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वंदे मातरम पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी: 'आजादी की प्रेरणा थी, मदरसों में जबरदस्ती न हो'

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वंदे मातरम पर मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी: 'आजादी की प्रेरणा थी, मदरसों में जबरदस्ती न हो'

सारांश

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 'वंदे मातरम' को आजादी की विरासत माना, लेकिन मदरसों में इसे थोपने का विरोध किया। यूपी मंत्री राजभर के अनिवार्यता के संकेत के बाद यह बयान मध्यमार्गी स्वर के रूप में सामने आया है।

मुख्य बातें

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 24 मई 2026 को बरेली में कहा कि 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता संग्राम की प्रेरणा था, पर इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए।
यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने मदरसों में 'वंदे मातरम' गान अनिवार्य करने का संकेत दिया था।
मौलाना ने कहा — जो पढ़ना चाहे पढ़े, जो न पढ़ना चाहे उस पर कोई दबाव न हो ; धार्मिक संस्थाओं में भावनाओं और स्वतंत्रता का सम्मान ज़रूरी।
28 मई को बकरीद पर कुर्बानी को लेकर फैल रही अफवाहों को मौलाना ने खारिज किया — कोई आधिकारिक पाबंदी नहीं है।
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से अभी तक कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 24 मई 2026 को बरेली में स्पष्ट किया कि 'वंदे मातरम' स्वतंत्रता संग्राम के दौरान देशवासियों में राष्ट्रप्रेम और संघर्ष की भावना जगाने वाला प्रेरणा-गीत था, परंतु इसे किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए। उनकी यह प्रतिक्रिया उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर के उस बयान के बाद आई, जिसमें राजभर ने मदरसों में 'वंदे मातरम' गान अनिवार्य करने का संकेत दिया था।

मौलाना का मुख्य बयान

मौलाना रजवी ने कहा कि 'वंदे मातरम' का ऐतिहासिक महत्व निर्विवाद है — यह केवल एक गीत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों के लिए संघर्ष का संबल था। उन्होंने कहा, 'जिसे वंदे मातरम पढ़ना हो, वह पढ़े; जिसे न पढ़ना हो, उस पर कोई दबाव नहीं होना चाहिए।' उनके अनुसार धार्मिक और शैक्षणिक संस्थानों में लोगों की भावनाओं एवं स्वतंत्रता का सम्मान अनिवार्य है।

ओमप्रकाश राजभर का रुख

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा था कि अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अंतर्गत मदरसों में भी 'वंदे मातरम' गान की व्यवस्था लागू की जाएगी। राजभर ने कहा था, 'हम मदरसों के बच्चों को बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और भाईचारे की दिशा में ले जाना चाहते हैं — इसमें क्या बुराई है?' यह बयान उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा सुधार की व्यापक बहस के बीच आया है।

बकरीद और कुर्बानी पर अफवाहों का खंडन

मौलाना रजवी ने 28 मई को मनाई जाने वाली बकरीद के संदर्भ में भी स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि कुर्बानी की परंपरा सदियों पुरानी इस्लामी रिवायत है। उन्होंने उन अफवाहों को सिरे से खारिज किया जिनमें दावा किया जा रहा है कि भारत में कुर्बानी पर पाबंदी या सीमाएं लगाई गई हैं — उनके अनुसार ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं है।

व्यापक संदर्भ

यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार मदरसा शिक्षा में सुधार और मुख्यधारा पाठ्यक्रम के समावेश को लेकर सक्रिय है। गौरतलब है कि 'वंदे मातरम' को लेकर धार्मिक संस्थाओं में अनिवार्यता बनाम स्वैच्छिकता की बहस देश में नई नहीं है — सर्वोच्च न्यायालय भी इस विषय पर पूर्व में अपनी राय दे चुका है। मौलाना रजवी का बयान एक मध्यमार्गी स्वर के रूप में सामने आया है जो गीत के ऐतिहासिक महत्व को स्वीकार करते हुए जबरदस्ती का विरोध करता है।

आगे की स्थिति

अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से मदरसों में 'वंदे मातरम' गान की अनिवार्यता संबंधी कोई औपचारिक अधिसूचना अभी तक जारी नहीं हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस विषय पर किसी भी नीतिगत निर्णय से पहले धार्मिक संस्थाओं और समुदाय के प्रतिनिधियों से व्यापक संवाद आवश्यक होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या 'स्वैच्छिकता बनाम अनिवार्यता' की यह बहस केवल एक गीत तक सीमित है या मदरसा शिक्षा की स्वायत्तता पर बड़े नीतिगत दबाव का संकेत है। राजभर का बयान विभागीय शक्ति के हवाले से आया — यह महज़ सांस्कृतिक अपील नहीं, प्रशासनिक इरादे का इशारा है। इतिहास गवाह है कि ऐसे 'सुझाव' धीरे-धीरे आदेश बन जाते हैं। बिना स्पष्ट कानूनी ढाँचे और सामुदायिक सहमति के किसी भी धार्मिक संस्था में इस तरह के बदलाव लागू करना संविधान के अनुच्छेद 30 के तहत अल्पसंख्यक संस्थाओं के अधिकारों पर सवाल खड़े करता है।
RashtraPress
9 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने वंदे मातरम पर क्या कहा?
मौलाना ने कहा कि 'वंदे मातरम' आजादी के आंदोलन में स्वतंत्रता सेनानियों की प्रेरणा था और इसका ऐतिहासिक महत्व है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि इसे किसी पर — विशेषकर मदरसों में — जबरदस्ती नहीं थोपा जाना चाहिए।
ओमप्रकाश राजभर ने मदरसों में वंदे मातरम को लेकर क्या कहा था?
यूपी के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने एक मीडिया साक्षात्कार में कहा था कि उनके विभाग के अंतर्गत आने वाले मदरसों में भी 'वंदे मातरम' गान की व्यवस्था लागू की जाएगी। उन्होंने इसे बच्चों को बेहतर शिक्षा और भाईचारे की दिशा में ले जाने की पहल बताया।
क्या उत्तर प्रदेश के मदरसों में वंदे मातरम अनिवार्य हो गया है?
अभी तक अल्पसंख्यक कल्याण विभाग की ओर से कोई औपचारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है। मंत्री राजभर का बयान इरादे का संकेत था, लेकिन कोई आधिकारिक आदेश सामने नहीं आया है।
बकरीद पर कुर्बानी-पाबंदी की अफवाहें क्यों फैल रही हैं?
मौलाना रजवी के अनुसार कुछ लोग यह गलत जानकारी फैला रहे हैं कि भारत में कुर्बानी पर पाबंदी लगाई गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं है और 28 मई को बकरीद पर कुर्बानी की सदियों पुरानी इस्लामी परंपरा जारी रहेगी।
धार्मिक संस्थाओं में वंदे मातरम की अनिवार्यता का कानूनी पक्ष क्या है?
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 30 अल्पसंख्यक समुदायों को अपनी शैक्षणिक संस्थाएं स्थापित करने और चलाने का अधिकार देता है। विशेषज्ञों के अनुसार बिना स्पष्ट कानूनी आधार के किसी धार्मिक संस्था पर ऐसी अनिवार्यता थोपना इस अधिकार को चुनौती दे सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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