9 जुलाई 2026
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गुजरात नकली प्लाज्मा रैकेट: तीन और गिरफ्तार, कुल 7 आरोपी; पाँच राज्यों में जाँच का दायरा बढ़ा

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गुजरात नकली प्लाज्मा रैकेट: तीन और गिरफ्तार, कुल 7 आरोपी; पाँच राज्यों में जाँच का दायरा बढ़ा

सारांश

गुजरात का नकली प्लाज्मा कांड अब पाँच राज्यों में फैल चुका है। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने तीन और आरोपियों को दबोचा — कुल गिरफ्तारियाँ सात। ब्लड बैंकों से असली प्लाज्मा निकालकर मिलावटी पदार्थ भेजने का यह रैकेट दवा कंपनियों की आपूर्ति श्रृंखला में गहरी सेंध का संकेत है।

मुख्य बातें

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया; कुल गिरफ्तारियाँ सात हुईं।
नए आरोपियों में अजीत सोलंकी (बावला, अहमदाबाद) और महाराष्ट्र के ब्लड बैंक संचालक प्रकाश सांगले व अशोक सांगले शामिल हैं।
जाँच का दायरा महाराष्ट्र , कर्नाटक , राजस्थान , छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक बढ़ाया गया।
कथित मुख्य साजिशकर्ता दिनेश चौधरी ने मार्च-अप्रैल के दौरान प्लाज्मा के 12 बक्से मिलावटी पदार्थ से बदले।
लगभग ₹25 लाख मूल्य का पिकअप वाहन जब्त; बेंगलुरु की एक दवा कंपनी की जाँच जारी।

अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने 9 जुलाई 2026 को कथित नकली प्लाज्मा रैकेट में तीन और संदिग्धों को गिरफ्तार किया, जिससे इस मामले में कुल गिरफ्तारियों की संख्या सात हो गई है। जाँचकर्ताओं ने अंतरराज्यीय आपूर्ति श्रृंखला में मिलावटी प्लाज्मा की आवाजाही का पता लगाने के बाद जाँच का दायरा महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक विस्तारित कर दिया है।

नई गिरफ्तारियाँ और आरोपियों की पहचान

नवीनतम गिरफ्तारियों में अहमदाबाद जिले के बावला निवासी 33 वर्षीय अजीत सोलंकी और महाराष्ट्र के ब्लड बैंक संचालक प्रकाश सांगले तथा अशोक सांगले शामिल हैं। स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) के अनुसार, ये तीनों कथित तौर पर दवा कंपनियों के लिए निर्धारित असली प्लाज्मा के स्थान पर मिलावटी प्लाज्मा के परिवहन, प्राप्ति और वितरण में शामिल थे।

इससे पहले पुलिस कथित मुख्य साजिशकर्ता दिनेश चौधरी को जितेंद्र सोलंकी, रफीक खलीफा और मोहन गायकवाड़ के साथ गिरफ्तार कर चुकी थी।

मामले का खुलासा कैसे हुआ

पुलिस के अनुसार, इस कांड का भंडाफोड़ सबसे पहले पिछले महीने चांगोदर स्थित एक दवा कंपनी की शिकायत से हुआ। कंपनी ने आरोप लगाया था कि ब्लड बैंकों से भेजी गई प्लाज्मा खेपों के साथ उनके संयंत्र तक पहुँचने से पहले ही छेड़छाड़ की जा चुकी थी। अधिकारियों का आरोप है कि चौधरी ने प्लाज्मा संग्रह और परिवहन प्रक्रिया की अपनी जानकारी का दुरुपयोग करते हुए असली प्लाज्मा को मिलावटी पदार्थ से बदला।

आपूर्ति श्रृंखला और मिलावट का तरीका

जाँच में सामने आया है कि अजीत सोलंकी शिकायतकर्ता कंपनी के पिकअप वाहन का उपयोग करके राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से प्लाज्मा खेपों का परिवहन करता था। कथित तौर पर उसने मार्च और अप्रैल के दौरान चौधरी को प्लाज्मा के 12 बक्से की आपूर्ति की। SOG के अनुसार, चौधरी ने मोहन गायकवाड़ से अनुपयोगी प्लाज्मा प्राप्त किया था, जिसने इसे महाराष्ट्र के एक ब्लड बैंक के माध्यम से हासिल किया था। ब्लड बैंकों से एकत्र असली प्लाज्मा को कथित तौर पर निकालकर उसमें मिलावटी पदार्थ मिलाया जाता था और फिर वह आगे भेज दिया जाता था।

