का अवसर देता है। हालाँकि उन्होंने यह भी चेताया कि इससे दोनों देशों के बीच तनाव गहरा हो सकता है, जिसका असर सीमावर्ती आबादी पर सबसे पहले पड़ेगा।
राष्ट्र प्रेस
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