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अनंतनाग आतंकी हमले के बाद एलजी मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में हाई-लेवल सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की

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अनंतनाग आतंकी हमले के बाद एलजी मनोज सिन्हा ने श्रीनगर में हाई-लेवल सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की

सारांश

अनंतनाग के लाल चौक में हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की पॉइंट-ब्लैंक गोली मारकर हत्या के बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन हरकत में आया। एलजी सिन्हा ने हाई-लेवल बैठक बुलाई, पुलिस ने 3,000 से अधिक OGW हिरासत में लिए, और TRF ने हमले की जिम्मेदारी ली।

मुख्य बातें

हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को बुधवार दोपहर अनंतनाग के लाल चौक में पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारकर शहीद किया गया।
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने हमले की जिम्मेदारी ली; यह लश्कर-ए-तैयबा का छद्म संगठन है जो 2019 से सक्रिय है।
एलजी मनोज सिन्हा ने 23 जुलाई को श्रीनगर के लोक भवन में उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी में आतंकियों के 3,000 से अधिक ओवरग्राउंड वर्करों को हिरासत में लिया।
खराब मौसम के चलते अमरनाथ यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित; सुरक्षा समीक्षा जारी।
एलजी ने शहीद के परिजनों को न्याय दिलाने और दोषियों को जल्द सजा देने का संकल्प लिया।

जम्मू-कश्मीर के लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा ने गुरुवार, 23 जुलाई को श्रीनगर के लोक भवन में एक उच्चस्तरीय सुरक्षा बैठक की अध्यक्षता की, जो अनंतनाग के लाल चौक इलाके में हुए आतंकी हमले में हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की शहादत के ठीक एक दिन बाद आयोजित की गई। बैठक सुबह 11 बजे शुरू हुई, जिसमें सभी प्रमुख खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुख शामिल हुए।

मुख्य घटनाक्रम

बुधवार दोपहर अनंतनाग के लाल चौक इलाके में आतंकवादियों ने हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारकर शहीद कर दिया। इस कायराना हमले की जिम्मेदारी द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने ली है, जो लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक छद्म संगठन है और 2019 से लेट के नाम पर आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेता रहा है।

अधिकारियों के अनुसार, उच्चस्तरीय बैठक में एलजी को हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति और अमरनाथ यात्रा की मौजूदा स्थिति से अवगत कराया गया। खराब मौसम के कारण यात्रा अस्थायी रूप से स्थगित कर दी गई है।

सुरक्षा बलों की कार्रवाई

हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने त्वरित और व्यापक कार्रवाई करते हुए घाटी के अलग-अलग जिलों से आतंकवादियों के 3,000 से अधिक ओवरग्राउंड वर्करों (OGW) को हिरासत में लिया। हमलावरों की तलाश में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान भी शुरू किया है।

पुलिस ने संदिग्ध आतंकवादी की एक तस्वीर सार्वजनिक की है और आम नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्होंने इस व्यक्ति को देखा हो तो तत्काल सूचित करें।

एलजी की प्रतिक्रिया

हमले की कड़ी निंदा करते हुए एलजी मनोज सिन्हा ने संकल्प लिया कि हेड कांस्टेबल कुरैशी की शहादत के जिम्मेदार आतंकियों को जल्द से जल्द कठोर दंड दिया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कृत्य का बदला अवश्य लिया जाएगा।

शहीद को श्रद्धांजलि

हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की शहादत को सम्मान देने के लिए अनंतनाग जिला पुलिस लाइन में एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि समारोह आयोजित किया गया। उनके पैतृक बीरवाह इलाके में अंतिम संस्कार में सैकड़ों स्थानीय नागरिक उमड़ पड़े और शोकाकुल परिवार को सांत्वना देने के लिए घर पहुँचे।

क्या होगा आगे

यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमरनाथ यात्रा पूरे जोरों पर है और सुरक्षा बल पहले से उच्च सतर्कता पर हैं। गौरतलब है कि TRF पिछले कुछ वर्षों में घाटी में नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने वाले कई हमलों में संलिप्त रहा है। आने वाले दिनों में सुरक्षा ग्रिड को और कड़ा किए जाने की संभावना है, विशेष रूप से यात्रा मार्गों पर।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसका लक्ष्य सुरक्षा तंत्र को तीर्थयात्रियों की सुरक्षा और घाटी में काउंटर-ऑपरेशन के बीच बाँटना है। 3,000 से अधिक OGW की गिरफ्तारी दर्शाती है कि खुफिया नेटवर्क सक्रिय है, लेकिन सवाल यह है कि इतने बड़े ओवरग्राउंड समर्थन तंत्र के बावजूद हमला क्यों नहीं रोका जा सका। एलजी की 'बदला लेने' की भाषा राजनीतिक संकल्प दिखाती है, परंतु जवाबदेही और खुफिया विफलता की समीक्षा उतनी ही जरूरी है जितनी ऑपरेशनल प्रतिक्रिया।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अनंतनाग आतंकी हमले में क्या हुआ?
बुधवार दोपहर अनंतनाग के लाल चौक इलाके में आतंकवादियों ने हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी को पॉइंट-ब्लैंक रेंज से गोली मारकर शहीद कर दिया। द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी ली है।
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) क्या है?
TRF लश्कर-ए-तैयबा (LeT) का एक छद्म संगठन है, जो 2019 से सक्रिय है और LeT द्वारा किए गए आतंकी हमलों की जिम्मेदारी लेता रहा है। यह संगठन जम्मू-कश्मीर में नागरिकों और सुरक्षाकर्मियों को निशाना बनाने वाले कई हमलों में संलिप्त रहा है।
एलजी मनोज सिन्हा ने हमले के बाद क्या कदम उठाए?
एलजी मनोज सिन्हा ने 23 जुलाई को श्रीनगर के लोक भवन में सभी प्रमुख खुफिया और सुरक्षा एजेंसियों के प्रमुखों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने हमले की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को जल्द सजा दिलाने का संकल्प लिया।
अमरनाथ यात्रा पर इस हमले का क्या असर पड़ा?
खराब मौसम के कारण अमरनाथ यात्रा पहले से ही अस्थायी रूप से स्थगित थी। हमले के बाद सुरक्षा बैठक में यात्रा की सुरक्षा स्थिति की भी समीक्षा की गई और सुरक्षा ग्रिड को और कड़ा किए जाने की तैयारी है।
हमले के बाद जम्मू-कश्मीर पुलिस ने क्या कार्रवाई की?
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने घाटी के अलग-अलग जिलों से आतंकियों के 3,000 से अधिक ओवरग्राउंड वर्करों को हिरासत में लिया। इसके साथ ही हमलावरों की तलाश में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया जा रहा है और संदिग्ध की तस्वीर जारी कर जनता से सहयोग माँगा गया है।
राष्ट्र प्रेस
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