पुलिस ने लगभग ₹25 लाख मूल्य का पिकअप वाहन जब्त किया है।

महाराष्ट्र और बेंगलुरु कनेक्शन

पुलिस का आरोप है कि महाराष्ट्र के वाशिम जिले में ब्लड बैंक संचालित करने वाले प्रकाश सांगले और अशोक सांगले ने मिलावटी प्लाज्मा को बेंगलुरु की एक अन्य दवा कंपनी तक पहुँचाने में मदद की। उस कंपनी की जाँच अभी जारी है।

आगे क्या होगा

यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में रक्त और प्लाज्मा आपूर्ति श्रृंखला की निगरानी को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पाँच राज्यों में फैली इस जाँच के और व्यापक होने की संभावना है, क्योंकि बेंगलुरु स्थित दवा कंपनी से जुड़े तार अभी खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, रैकेट में और भी संदिग्धों की संलिप्तता से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की दवा आपूर्ति श्रृंखला में निगरानी की बड़ी खामी को उजागर करता है। पाँच राज्यों में फैला यह नेटवर्क बताता है कि ब्लड बैंकों और दवा कंपनियों के बीच तीसरे पक्ष के परिवहन की जाँच-पड़ताल लगभग न के बराबर थी। गौरतलब है कि मिलावटी प्लाज्मा से बनी दवाएँ सीधे मरीजों की जान को खतरे में डाल सकती हैं — इसलिए यह स्वास्थ्य नियामकों के लिए भी उतनी ही बड़ी विफलता है जितनी कानून-व्यवस्था के लिए। बेंगलुरु कनेक्शन और वाशिम के ब्लड बैंक का सामने आना यह संकेत देता है कि जाँच और गहरी होने पर और नाम सामने आ सकते हैं।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात नकली प्लाज्मा रैकेट क्या है?
यह एक कथित आपराधिक रैकेट है जिसमें दवा कंपनियों को भेजी जाने वाली असली प्लाज्मा खेपों को रास्ते में मिलावटी पदार्थ से बदल दिया जाता था। मामले का खुलासा चांगोदर स्थित एक दवा कंपनी की शिकायत के बाद हुआ और अब तक सात लोग गिरफ्तार हो चुके हैं।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं?
9 जुलाई 2026 तक कुल सात लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें कथित मुख्य साजिशकर्ता दिनेश चौधरी, जितेंद्र सोलंकी, रफीक खलीफा, मोहन गायकवाड़ और नवीनतम गिरफ्तारियों में अजीत सोलंकी, प्रकाश सांगले व अशोक सांगले शामिल हैं।
जाँच किन-किन राज्यों तक फैली है?
अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने जाँच का दायरा महाराष्ट्र, कर्नाटक, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश तक बढ़ा दिया है। बेंगलुरु की एक दवा कंपनी की अलग से जाँच जारी है।
मिलावटी प्लाज्मा की आपूर्ति कैसे होती थी?
आरोपों के अनुसार, अजीत सोलंकी शिकायतकर्ता कंपनी के पिकअप वाहन से राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश से प्लाज्मा लाता था। मार्च-अप्रैल के दौरान उसने दिनेश चौधरी को 12 बक्से प्लाज्मा दिए, जिसमें असली प्लाज्मा निकालकर मिलावटी पदार्थ मिलाया गया और फिर वह खेप दवा कंपनियों को भेज दी गई।
क्या इस रैकेट से मरीजों को खतरा है?
मिलावटी प्लाज्मा से निर्मित दवाएँ सीधे मरीजों के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं, हालाँकि पुलिस ने अभी तक किसी मरीज के नुकसान की पुष्टि नहीं की है। जाँच जारी है और बेंगलुरु की दवा कंपनी से जुड़े पहलुओं की भी पड़ताल की जा रही है।
राष्ट्र प्रेस
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