खाड़ी संकट के बीच भारतीय ऑटो सेक्टर की स्थिति: उत्पादन पर कोई असर नहीं, लेकिन संभावित समस्याएं
सारांश
Key Takeaways
- खाड़ी संकट के कारण सप्लाई चेन में दिक्कतें हो सकती हैं।
- महिंद्रा, मारुति, टाटा और किआ का उत्पादन सुरक्षित है।
- गैस सप्लाई की कमी से लागत बढ़ सकती है।
- कंपनियों को अपने सप्लायर्स के साथ संपर्क बनाए रखना चाहिए।
- आगामी हफ्ते ऑटो सेक्टर के लिए महत्वपूर्ण होंगे।
नई दिल्ली, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। खाड़ी क्षेत्र में चल रहे संघर्ष के चलते भारत की ऑटोमोबाइल उद्योग को निकट भविष्य में सप्लाई संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। जबकि अभी तक इसका प्रत्यक्ष प्रभाव फैक्ट्रियों पर नहीं पड़ा है, विशेषज्ञों का कहना है कि यदि स्थिति इसी प्रकार बनी रही, तो चार से छह हफ्तों के भीतर असर दिखना शुरू हो सकता है।
उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, सबसे बड़ी चिंता गैस सप्लाई को लेकर है, क्योंकि कई मैन्युफैक्चरिंग प्रक्रियाओं में गैस की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। कमर्शियल एलपीजी और अन्य औद्योगिक गैसें पेंट शॉप, कास्टिंग यूनिट और फोर्जिंग जैसे कार्यों में आवश्यक हैं। यदि इनकी कमी बनी रहती है, तो कच्चे माल की लागत बढ़ सकती है।
एनडीटीवी प्रॉफिट की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो सेक्टर से संबंधित कई सप्लायर्स ने पहले ही मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण डिलीवरी में देरी की समस्या की जानकारी दी है। खास तौर पर कतर से गैस सप्लाई लगभग बंद हो गई है, क्योंकि वहां ईरान के मिसाइल और ड्रोन हमलों से उत्पादन प्रभावित हुआ है।
फिलहाल कंपनियों के पास चार से छह हफ्तों का कंपोनेंट स्टॉक है, जिससे उन्हें थोड़ी राहत मिली हुई है। लेकिन उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह संकट दो महीने से अधिक चलता है तो असली समस्याएं शुरू हो सकती हैं, खासकर उन प्रक्रियाओं में जहां अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है।
यदि गैस की कमी और समुद्री परिवहन में रुकावट बढ़ती है, तो उत्पादन पर भी प्रभाव पड़ सकता है।
हालांकि, अब तक बड़ी ऑटो कंपनियां जैसे महिंद्रा एंड महिंद्रा, मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और किआ इंडिया ने कहा है कि वर्तमान में उनके उत्पादन पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है। कंपनियों के अनुसार, सप्लाई चेन अभी स्थिर है, लेकिन स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है।
कंपनियां अपने सप्लायर्स के साथ लगातार संपर्क में हैं, खासकर उन सप्लायर्स के साथ जो आयात या गैस पर अधिक निर्भर हैं। उद्योग के अधिकारियों का कहना है कि स्थिति तेजी से बदल रही है और कंपनियां आवश्यकता पड़ने पर तुरंत निर्णय लेने के लिए तैयार हैं।
एक रिपोर्ट के अनुसार, विभिन्न कंपनियों में गैस पर निर्भरता अलग-अलग है। मारुति सुजुकी की फैक्ट्रियों में गैस पर निर्भरता लगभग 74 प्रतिशत है, जबकि महिंद्रा एंड महिंद्रा में 38 प्रतिशत, टाटा मोटर्स में 33 प्रतिशत और हुंडई मोटर में 31 प्रतिशत है।
इसका मतलब है कि यदि गैस सप्लाई लंबे समय तक प्रभावित रहती है, तो विभिन्न कंपनियों पर इसका असर अलग-अलग तरीकों से पड़ेगा।
फिलहाल, भारत का ऑटो सेक्टर इस संकट से सुरक्षित नजर आ रहा है, लेकिन आगामी कुछ हफ्ते बेहद महत्वपूर्ण होंगे, जो यह निर्धारित करेंगे कि यह स्थिति बड़े सप्लाई संकट में बदलती है या नहीं।