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भारतीय वायु सेना का बड़ा कदम: 'मेहर बाबा प्रतियोगिता-3' से मिलेगी ड्रोन-रडार टेक्नोलॉजी को नई उड़ान

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भारतीय वायु सेना का बड़ा कदम: 'मेहर बाबा प्रतियोगिता-3' से मिलेगी ड्रोन-रडार टेक्नोलॉजी को नई उड़ान

सारांश

भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी ड्रोन-रडार तकनीक को बढ़ावा देने के लिए 'मेहर बाबा प्रतियोगिता-3' (MBC-3) लॉन्च की है। पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। पिछले दो संस्करणों से ₹2000 करोड़ के ऑर्डर मिले थे।

मुख्य बातें

भारतीय वायु सेना ने मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 (एमबीसी-3) की घोषणा की, जिसके लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगा।
इस वर्ष प्रतियोगिता की थीम 'कोलैबोरेटिव ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस रडार्स' है, जो एकीकृत ड्रोन-रडार नेटवर्क विकास पर केंद्रित है।
चयनित प्रतिभागियों को वित्तीय सहायता और शीर्ष तीन टीमों को विशेष पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।
पिछले दो संस्करणों से देश में ₹2000 करोड़ के रक्षा ऑर्डर उत्पन्न हुए और एक सशक्त स्वदेशी पारिस्थितिकी तंत्र बना।
प्रतियोगिता की घोषणा एयरो इंडिया 2025 में रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा की गई थी।
यह प्रतियोगिता 2018 में शुरू हुई और प्रथम महावीर चक्र विजेता एयर कमोडोर मेहर सिंह के नाम पर समर्पित है।

नई दिल्ली: भारतीय वायु सेना ने स्वदेशी रक्षा तकनीक को नई ऊंचाई देने के लिए 'मेहर बाबा प्रतियोगिता-3' (एमबीसी-3) की आधिकारिक शुरुआत कर दी है। यह प्रतियोगिता देश में ड्रोन और रडार टेक्नोलॉजी के एकीकृत विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल मानी जा रही है। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता के लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से प्रारंभ होगा।

एमबीसी-3 की थीम और तकनीकी लक्ष्य

इस वर्ष एमबीसी-3 की थीम 'कोलैबोरेटिव ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस रडार्स' रखी गई है। इस थीम के अंतर्गत ऐसी अत्याधुनिक प्रणाली विकसित करने का लक्ष्य है जिसमें एकाधिक मानव रहित हवाई प्रणालियां (UAS) समवेत रूप से कार्य करते हुए एक संपूर्ण हवाई रडार नेटवर्क का निर्माण करें।

यह ड्रोन स्वॉर्म प्रणाली हवाई लक्ष्यों की पहचान, उनकी ट्रैकिंग और सटीक लोकेशन को वास्तविक समय (Real-Time) में एक केंद्रीकृत निगरानी केंद्र तक प्रेषित करने में सक्षम होगी। विशेष रूप से यह तकनीक विरोधी और चुनौतीपूर्ण वातावरण में भी प्रभावी रूप से काम करने के लिए तैयार की जाएगी — जो इसे आधुनिक युद्ध की वास्तविक जरूरतों के अनुकूल बनाती है।

प्रतियोगिता के मुख्य उद्देश्य

भारतीय वायु सेना के अनुसार एमबीसी-3 के चार प्रमुख उद्देश्य हैं। पहला — स्वदेशी स्तर पर उन्नत रक्षा तकनीकों का विकास करना। दूसरा — ड्रोन और रडार के एकीकृत उपयोग की नई संभावनाएं तलाशना। तीसरा — उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमिक संस्थानों को रक्षा क्षेत्र से जोड़ना। चौथा — भविष्य की युद्ध आवश्यकताओं के लिए स्मार्ट और किफायती समाधान तैयार करना।

यह प्रतियोगिता एक प्रूफ ऑफ कॉन्सेप्ट (PoC) तैयार करने पर केंद्रित है, जिसे भविष्य में वास्तविक सैन्य उपयोग में परिवर्तित किया जा सके। यह दृष्टिकोण भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति के अनुरूप है।

कौन ले सकता है भाग — पुरस्कार और वित्तीय सहायता

भारतीय वायु सेना ने इस प्रतियोगिता में देश के रक्षा एवं तकनीकी उद्योग, स्टार्ट-अप, शैक्षणिक संस्थान तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) संगठनों को आमंत्रित किया है। प्रतिभागी आधिकारिक 'विजन डॉक्यूमेंट' के माध्यम से तकनीकी आवश्यकताओं और दिशा-निर्देशों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

चयनित प्रतिभागियों को भारतीय वायु सेना की ओर से विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। इसके अतिरिक्त, श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली शीर्ष तीन टीमों को आकर्षक पुरस्कार और विशेष सम्मान से नवाजा जाएगा। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रतिभागियों को नवाचार के लिए प्रेरित करना और उनके विचारों को वास्तविक उत्पाद में ढालने का अवसर देना है।

