10 अगस्त 2026
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ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट: गुजरात मंत्री पानसेरिया बोले — दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा

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ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट: गुजरात मंत्री पानसेरिया बोले — दोषियों को नहीं बख्शा जाएगा

सारांश

अहमदाबाद SOG ने ब्लड प्लाज्मा मिलावट के एक सुव्यवस्थित रैकेट का भंडाफोड़ किया — महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से आने वाली खेप को चांगोदर पहुँचने से पहले बदला जाता था। गुजरात सरकार ने सख्त कार्रवाई का वादा किया है और 4 आरोपी गिरफ्तार हो चुके हैं।

मुख्य बातें

गुजरात स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने 24 जून 2026 को कहा कि ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट में शामिल किसी को नहीं बख्शा जाएगा।
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस SOG ने कथित मास्टरमाइंड समेत 4 लोगों को गिरफ्तार किया।
मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी (बनासकांठा) पूर्व में फार्मास्युटिकल कंपनी में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रह चुके थे।
महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से आने वाली खेप को चांगोदर स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी पहुँचने से पहले मिलावटी प्लाज्मा बैग से बदला जाता था।
जांचकर्ता अभी भी इस ऑपरेशन के पीछे के बड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रहे हैं।

गुजरात के स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने बुधवार, 24 जून 2026 को स्पष्ट किया कि राज्य सरकार अहमदाबाद जिले में उजागर हुए कथित ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट में संलिप्त प्रत्येक व्यक्ति के विरुद्ध कठोर कार्रवाई करेगी। उन्होंने जीवन रक्षक चिकित्सा आपूर्ति से छेड़छाड़ को गंभीर अपराध करार दिया और कहा कि इससे मरीजों की जान को सीधा खतरा पैदा होता है।

रैकेट का भंडाफोड़ कैसे हुआ

यह बयान अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) द्वारा रैकेट का पर्दाफाश किए जाने के ठीक एक दिन बाद आया। जांचकर्ताओं के अनुसार, ऑपरेशन की शुरुआत असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर मुकेशसिंह दौलतसिंह और कॉन्स्टेबल मेरूभा घनश्यामसिंह को चांगोदर पुलिस स्टेशन के अधिकार क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की खास खुफिया जानकारी मिलने के बाद हुई।

पुलिस ने एक संदिग्ध पर निगरानी शुरू की और एक सुव्यवस्थित षड्यंत्र का खुलासा किया, जिसमें महाराष्ट्र के विभिन्न ब्लड बैंकों से एकत्र किए गए ब्लड प्लाज्मा कंसाइनमेंट को डिलीवरी से पहले बदला जा रहा था।

आरोपियों की भूमिका और मोडस ऑपरेंडी

इस मामले में कथित मास्टरमाइंड समेत चार लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी (निवासी, बनासकांठा जिला) पहले कई फार्मास्युटिकल कंपनियों में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव के रूप में कार्य कर चुके थे।

जांचकर्ताओं का आरोप है कि चौधरी ने इस दौरान अर्जित तकनीकी जानकारी का दुरुपयोग किया और जितेंद्र सोलंकी तथा रफीक खलीफा — जो प्लाज्मा कंसाइनमेंट वाहन के क्रमशः ड्राइवर और को-ड्राइवर थे — के साथ मिलकर यह धोखाधड़ी की। जब भी महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से खेप रवाना होती, ट्रांसपोर्ट टीम कथित तौर पर चौधरी को सूचित करती थी।

जांचकर्ताओं के अनुसार, चांगोदर स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी तक पहुँचने से पहले वाहन को चौधरी के घर ले जाया जाता था, जहाँ असली प्लाज्मा यूनिट्स को हटाकर उनकी जगह मिलावटी प्लाज्मा बैग रख दिए जाते थे — डिलीवरी की निर्धारित मात्रा बनाए रखते हुए।

