मथुरापुर लोकसभा की 7 विधानसभा सीटों पर टीएमसी का प्रभाव, भाजपा ने पिछली बार दी थी कड़ी चुनौती
सारांश
Key Takeaways
- मथुरापुर लोकसभा क्षेत्र में टीएमसी का प्रभाव है।
- भाजपा ने पिछले चुनावों में कुछ सीटों पर चुनौती दी।
- मछुआरा समुदाय और दलित मतदाताओं की बड़ी संख्या है।
- पथरप्रतिमा और काकद्वीप जैसे क्षेत्र महत्वपूर्ण हैं।
- 2024 के चुनावों में दिलचस्प मुकाबला देखने को मिल सकता है।
कोलकाता, 14 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेजी से चल रही हैं। चुनाव आयोग और सभी राजनीतिक दल चुनाव की तैयारियों में जुटे हुए हैं और वोटर्स को अपने पक्ष में लाने के लिए प्रयासरत हैं। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल का दौरा कर चुनाव की स्थिति का आकलन किया है। आइए जानते हैं कि दक्षिण 24 परगना जिले के अंतर्गत मथुरापुर लोकसभा की 7 विधानसभा सीटों का क्या हाल है।
मथुरापुर लोकसभा क्षेत्र वर्तमान में टीएमसी का एक मजबूत गढ़ बना हुआ है। यहां की सभी 7 विधानसभा सीटों पर इस पार्टी का प्रमुख प्रभाव है। इस क्षेत्र में मछुआरा समुदाय, दलित और ग्रामीण मतदाता अच्छी खासी संख्या में हैं। भाजपा ने 2019 और 2024 के चुनावों में अपने प्रदर्शन में सुधार किया, लेकिन तृणमूल कांग्रेस से काफी पीछे रही। वामपंथी सीपीआईएम और कांग्रेस का प्रभाव न्यूनतम हो गया है।
मथुरापुर लोकसभा में पथरप्रतिमा, काकद्वीप, सागर, कुलपी, रायदीघी, मंदिरबाजार (आरक्षित) और मगरहाट पश्चिम विधानसभा सीटें शामिल हैं। वर्तमान में इन सभी सीटों पर ममता बनर्जी की पार्टी अखिल भारतीय तृणमूल कांग्रेस का कब्जा है। पिछले चुनाव में भाजपा कुछ सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी।
पथरप्रतिमा विधानसभा सीट को तृणमूल कांग्रेस का गढ़ माना जाता है, क्योंकि पिछले तीन विधानसभा चुनावों से यहां तृणमूल कांग्रेस के समीर कुमार जाना विजेता बने हैं।
काकद्वीप विधानसभा सीट भी तृणमूल कांग्रेस का गढ़ है। पिछले तीन चुनावों से एआईटीसी के मंतुरम पखीरा लगातार जीत रहे हैं। मंतुरम ने 2021 में भाजपा के प्रत्याशी को लगभग 25 हजार वोटों से हराया था।
सागर विधानसभा सीट दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित है और यह राज्य की महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों में से एक है। 2011 विधानसभा चुनाव से लगातार एआईटीसी के बंकिम चंद्र हजारा चुनाव जीतते आ रहे हैं। पिछले चुनाव में भाजपा के बिकास कामिला को लगभग 30 हजार वोटों से हराया था। वहीं, 2011 और 2016 में सीपीआई (एम) के प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की थी।
रायदीघी विधानसभा सीट सुंदरबन क्षेत्र में आती है। यह क्षेत्र नदियों, द्वीपों, दलदली भूमि और मछली पालन के लिए जाना जाता है। 2021 के विधानसभा चुनाव में यहां लगभग 2.6 लाख मतदाता थे। यह क्षेत्र मछुआरा, दलित, हिंदू और कुछ मुस्लिम आबादी का मिश्रण है। मछली पालन, कृषि, नाव परिवहन और पर्यटन (सुंदरबन) यहां के मुख्य आय का साधन हैं। इस सीट से भी तृणमूल कांग्रेस के प्रत्याशी लगातार तीन बार जीतते आ रहे हैं। 2021 में अलोक जनलदाता ने भाजपा को हराकर जीत हासिल की थी। इसके पहले दोनों चुनाव में एआईटीसी की देबश्री राय विधायक रही थीं।
मंदिरबाजार एक अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित विधानसभा सीट है। 1977 में बनी इस सीट में मथुरापुर I ब्लॉक की दक्षिण लक्ष्मीनारायणपुर, मथुरापुर पश्चिम, मथुरापुर पूर्व और उत्तर लक्ष्मीनारायणपुर ग्राम पंचायतें शामिल हैं। अभी तक यहां तक 10 विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। शुरुआती वर्षों में लेफ्ट पार्टियों का दबदबा रहा, जिसमें सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ इंडिया (कम्युनिस्ट) ने 1977 में पहला चुनाव जीता था। इसके बाद सीपीआई (एम) ने लगातार चार बार जीत हासिल की। 2021 से तृणमूल कांग्रेस का यहां दबदबा है। टीएमसी से जॉयदेब हल्दर लगातार तीन बार से विधायक हैं, पिछली बार भाजपा के संचय कुमार सरकार को हराकर जीत हासिल की थी।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में स्थित मगरहाट पश्चिम एक सामान्य श्रेणी का विधानसभा क्षेत्र है।
मगरहाट विधानसभा क्षेत्र का गठन 1951 में हुआ था और 1952 और 1957 में हुए पहले दो चुनावों में यह दो सीटों वाला निर्वाचन क्षेत्र था, जिसमें कांग्रेस ने सभी चार सीटें जीती थीं। 1962 के चुनावों से मगरहाट निर्वाचन क्षेत्र को मगरहाट पूर्व और मगरहाट पश्चिम निर्वाचन क्षेत्रों में विभाजित कर दिया गया था।
तब से हुए 15 चुनावों में भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) ने छह जीत दर्ज की। कांग्रेस पार्टी और उससे निकली दो पार्टियों, बांग्ला कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस ने तीन-तीन बार जीत हासिल की है।
तृणमूल कांग्रेस 2011 के बाद लगातार यह सीट जीतते आ रही है। पिछले तीन चुनावों से गयासुद्दीन मोल्ला तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर रहे हैं। मगरहाट पश्चिम में 2024 में 238,944 रजिस्टर्ड वोटर थे, जो 2021 में 229,437, 2019 में 214,381, 2016 में 201,242 और 2011 में 169,168 थे।