उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने बडगाम में शहीद हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी के परिवार से मुलाकात की
सारांश
मुख्य बातें
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने शुक्रवार, 25 जुलाई को बडगाम जिले के बीरवाह स्थित ललपोरा गाँव पहुँचकर शहीद हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी के परिजनों से मुलाकात की और उनके प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की। हेड कांस्टेबल कुरैशी ने 22 जुलाई को दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग में हुए एक आतंकी हमले के दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया था।
शहीद का परिचय और बलिदान
हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी जम्मू-कश्मीर पुलिस की तीसरी बटालियन, इंडियन रिजर्व पुलिस में तैनात थे। 22 जुलाई को अनंतनाग में हुए कायराना आतंकी हमले के दौरान उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी। यह हमला उस समय हुआ जब सुरक्षाबल आतंकियों के विरुद्ध अभियान में संलग्न थे।
उपराज्यपाल की संवेदना और संदेश
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने परिवार से मिलकर कहा कि शहीद जवान का साहस, कर्तव्यनिष्ठा और सर्वोच्च बलिदान हमेशा देशवासियों को प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, 'शहीद हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी का साहस और बलिदान हमेशा हमें प्रेरित करता रहेगा। पूरा देश उनके कर्तव्य के प्रति समर्पण को सलाम करता है और इस कठिन समय में उनके परिवार के साथ मजबूती से खड़ा है।'
सिन्हा ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारतीय सेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल आतंकवाद के पूरे नेटवर्क को समाप्त करने के अभियान में निरंतर जुटे हुए हैं।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की प्रतिक्रिया
हमले के दिन ही 22 जुलाई को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी एक्स पर शोक व्यक्त करते हुए लिखा था कि ड्यूटी के दौरान हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन की शहादत की खबर से उन्हें गहरा दुख पहुँचा है। उन्होंने अनंतनाग में हुए इस आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की और शहीद के परिवार के प्रति गहरी संवेदना जताई।
आतंकवाद-विरोधी अभियान का व्यापक संदर्भ
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब जम्मू-कश्मीर में सुरक्षाबल आतंकियों के विरुद्ध लगातार अभियान चला रहे हैं। गौरतलब है कि घाटी में हाल के महीनों में आतंकी गतिविधियों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिसके मद्देनजर बलों की तैनाती और गश्त को और सघन किया गया है।
उपराज्यपाल सिन्हा ने विश्वास जताया कि शहीद आशिक हुसैन कुरैशी का बलिदान और मातृभूमि के प्रति उनका प्रेम एक शांतिपूर्ण, समृद्ध और विकसित जम्मू-कश्मीर के निर्माण की दिशा में सदैव मार्गदर्शन करता रहेगा।