पिछले संस्करणों की सफलता और ₹2000 करोड़ के ऑर्डर

मेहर बाबा प्रतियोगिता का पहला संस्करण आपदा राहत और मानवीय सहायता के लिए स्वॉर्म ड्रोन पर केंद्रित था, जबकि दूसरा संस्करण हवाई पट्टियों पर अज्ञात वस्तुओं या मलबे की पहचान के लिए ड्रोन प्रणाली पर आधारित था।

इन दोनों संस्करणों को उद्योग, स्टार्ट-अप और अकादमिक जगत से अभूतपूर्व प्रतिक्रिया मिली। इनके परिणामस्वरूप देश में मानव रहित प्रणालियों के क्षेत्र में एक सशक्त पारिस्थितिकी तंत्र विकसित हुआ और लगभग ₹2000 करोड़ के ऑर्डर सृजित हुए — जो इस पहल की व्यावसायिक और रणनीतिक सफलता का प्रमाण है।

उल्लेखनीय है कि एमबीसी-3 की घोषणा सर्वप्रथम एयरो इंडिया 2025 के दौरान रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ द्वारा की गई थी। साल 2018 में शुरू हुई यह प्रतियोगिता आज आत्मनिर्भर भारत के रक्षा क्षेत्र में नवाचार का सबसे प्रतिष्ठित मंच बन चुकी है।

मेहर बाबा — एक अमर वायु योद्धा की विरासत

इस प्रतियोगिता का नाम महान वायु योद्धा और प्रथम महावीर चक्र विजेता एयर कमोडोर मेहर सिंह के सम्मान में रखा गया है, जिन्हें स्नेह से 'मेहर बाबा' कहा जाता था। उनका जन्म 1915 में लायलपुर (वर्तमान पाकिस्तान) में हुआ था और उन्होंने 1934 में रॉयल एयर फोर्स कॉलेज, क्रैनवेल से प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उनकी असाधारण उड़ान क्षमता और नेतृत्व कौशल ने उन्हें अल्पायु में ही राष्ट्रीय ख्याति दिलाई। उन्होंने अत्यंत विकट परिस्थितियों में कई ऐतिहासिक सैन्य मिशनों का सफलतापूर्वक नेतृत्व किया। उनके नाम पर यह प्रतियोगिता आयोजित कर वायु सेना न केवल उन्हें श्रद्धांजलि देती है, बल्कि उनकी साहसिक भावना को भावी पीढ़ी तक पहुंचाती है।

27 अप्रैल 2026 से पंजीकरण प्रारंभ होने के साथ ही देशभर के इनोवेटर्स, स्टार्ट-अप और शोधकर्ताओं के लिए भारतीय वायु सेना के साथ मिलकर भविष्य की रक्षा तकनीक गढ़ने का एक सुनहरा अवसर उपलब्ध होगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भारत की रक्षा आत्मनिर्भरता की रणनीतिक यात्रा का अगला पड़ाव है। जब पड़ोसी देश ड्रोन युद्ध में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, तब वायु सेना का यह कदम समय की मांग के अनुरूप है। ₹2000 करोड़ के पिछले ऑर्डर यह सिद्ध करते हैं कि यह प्रतियोगिता कागजी नहीं, परिणाम देने वाली पहल है। असली सवाल यह है कि क्या भारत का स्टार्ट-अप और अकादमिक इकोसिस्टम इस अवसर को उस गति से भुना पाएगा, जितनी तेजी से वैश्विक ड्रोन युद्ध की तकनीक बदल रही है।
RashtraPress
1 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 (एमबीसी-3) क्या है?
एमबीसी-3 भारतीय वायु सेना द्वारा आयोजित एक प्रतिष्ठित रक्षा तकनीक प्रतियोगिता है जिसका उद्देश्य स्वदेशी ड्रोन और रडार प्रणालियों का विकास करना है। इस वर्ष इसकी थीम 'कोलैबोरेटिव ड्रोन-बेस्ड सर्विलांस रडार्स' है।
एमबीसी-3 के लिए पंजीकरण कब से शुरू होगा?
मेहर बाबा प्रतियोगिता-3 के लिए पंजीकरण 27 अप्रैल 2026 से शुरू होगा। इच्छुक प्रतिभागी आधिकारिक 'विजन डॉक्यूमेंट' के माध्यम से विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
इस प्रतियोगिता में कौन भाग ले सकता है?
भारतीय वायु सेना ने रक्षा उद्योग, स्टार्ट-अप, शैक्षणिक संस्थान और R&D संगठनों को इस प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है। चयनित प्रतिभागियों को वित्तीय सहायता और शीर्ष तीन टीमों को पुरस्कार भी मिलेगा।
पिछले मेहर बाबा प्रतियोगिता संस्करणों का क्या परिणाम रहा?
पहले दो संस्करणों ने देश में मानव रहित प्रणालियों का एक मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया और लगभग ₹2000 करोड़ के ऑर्डर सृजित हुए। यह प्रतियोगिता 2018 में शुरू हुई थी।
मेहर बाबा प्रतियोगिता का नाम किसके सम्मान में रखा गया है?
यह प्रतियोगिता प्रथम महावीर चक्र विजेता एयर कमोडोर मेहर सिंह के सम्मान में रखी गई है, जिन्हें 'मेहर बाबा' कहा जाता था। उनका जन्म 1915 में लायलपुर (अब पाकिस्तान) में हुआ था।
राष्ट्र प्रेस
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