महाकालेश्वर मंदिर में भाजपा सांसद मनोज तिवारी ने की पूजा, देश की खुशहाली की माँगी दुआ
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के सांसद मनोज तिवारी ने 7 अगस्त 2026 को अपने परिवार के साथ उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकालेश्वर मंदिर में भगवान महाकाल के दर्शन किए। इस दौरान उन्होंने विधि-विधान से पूजा-अर्चना व जलाभिषेक किया और देश की सुख-समृद्धि तथा नागरिकों के कल्याण की प्रार्थना की।
दर्शन और आध्यात्मिक अनुभव
दर्शन के पश्चात तिवारी ने अपनी भावनाएँ साझा करते हुए कहा, 'बड़ा आनंद है, हमने महाकाल के दर्शन किए हैं। महाकाल भस्म के लिए प्रसिद्ध हैं और हमें भस्म भी लगाने का सौभाग्य मिला। हमने जलधारा अर्पित की। सब कुछ बेहद दिव्य रहा।' उन्होंने कहा कि महाकाल की नगरी में आकर मन अत्यंत प्रसन्न हो गया और उन्होंने सभी श्रद्धालुओं पर भगवान का आशीर्वाद बने रहने की कामना की।
देश की प्रगति के लिए प्रार्थना
तिवारी ने कहा कि उनकी सबसे बड़ी प्रार्थना यही है कि महाकाल की कृपा देश पर बनी रहे, भारत निरंतर प्रगति करे और देशवासी सदैव खुशहाल रहें। उन्होंने यह भी कहा कि जो श्रद्धालु मंदिर आकर दर्शन करें या दूर से ही श्रद्धापूर्वक प्रणाम करें, सभी पर भगवान महाकाल की कृपा बनी रहे।
कांवड़ यात्रा विवाद पर तीखी प्रतिक्रिया
मंदिर दर्शन के दौरान पत्रकारों ने मौलाना साजिद रशीदी के कांवड़ यात्रा संबंधी विवादित बयान पर तिवारी की राय माँगी। तिवारी ने कहा कि इस प्रकार की सोच 'राक्षसी प्रवृत्ति' को दर्शाती है। उन्होंने पौराणिक संदर्भ देते हुए कहा, 'महादेव को भी अनेक राक्षसों का संहार करना पड़ा था — हर युग में राक्षस रहे हैं।' उनके अनुसार, जो लोग कांवड़ियों पर सवाल उठाते हैं या उनके बारे में अपमानजनक बयान देते हैं, वे उसी प्रवृत्ति के हैं।
सभी धर्मों के सम्मान की अपील
इसके साथ ही तिवारी ने सभी धर्मों और आस्थाओं के परस्पर सम्मान की अपील भी की। उन्होंने स्पष्ट किया कि भगवान महाकाल का संदेश किसी की आस्था का अपमान करना नहीं है। उन्होंने कहा, 'प्रत्येक व्यक्ति को अपने धर्म और पंथ का पालन करने का पूरा अधिकार है, लेकिन कांवड़ यात्रा जैसी धार्मिक परंपराओं का अनादर नहीं होना चाहिए।' उनके अनुसार, दूसरों की धार्मिक आस्था के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग समाज में सौहार्द को कमज़ोर करता है।
यह दौरा ऐसे समय में आया है जब कांवड़ यात्रा को लेकर देश में राजनीतिक बहस तेज़ है। तिवारी का उज्जैन प्रवास धार्मिक आस्था और समसामयिक राजनीतिक विमर्श दोनों को एक साथ छूता है।