23 जुलाई 2026
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अनंतनाग हमला: पुलिसकर्मी की हत्या के बाद कश्मीर में 3,500 OGW हिरासत में, TRF ने ली जिम्मेदारी

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अनंतनाग हमला: पुलिसकर्मी की हत्या के बाद कश्मीर में 3,500 OGW हिरासत में, TRF ने ली जिम्मेदारी

सारांश

अनंतनाग में हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद कश्मीर में सुरक्षा बलों ने 24 घंटों में 3,500 OGW हिरासत में लिए। TRF — लश्कर-ए-तैयबा की एक शाखा — ने हमले की जिम्मेदारी ली है। LeT के दो आतंकवादियों के मकान भी गिराए गए।

मुख्य बातें

हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की 23 जुलाई को अनंतनाग में आतंकी हमले में हत्या कर दी गई; वे बडगाम के बीरवाह के निवासी थे।
हत्या के बाद 24 घंटों के भीतर पूरी कश्मीर घाटी में लगभग 3,500 संदिग्ध OGW हिरासत में लिए गए।
लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो सक्रिय आतंकवादियों के मकान अनंतनाग जिले में गुरुवार को गिराए गए।
हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली, जो संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की एक शाखा है।
उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने हमले की निंदा की; सिन्हा ने दोषियों को सज़ा दिलाने का संकल्प जताया।

जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में बुधवार, 23 जुलाई को एक आतंकी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या के बाद, सुरक्षा बलों ने पूरी घाटी में व्यापक कार्रवाई करते हुए 24 घंटों के भीतर लगभग 3,500 संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) को हिरासत में ले लिया। इस हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है, जो पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक हिस्सा है।

मुख्य घटनाक्रम

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी हमले के समय आर्म्ड पुलिस की तीसरी बटालियन में यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे। वे बडगाम जिले के बीरवाह के मूल निवासी थे। अनंतनाग शहर में हुए इस हमले के ठीक एक दिन बाद, गुरुवार को सुरक्षा बलों ने लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े दो सक्रिय आतंकवादियों के मकान अनंतनाग जिले में ही गिरा दिए।

पूरे कश्मीर में कई स्थानों पर तलाशी अभियान और छापेमारी जारी है। अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई आतंकी सहायता नेटवर्क — यानी OGW तंत्र — की पहचान कर उसे नष्ट करने के व्यापक अभियान का हिस्सा है।

शहीद पुलिसकर्मी को श्रद्धांजलि

अनंतनाग जिला पुलिस लाइंस में हेड कॉन्स्टेबल कुरैशी को पुष्पांजलि अर्पित की गई। उनके गृहनगर में सैकड़ों लोगों ने अंतिम संस्कार में भाग लिया और शोकाकुल परिवार के प्रति संवेदनाएँ व्यक्त कीं।

सरकार और नेताओं की प्रतिक्रिया

जम्मू-कश्मीर के उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला दोनों ने इस कायरतापूर्ण हमले की कड़ी निंदा की। उप-राज्यपाल सिन्हा ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए कहा कि शहीद पुलिसकर्मी की हत्या के दोषियों को अवश्य सज़ा मिलेगी और उन्हें न्याय के कटघरे में लाया जाएगा।

TRF और लश्कर-ए-तैयबा का संबंध

द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) का गठन 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के कैडरों से हुआ था। यह संगठन जानबूझकर गैर-धार्मिक नाम और प्रतीकों का उपयोग करता है ताकि एक सेक्युलर छवि प्रस्तुत की जा सके — लेकिन इस पर धार्मिक अल्पसंख्यक समुदायों के स्थानीय लोगों की लक्षित हत्याओं के आरोप हैं। लश्कर-ए-तैयबा को संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी संगठन घोषित किया जा चुका है। रिपोर्टों के अनुसार, TRF की सोशल मीडिया पर उल्लेखनीय उपस्थिति है और इसके कुछ संचालन का संबंध पाकिस्तान से बताया जाता है।

