30 जून 2026
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गुजरात: 1,140 प्लाज्मा यूनिट 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' घोषित, जांच महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक पहुंची

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गुजरात: 1,140 प्लाज्मा यूनिट 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' घोषित, जांच महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों तक पहुंची

सारांश

अहमदाबाद में पकड़े गए प्लाज्मा मिलावट रैकेट की परतें खुलती जा रही हैं — 1,140 यूनिट 'जानलेवा' घोषित, चार गिरफ्तार, और जांच अब महाराष्ट्र के पांच ब्लड बैंकों तक फैल गई है। यह मामला देश की ब्लड बैंक नियामक व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

मुख्य बातें

बीजे मेडिकल कॉलेज की फोरेंसिक रिपोर्ट ने पुष्टि की कि 1,140 जब्त प्लाज्मा यूनिट मिलावटी और ट्रांसफ्यूजन के लिए 'इंसानों के लिए अनुपयुक्त' हैं।
मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी सहित 4 लोग गिरफ्तार ; वाशिम और जालना ब्लड बैंकों के मालिक भी हिरासत में।
आरोपियों ने असली प्लाज्मा में सलाइन वॉटर मिलाकर मात्रा बढ़ाई और मिलावटी माल महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों को बेचा।
जांच अब महाराष्ट्र के 5 ब्लड बैंकों — अहमदनगर, धुले, नासिक, भुसावल और छत्रपति संभाजीनगर — तक विस्तारित।
यदि मिलावटी प्लाज्मा किसी मरीज को चढ़ाया गया साबित हुआ तो अतिरिक्त धाराएं और आरोपी जोड़े जाएंगे।
पुलिस ब्लड बैंक SOP और रेगुलेटरी फ्रेमवर्क की खामियों की भी पड़ताल कर रही है।

अहमदाबाद के ब्लड प्लाज्मा मिलावट रैकेट में बीजे मेडिकल कॉलेज की फोरेंसिक रिपोर्ट ने खुलासा किया है कि मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी के घर से बरामद 1,140 प्लाज्मा यूनिट पूरी तरह मिलावटी, घटिया गुणवत्ता वाले और ट्रांसफ्यूजन के लिए सर्वथा अनुपयुक्त पाए गए हैं। अहमदाबाद ग्रामीण पुलिस ने 29 जून 2026 को बताया कि जब्त स्टॉक को नष्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जांच का दायरा महाराष्ट्र के कई ब्लड बैंकों तक विस्तारित हो गया है।

मिलावट का तरीका: सलाइन से भरे नकली यूनिट

जांचकर्ताओं के अनुसार आरोपियों ने असली प्लाज्मा यूनिट से उच्च गुणवत्ता वाला प्लाज्मा निकाल लिया और मात्रा बनाए रखने के लिए खाली जगह में सलाइन वॉटर (नमक का पानी) मिला दिया। जब भी असली प्लाज्मा की नई खेप आती थी, आरोपी उन्हें पहले से मिलावट किए गए यूनिट से बदल देते थे ताकि संख्या फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर के बराबर बनी रहे।

पुलिस अधीक्षक ओम प्रकाश जाट ने बताया कि खेप से निकाले गए असली प्लाज्मा में भी महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों को बेचने से पहले मिलावट की जाती थी — इस तरह आरोपी मात्रा बढ़ाकर अधिकतम मुनाफा कमाते थे।

फोरेंसिक रिपोर्ट के निष्कर्ष

बीजे मेडिकल कॉलेज के पैथोलॉजी विभाग की रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया: 'प्लाज्मा बेहद घटिया गुणवत्ता का था, इससे मानव जीवन को खतरा हो सकता था और यह ट्रांसफ्यूजन के लिए उपयुक्त नहीं था।' एसपी जाट ने कहा, 'उसमें गंदगी और मिलावट थी — न इलाज की क्षमता थी, न स्वच्छता के आवश्यक मानक पूरे होते थे।'

रिपोर्ट के आधार पर जांचकर्ताओं का मानना है कि आरोपी ने जो प्लाज्मा असली बताकर बेचा, उसमें भी चोरी के बाद मिलावट की गई थी।

महाराष्ट्र के ब्लड बैंकों तक जांच का विस्तार

एसपी जाट ने बताया: 'असली प्लाज्मा को नकली से बदलने और चुराने के बाद आरोपियों ने असली प्लाज्मा में भी मिलावट की। मिलावट के बाद यह वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक को भेजा गया। हमने इन दोनों के मालिकों को गिरफ्तार कर लिया है।'

स्पेशल ऑपरेशन्स ग्रुप (SOG) के मुताबिक जांच-पड़ताल अब अहमदनगर ब्लड बैंक (अहमदनगर), जीवनज्योति ब्लड बैंक (धुले), संजीवनी ब्लड बैंक (नासिक), धन्वंतरि ब्लड बैंक (भुसावल) और लायंस ब्लड बैंक (छत्रपति संभाजीनगर) तक भी फैल गई है।

