3 अगस्त 2026
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सबरीमाला घी घोटाला: मिल्मा ने किसी भी भूमिका से किया इनकार, पारगमन में मिलावट पर उठाए सवाल

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सबरीमाला घी घोटाला: मिल्मा ने किसी भी भूमिका से किया इनकार, पारगमन में मिलावट पर उठाए सवाल

सारांश

सबरीमाला में घी घोटाले की आँच अब मिल्मा तक पहुँची — लेकिन डेयरी सहकारी संस्था ने साफ इनकार किया। असली सवाल यह है कि पम्पा के निरीक्षण बिंदु पर नज़र रखने वाले कहाँ थे, और मंदिर प्रशासन ने विसंगति मिलने पर तुरंत सूचना क्यों नहीं दी।

मुख्य बातें

मिल्मा ने 3 अगस्त को सबरीमाला घी घोटाले में किसी भी भूमिका से स्पष्ट इनकार किया।
मिल्मा अध्यक्ष के.एस.
मणि ने कहा कि आपूर्ति से पहले हर बैच का राज्य प्रयोगशाला में परीक्षण किया गया था।
त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने कभी भी घी की गुणवत्ता पर आधिकारिक आपत्ति मिल्मा को नहीं भेजी।
मणि ने पम्पा निरीक्षण बिंदु पर पारगमन के दौरान कथित प्रतिस्थापन की चूक पर सवाल उठाया।
मिल्मा के नाम या लोगो के दुरुपयोग पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी गई।
यह विवाद सबरीमाला सोना हेराफेरी मामले के बाद आया है, जिसमें देवास्वोम बोर्ड के लगभग 15 अधिकारी गिरफ्तार हुए थे।

केरल की राज्य सहकारी डेयरी संस्था मिल्मा (केरल सहकारी दुग्ध विपणन महासंघ — KCMMF) ने 3 अगस्त को सबरीमाला मंदिर में घी आपूर्ति से जुड़े कथित घोटाले में अपनी किसी भी भूमिका को पूरी तरह नकार दिया। मिल्मा अध्यक्ष के.एस. मणि ने स्पष्ट किया कि संस्था द्वारा आपूर्ति किए गए घी में कोई मिलावट नहीं हुई और साथ ही यह भी सवाल उठाया कि पम्पा स्थित निरीक्षण बिंदु पर पारगमन के दौरान कथित प्रतिस्थापन का पता क्यों नहीं चला।

मिल्मा का पक्ष: गुणवत्ता परीक्षण से लेकर आपूर्ति तक

के.एस. मणि ने कहा कि सबरीमाला को भेजे गए घी के प्रत्येक बैच की राज्य प्रयोगशाला में जाँच की गई थी और निर्धारित गुणवत्ता मानकों पर खरा उतरने के बाद ही उसे रवाना किया गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने कभी भी मिल्मा को आधिकारिक रूप से यह सूचित नहीं किया कि आपूर्ति किए गए घी की गुणवत्ता में कोई कमी पाई गई।

मणि ने यह भी संभावना जताई कि यदि कोई अनियमितता हुई है तो उसमें बाहरी व्यापारियों की संलिप्तता हो सकती है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर मिल्मा के नाम, लोगो या प्रतीक चिह्न का दुरुपयोग किया गया है तो कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पारगमन में चूक पर सीधा सवाल

मिल्मा अध्यक्ष ने एक अहम सवाल उठाया — पथानामथिट्टा से सबरीमाला तक के पारगमन के दौरान पम्पा के निरीक्षण बिंदु पर घी के किसी भी कथित प्रतिस्थापन का पता क्यों नहीं चला? उन्होंने यह भी जानना चाहा कि यदि मंदिर अधिकारियों को कोई विसंगति दिखी थी, तो उन्होंने तत्काल मिल्मा को सूचित क्यों नहीं किया।

यह सवाल इसलिए महत्त्वपूर्ण है क्योंकि आपूर्ति श्रृंखला में कई बिंदुओं पर निगरानी की जिम्मेदारी अलग-अलग एजेंसियों की होती है — और कथित मिलावट किस स्तर पर हुई, यह अभी तक स्पष्ट नहीं हो पाया है।