आगे क्या

सुरक्षा बलों की तलाशी और छापेमारी अभियान जारी है। हिरासत में लिए गए 3,500 संदिग्ध OGW से पूछताछ कर आतंकी नेटवर्क की पूरी कड़ी उजागर करने की कोशिश की जा रही है। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब कश्मीर घाटी में पर्यटन और सामान्य जनजीवन को पटरी पर लाने के प्रयास जारी हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

500 OGW की एक साथ हिरासत एक असाधारण संख्या है — लेकिन असली सवाल यह है कि इनमें से कितनों पर ठोस आरोप साबित होंगे और कितनों को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया जाएगा। कश्मीर में बड़े पैमाने पर हिरासत का इतिहास रहा है जो अल्पकालिक दबाव तो बनाता है, लेकिन दीर्घकालिक नेटवर्क को तोड़ने में सीमित रहा है। TRF का उभार — एक जानबूझकर 'सेक्युलर' चेहरे वाला संगठन — यह दर्शाता है कि आतंकी ढाँचा पहचान से बचने के लिए खुद को ढाल रहा है, जो खुफिया तंत्र के लिए एक बड़ी चुनौती है। LeT के घरों को गिराना प्रतीकात्मक संदेश तो देता है, पर घाटी में OGW तंत्र की गहरी जड़ों को उखाड़ने के लिए दीर्घकालिक खुफिया-आधारित रणनीति अपरिहार्य है।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंतनाग में किस पुलिसकर्मी की हत्या हुई और कब?
23 जुलाई 2026 को अनंतनाग शहर में आतंकी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की हत्या कर दी गई। वे आर्म्ड पुलिस की तीसरी बटालियन में यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे और बडगाम जिले के बीरवाह के निवासी थे।
कश्मीर में 3,500 OGW हिरासत में क्यों लिए गए?
हेड कॉन्स्टेबल कुरैशी की हत्या के बाद सुरक्षा बलों ने घाटी में आतंकी सहायता नेटवर्क को तोड़ने के लिए व्यापक अभियान चलाया और 24 घंटों के भीतर लगभग 3,500 संदिग्ध ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGW) को हिरासत में लिया। OGW वे लोग होते हैं जो आतंकवादियों को लॉजिस्टिक और सूचना सहायता प्रदान करते हैं।
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) क्या है?
TRF एक आतंकी संगठन है जो 2019 में जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद लश्कर-ए-तैयबा और हिज्बुल मुजाहिदीन के कैडरों से बना। यह संगठन गैर-धार्मिक नाम अपनाकर सेक्युलर छवि बनाने की कोशिश करता है, लेकिन इस पर अल्पसंख्यक समुदायों के लोगों की लक्षित हत्याओं के आरोप हैं। लश्कर-ए-तैयबा संयुक्त राष्ट्र द्वारा घोषित आतंकी संगठन है।
अनंतनाग हमले के बाद सरकार ने क्या कदम उठाए?
हमले के बाद 24 घंटों में 3,500 OGW हिरासत में लिए गए, LeT से जुड़े दो आतंकवादियों के मकान गिराए गए और पूरी घाटी में तलाशी व छापेमारी अभियान जारी है। उप-राज्यपाल मनोज सिन्हा ने दोषियों को न्याय के कटघरे में लाने का संकल्प जताया है।
क्या इस तरह की बड़े पैमाने पर हिरासत पहले भी हुई है?
जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाओं के बाद बड़े पैमाने पर OGW हिरासत का इतिहास रहा है। हालाँकि, आलोचकों का कहना है कि ऐसी कार्रवाइयाँ अल्पकालिक दबाव तो बनाती हैं, लेकिन आतंकी नेटवर्क को स्थायी रूप से तोड़ने के लिए दीर्घकालिक खुफिया-आधारित रणनीति आवश्यक है।
राष्ट्र प्रेस
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