मुरादनगर में कांवड़ यात्रा 2025: 'मिनी हरिद्वार' में हजारों श्रद्धालु, गंगा नहर किनारे कैंपों में मिल रही पूरी सुविधा
सारांश
मुख्य बातें
सावन माह में कांवड़ यात्रा 2025 के दौरान उत्तर प्रदेश के मुरादनगर (गाजियाबाद) में हजारों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 'मिनी हरिद्वार' के नाम से प्रसिद्ध इस शहर में गंगा नहर के किनारे जगह-जगह कांवड़ शिविर स्थापित किए गए हैं, जहाँ थके हुए कांवड़िए विश्राम कर रहे हैं। 8 अगस्त को भी यहाँ श्रद्धालुओं का अनवरत आवागमन जारी रहा।
शिविरों में क्या-क्या सुविधाएँ
कांवड़ यात्रा मार्ग पर स्थापित इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए भोजन, पेयजल, विश्राम और चिकित्सा सहायता की व्यापक व्यवस्था की गई है। लंबी पैदल यात्रा के बाद जब कांवड़िए शिविरों में पहुँचते हैं, तो उन्हें तत्काल राहत मिलती है। पैरों में दर्द या अन्य छोटी-मोटी तकलीफों के लिए मेडिकल टीमें तैनात हैं, जो जरूरत पड़ने पर दवाइयाँ और प्राथमिक उपचार उपलब्ध करा रही हैं।
सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी
प्रशासन ने यात्रा मार्ग पर पुलिस बल की तैनाती सुनिश्चित की है। गंगा नहर के आसपास के क्षेत्र में सीसीटीवी कैमरों के माध्यम से निगरानी रखी जा रही है। इसके लिए एक विशेष कंट्रोल रूम स्थापित किया गया है, जहाँ से पूरे इलाके की गतिविधियों पर नज़र रखी जा रही है। प्रशासन का उद्देश्य है कि यात्रा के दौरान भीड़ प्रबंधन सुचारु रहे और श्रद्धालुओं को किसी असुविधा का सामना न करना पड़े।
श्रद्धालुओं की प्रतिक्रिया
हरिद्वार से अपनी कांवड़ यात्रा आरंभ करने वाले एक श्रद्धालु ने बताया कि उन्होंने 2 अगस्त को यात्रा शुरू की थी और शीघ्र ही अपनी मंजिल तक पहुँचने की उम्मीद है। उन्होंने यात्रा के दौरान की गई व्यवस्थाओं की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार द्वारा किए गए इंतजामों को संतोषजनक बताया।
एक अन्य कांवड़िए ने कहा कि लगातार पैदल चलने से पैरों में कुछ दर्द अवश्य है, परंतु शिविरों में उपलब्ध दवाइयों और सुविधाओं से राहत मिल रही है। उन्होंने खाने-पीने की व्यवस्था को भी बेहतर बताया।
मुरादनगर का धार्मिक महत्त्व
गाजियाबाद जिले में स्थित मुरादनगर को 'मिनी हरिद्वार' इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ से गंगा नहर गुजरती है और यह कांवड़ यात्रा का एक प्रमुख पड़ाव है। यह ऐसे समय में आया है जब पूरे उत्तर प्रदेश में सावन के अवसर पर लाखों कांवड़िए हरिद्वार से जल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर पैदल यात्रा कर रहे हैं। यात्रा के शेष दिनों में भी श्रद्धालुओं की संख्या में और वृद्धि होने की संभावना है।