पृष्ठभूमि: सोने की हेराफेरी के बाद एक और विवाद

गौरतलब है कि यह विवाद सबरीमाला सोना हेराफेरी मामले के तुरंत बाद सामने आया है, जिसमें त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के लगभग 15 अधिकारियों और अन्य को गिरफ्तार किया गया था। उस मामले ने मंदिर की संपत्ति और चढ़ावे के प्रबंधन पर पहले से ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे। यह ऐसे समय में आया है जब सबरीमाला प्रशासन पहले से ही जाँच के दायरे में है।

जाँच और आगे की कार्रवाई

मिल्मा अध्यक्ष ने कहा कि सहकारी संस्था चल रही जाँच में पूरा सहयोग करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि मिल्मा का कोई अधिकारी इस मामले में दोषी पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय संघ के प्रबंध निदेशक से रिपोर्ट मिलने के बाद ही आंतरिक जाँच के आदेश पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। इस बीच, मणि ने दावा किया कि विवाद के बावजूद बाज़ार में मिल्मा घी की बिक्री अप्रभावित रही है।

जाँच एजेंसियाँ अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि आपूर्ति श्रृंखला के किस पड़ाव पर, और किसकी मिलीभगत से, कथित अनियमितता हुई।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह एक बड़े सवाल को नहीं ढकता — सबरीमाला जैसे अति-संवेदनशील धार्मिक स्थल की आपूर्ति श्रृंखला में इतनी बड़ी कथित सेंध कैसे लगी और किसी को भनक तक नहीं लगी? सोने की हेराफेरी के बाद अब घी विवाद यह संकेत देता है कि त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड की निगरानी प्रणाली में संरचनात्मक खामियाँ हैं। असली जवाबदेही का सवाल मिल्मा से नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था से पूछा जाना चाहिए जो पम्पा से सबरीमाला तक हर खेप की जाँच के लिए ज़िम्मेदार थी।
RashtraPress
3 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सबरीमाला घी घोटाला क्या है?
सबरीमाला मंदिर को आपूर्ति किए गए घी में कथित मिलावट या प्रतिस्थापन का यह मामला है, जो पथानामथिट्टा से मंदिर तक पारगमन के दौरान हुआ बताया जा रहा है। यह विवाद त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के सोना हेराफेरी कांड के तुरंत बाद सामने आया है।
मिल्मा ने घोटाले में अपनी भूमिका से क्यों इनकार किया?
मिल्मा अध्यक्ष के.एस. मणि ने कहा कि आपूर्ति किए गए हर बैच का राज्य प्रयोगशाला में परीक्षण हुआ और त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड ने कभी भी गुणवत्ता पर कोई आधिकारिक आपत्ति नहीं जताई। उनके अनुसार, यदि कोई अनियमितता हुई है तो वह पारगमन के दौरान बाहरी व्यापारियों की संलिप्तता से हो सकती है।
पम्पा निरीक्षण बिंदु की भूमिका इस मामले में क्या है?
पम्पा वह स्थान है जहाँ पथानामथिट्टा से सबरीमाला जाने वाली आपूर्ति की जाँच होती है। मिल्मा अध्यक्ष ने सवाल उठाया कि यदि घी का प्रतिस्थापन हुआ तो इस निरीक्षण बिंदु पर वह क्यों नहीं पकड़ा गया — जो निगरानी तंत्र की विफलता की ओर इशारा करता है।
क्या मिल्मा इस मामले की जाँच में सहयोग करेगी?
हाँ, मिल्मा अध्यक्ष के.एस. मणि ने कहा कि संस्था चल रही जाँच में पूरा सहयोग देगी। तिरुवनंतपुरम क्षेत्रीय संघ के प्रबंध निदेशक से रिपोर्ट मिलने के बाद आंतरिक जाँच के आदेश पर निर्णय लिया जाएगा।
इस विवाद का सबरीमाला मंदिर प्रशासन पर क्या असर पड़ेगा?
यह घी विवाद सबरीमाला सोना हेराफेरी कांड के बाद दूसरा बड़ा प्रकरण है, जिसमें त्रावणकोर देवास्वोम बोर्ड के लगभग 15 अधिकारी गिरफ्तार हुए थे। इससे मंदिर प्रशासन की आपूर्ति श्रृंखला और संपत्ति प्रबंधन की पूरी व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं और नई जाँच की माँग तेज हो सकती है।
राष्ट्र प्रेस
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