सरकार की प्रतिक्रिया

स्वास्थ्य मंत्री पानसेरिया ने कहा, 'सरकार मरीजों की सेहत के साथ खिलवाड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शेगी। एक पारदर्शी और निष्पक्ष जांच से सभी जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।' उन्होंने इस कथित धोखाधड़ी का पर्दाफाश करने के लिए अहमदाबाद SOG और संबंधित अधिकारियों को बधाई भी दी।

मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य सरकार ने इस मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और विस्तृत जांच तत्काल प्रभाव से शुरू कर दी गई है।

मरीजों और स्वास्थ्य तंत्र पर असर

ब्लड प्लाज्मा का उपयोग जलने के गंभीर मामलों, रक्त विकारों और अन्य जीवन-घातक स्थितियों में होता है। मिलावटी प्लाज्मा की आपूर्ति न केवल उपचार को निष्प्रभावी बना सकती है, बल्कि संक्रमण और अन्य जटिलताओं का खतरा भी उत्पन्न कर सकती है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब देश में नकली और मिलावटी दवाओं के विरुद्ध नियामक सख्ती बढ़ाने की मांग जोर पकड़ रही है।

आगे क्या होगा

जांचकर्ता इस ऑपरेशन के पीछे के बड़े नेटवर्क की पड़ताल कर रहे हैं। यह देखना अहम होगा कि क्या अन्य फार्मास्युटिकल कंपनियाँ या ब्लड बैंक भी इस श्रृंखला से जुड़े हैं। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियों की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो बताता है कि 'इनसाइडर फ्रॉड' का खतरा कितना वास्तविक है। राज्य सरकार की 'सख्त कार्रवाई' की घोषणाएँ तब तक अधूरी हैं जब तक सप्लाई चेन में तृतीय-पक्ष ऑडिट और रियल-टाइम ट्रैकिंग अनिवार्य नहीं की जाती। मिलावटी प्लाज्मा किन मरीजों तक पहुँचा, इसका उत्तर अभी सार्वजनिक नहीं हुआ — और यही सबसे बड़ा सवाल है।
RashtraPress
10 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अहमदाबाद ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट क्या है?
यह एक कथित आपराधिक षड्यंत्र है जिसमें महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों से एकत्र असली ब्लड प्लाज्मा यूनिट्स को चांगोदर स्थित फार्मास्युटिकल कंपनी तक पहुँचाने से पहले मिलावटी बैग से बदला जाता था। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस SOG ने इस रैकेट का भंडाफोड़ किया और 4 लोगों को गिरफ्तार किया।
इस मामले में कौन गिरफ्तार हुए हैं?
कथित मास्टरमाइंड दिनेश चौधरी (बनासकांठा जिला), वाहन चालक जितेंद्र सोलंकी और को-ड्राइवर रफीक खलीफा सहित कुल 4 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। चौधरी पहले फार्मास्युटिकल कंपनियों में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रह चुके थे।
गुजरात सरकार इस मामले में क्या कदम उठा रही है?
स्वास्थ्य मंत्री प्रफुल्ल पानसेरिया ने कहा है कि राज्य सरकार ने मामले को अत्यंत गंभीरता से लिया है और पारदर्शी जांच शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
ब्लड प्लाज्मा में मिलावट मरीजों के लिए कितनी खतरनाक है?
ब्लड प्लाज्मा का उपयोग जलने के गंभीर मामलों, रक्त विकारों और अन्य जीवन-घातक स्थितियों में किया जाता है। मिलावटी प्लाज्मा उपचार को निष्प्रभावी बना सकता है और संक्रमण तथा अन्य गंभीर जटिलताओं का कारण बन सकता है, जिससे मरीजों की जान को सीधा खतरा होता है।
इस रैकेट का पर्दाफाश कैसे हुआ?
चांगोदर पुलिस स्टेशन क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों की खुफिया जानकारी मिलने के बाद ASI मुकेशसिंह दौलतसिंह और कॉन्स्टेबल मेरूभा घनश्यामसिंह ने निगरानी शुरू की। इसके बाद अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस SOG ने ऑपरेशन चलाकर रैकेट का भंडाफोड़ किया।
राष्ट्र प्रेस
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