आरोपी और कानूनी कार्रवाई

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी फार्मास्युटिकल कंपनियों में ब्लड प्लाज्मा कलेक्शन एग्जीक्यूटिव रह चुके हैं। उन्होंने अपनी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल कर ट्रांसपोर्ट कर्मचारियों जितेंद्र सोलंकी और रफीक खलीफा के साथ मिलकर यह रैकेट चलाया। महाराष्ट्र निवासी चौथे आरोपी मोहन दाजीबा गायकवाड़ को भी गिरफ्तार किया गया है।

चांगोदर पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 316(3), 338(2), 125, 276, 328(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज है। जब्त सामग्री में 1,140 प्लाज्मा यूनिट, एक डीप फ्रीजर, केमिकल की बोतलें, एक सीलिंग मशीन, खाली प्लाज्मा बैग और एक पिक-अप गाड़ी शामिल हैं।

आगे क्या होगा

एसपी जाट ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में पता चला कि मिलावटी प्लाज्मा सीधे किसी मरीज को चढ़ाया गया या इससे किसी की मृत्यु हुई, तो मामले में अतिरिक्त धाराएं जोड़ी जाएंगी और नए आरोपी भी शामिल किए जाएंगे। पुलिस स्वास्थ्य विभाग, फूड एंड ड्रग्स विभाग, प्रयोगशालाओं और गुजरात स्टेट काउंसिल फॉर ब्लड ट्रांसफ्यूजन के साथ समन्वय में काम कर रही है। जांचकर्ताओं ने ब्लड बैंकों की मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOP) हासिल कर ली हैं और नियमों के अनुपालन की पड़ताल जारी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि उस नियामक ढांचे की विफलता का है जो मिलावटी प्लाज्मा को इतने लंबे समय तक पकड़ नहीं सका। जब एक पूर्व कलेक्शन एग्जीक्यूटिव अपनी 'अंदरूनी' जानकारी से पूरी सप्लाई चेन को धोखा दे सके, तो सवाल उठता है कि फार्मास्युटिकल कंपनियों और ब्लड बैंकों की गुणवत्ता जांच प्रक्रिया कहां चूकी। महाराष्ट्र के पांच ब्लड बैंकों तक फैली जांच यह भी संकेत देती है कि यह अकेले गुजरात की समस्या नहीं — यह अंतरराज्यीय आपूर्ति श्रृंखला में व्यापक निगरानी की कमी है। जब तक यह स्पष्ट नहीं होता कि मिलावटी प्लाज्मा किसी मरीज तक पहुंचा या नहीं, इस मामले की गंभीरता को कम आंकना उचित नहीं होगा।
RashtraPress
30 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

गुजरात में जब्त 1,140 प्लाज्मा यूनिट को 'अनुपयुक्त' क्यों घोषित किया गया?
बीजे मेडिकल कॉलेज की फोरेंसिक रिपोर्ट के अनुसार इन यूनिट में सलाइन वॉटर की मिलावट की गई थी, जिससे ये फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन के मानकों पर खरी नहीं उतरीं और ट्रांसफ्यूजन के लिए मानव जीवन के लिए खतरनाक पाई गईं।
इस रैकेट में मिलावट कैसे की जाती थी?
आरोपी असली प्लाज्मा यूनिट से उच्च गुणवत्ता का प्लाज्मा निकाल लेते थे और खाली जगह में सलाइन वॉटर भर देते थे। नई खेप आने पर मिलावटी यूनिट असली के स्थान पर रख दी जाती थीं ताकि संख्या फार्मास्युटिकल कंपनी के ऑर्डर से मेल खाए।
इस मामले में अब तक कितने लोग गिरफ्तार हुए हैं और कौन हैं?
अब तक 4 लोग गिरफ्तार हुए हैं — मुख्य आरोपी दिनेश चौधरी, ट्रांसपोर्ट कर्मचारी जितेंद्र सोलंकी और रफीक खलीफा, तथा महाराष्ट्र निवासी मोहन दाजीबा गायकवाड़। वाशिम और जालना ब्लड बैंकों के मालिक भी हिरासत में हैं।
महाराष्ट्र के कौन-से ब्लड बैंक जांच के दायरे में हैं?
वाशिम ब्लड बैंक और जालना ब्लड बैंक के मालिकों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा अहमदनगर ब्लड बैंक, धुले का जीवनज्योति ब्लड बैंक, नासिक का संजीवनी ब्लड बैंक, भुसावल का धन्वंतरि ब्लड बैंक और छत्रपति संभाजीनगर का लायंस ब्लड बैंक भी जांच-पड़ताल के दायरे में हैं।
क्या मिलावटी प्लाज्मा किसी मरीज को चढ़ाया गया?
पुलिस के अनुसार अब तक ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है कि गुजरात के किसी अस्पताल या ब्लड बैंक में मिलावटी प्लाज्मा सप्लाई हुआ। हालांकि यदि आगे की जांच में मरीज को नुकसान पहुंचने की पुष्टि होती है तो मामले में अतिरिक्त कानूनी धाराएं जोड़ी जाएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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