शिलांग में पोलो वेंडर्स मार्केट: CM कॉनराड संगमा ने 132 स्टॉल वाले बाज़ार का निरीक्षण किया, वेंडर्स से माँगा सहयोग
सारांश
मुख्य बातें
मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने 12 अगस्त 2026 को शिलांग के नवनिर्मित पोलो वेंडर्स मार्केट का दौरा कर सड़क किनारे सामान बेचने वाले विक्रेताओं के पुनर्वास की प्रगति का जायज़ा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि शहर में सुरक्षित और समावेशी सार्वजनिक स्थान बनाने के लिए वेंडर्स, आम जनता और सरकार — तीनों का मिलकर काम करना अनिवार्य है।
मुख्यमंत्री ने क्या कहा
बाज़ार का निरीक्षण करने और वेंडर्स से सीधी बातचीत के बाद संगमा ने कहा कि इस पुनर्वास पहल का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 'आम लोग आसानी से चल-फिर सकें' और साथ ही विक्रेताओं की आजीविका भी सुरक्षित रहे। उन्होंने वेंडर्स से अपील की: 'हम सभी के लिए एक साथ आगे बढ़ने और एक समाज के तौर पर तरक्की करने का यह सबसे अच्छा तरीका है।' संगमा ने यह भी स्वीकार किया कि जगह बदलने से विक्रेताओं के सामने चुनौतियाँ आ सकती हैं, लेकिन उनका मानना है कि आपसी सहयोग से ही समाधान निकाला जा सकता है।
पोलो वेंडर्स मार्केट की संरचना
यह बाज़ार 2,270 वर्ग मीटर क्षेत्र में बनाया गया है, जिसमें वेंडिंग क्षेत्र 620 वर्ग मीटर में विस्तृत है। कुल 132 स्टॉल बनाए गए हैं — इनमें से 48 स्टॉल पोलो क्षेत्र से हटाए गए विक्रेताओं के लिए और 84 स्टॉल जेल रोड से विस्थापित वेंडर्स के लिए आरक्षित हैं। अब तक 72 वेंडर्स अपने आवंटित स्टॉल पर काबिज़ हो चुके हैं। बाज़ार में शौचालय, एलईडी लाइटिंग, हैलोजन लैंप जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाएँ उपलब्ध हैं। सब्जी, फल, कपड़े, फास्ट फूड, मछली और चिकन विक्रेताओं के लिए अलग-अलग तय जगहें निर्धारित की गई हैं।
वेंडर्स को मिलने वाली आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री शहरी आजीविका अनुदान (CM ULG) के अंतर्गत वैध 'सर्टिफिकेट ऑफ वेंडिंग (COV)' धारक विक्रेता ₹20,000 की सहायता के पात्र हैं। इसमें ₹10,000 का तत्काल भुगतान और उसके बाद पाँच महीनों तक प्रतिमाह ₹2,000 की किस्त शामिल है। एसबीआई के सामने वाले वेंडिंग ज़ोन के लिए 65 COV जारी किए गए हैं, जबकि मातृ मंदिर के निकट वाले ज़ोन के लिए 106 COV जारी किए गए हैं।
कानूनी और नीतिगत ढाँचा
यह पुनर्वास कार्य 'मेघालय स्ट्रीट वेंडर्स (आजीविका की सुरक्षा और स्ट्रीट वेंडिंग का नियमन) योजना, 2023' के तहत संचालित हो रहा है। सरकार का लक्ष्य पैदल यात्रियों की आवाजाही सुगम बनाना, ट्रैफिक जाम घटाना और व्यस्त व्यावसायिक क्षेत्रों में सुरक्षित सार्वजनिक स्थान विकसित करना है। संगमा ने संकेत दिया कि जैसे-जैसे शहरी पुनर्वास की यह मुहिम आगे बढ़ेगी, अन्य इलाकों के विक्रेताओं को भी इसी तरह की सहायता प्रदान की जा सकती है।
आगे की राह
गौरतलब है कि शिलांग जैसे पहाड़ी शहरों में सड़क किनारे अतिक्रमण और यातायात की समस्या लंबे समय से चुनौती बनी हुई है। यह पहल ऐसे समय में आई है जब देश के कई राज्य स्ट्रीट वेंडर्स को औपचारिक ढाँचे में लाने की कोशिश कर रहे हैं। शेष 60 स्टॉल के आवंटन की प्रक्रिया जारी है, और सरकार की नज़र इस मॉडल को शिलांग के अन्य व्यावसायिक क्षेत्रों में भी लागू करने पर है।