शहीद हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन के बेटे को LG मनोज सिन्हा ने सौंपा नियुक्ति पत्र, परिवार को सरकारी सहायता का भरोसा
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 1 अगस्त को श्रीनगर स्थित लोक भवन में शहीद हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी के पुत्र अब्सर आशिक कुरैशी को सरकारी सेवा का नियुक्ति पत्र सौंपा। इस अवसर पर शहीद के परिजन भी उपस्थित रहे। 22 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग जिले में हुए आतंकी हमले में आशिक हुसैन कुरैशी ने सर्वोच्च बलिदान दिया था।
मुख्य घटनाक्रम
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नियुक्ति पत्र सौंपते हुए शहीद जवान को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार को आश्वस्त किया कि सरकार की ओर से हर संभव सहायता प्रदान की जाएगी। इससे पूर्व 24 जुलाई को वे बडगाम जिले के बीरवाह स्थित ललपोरा गाँव में शहीद के आवास पर पहुँचे थे, जहाँ उन्होंने परिजनों से भेंट कर उन्हें सांत्वना दी थी।
शहीद की सेवा और बलिदान
हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी जम्मू-कश्मीर पुलिस की तीसरी बटालियन, इंडियन रिजर्व पुलिस में तैनात थे। 22 जुलाई को अनंतनाग में आतंकियों द्वारा किए गए हमले में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। उनकी शहादत ने सुरक्षा बलों की अदम्य साहस की परंपरा को एक बार फिर रेखांकित किया।
सरकार की प्रतिक्रिया
उपराज्यपाल ने कहा कि शहीद का साहस, कर्तव्य के प्रति समर्पण और मातृभूमि के लिए दिया गया बलिदान प्रत्येक देशवासी को सदैव प्रेरणा देता रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भी लिखा था कि शहीद आशिक हुसैन कुरैशी की वीरता को पूरा देश नमन करता है और इस कठिन समय में सरकार तथा देश का हर नागरिक उनके परिवार के साथ दृढ़ता से खड़ा है।
आतंकवाद के विरुद्ध अभियान
मनोज सिन्हा ने यह भी कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय बल आतंकवाद के समूचे नेटवर्क को समाप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि शहीद की सेवा-भावना और मातृभूमि के प्रति प्रेम एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और विकसित जम्मू-कश्मीर के निर्माण में सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।
आगे की राह
यह नियुक्ति पत्र जम्मू-कश्मीर सरकार की उस नीति के अंतर्गत दिया गया है जिसमें ड्यूटी के दौरान शहीद होने वाले सुरक्षाकर्मियों के परिजनों को सरकारी रोजगार प्रदान किया जाता है। इस कदम को शहीद परिवारों के प्रति सरकारी प्रतिबद्धता की एक ठोस अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है।