मिजोरम को 2028 तक पाइप्ड नेचुरल गैस: इंद्रधनुष गैस ग्रिड की 119.45 किमी पाइपलाइन पर काम जारी
सारांश
मुख्य बातें
इंद्रधनुष गैस ग्रिड लिमिटेड (IGGL) द्वारा उत्तरी त्रिपुरा के पानीसागर को आइजोल से जोड़ने वाली 119.45 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन का निर्माण कार्य तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, जिसके चलते मिजोरम के घरों को 2028 की शुरुआत तक पाइपलाइन के ज़रिए प्राकृतिक गैस (PNG) कनेक्शन मिलने की उम्मीद है। यह परियोजना पूर्वोत्तर गैस ग्रिड के व्यापक ढाँचे के तहत क्रियान्वित की जा रही है, जो क्षेत्र को स्वच्छ ऊर्जा से जोड़ने की केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी पहल का हिस्सा है।
मंत्री का निरीक्षण दौरा
मिजोरम की खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामलों की मंत्री बी. लालछनजोवा ने सोमवार, 26 अक्टूबर 2026 को वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मामित ज़िले के तुइदाम का दौरा कर पानीसागर-आइजोल पाइपलाइन पर चल रहे निर्माण कार्य का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने IGGL के अधिकारियों से काम में और तेज़ी लाने का आग्रह किया तथा परियोजना को पूरा करने में मिजोरम सरकार का पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया।
मंत्री ने तुइदाम पहुँच मार्ग के साथ बुनियादी ढाँचे से जुड़े मुद्दों की भी समीक्षा की। अधिकारियों के अनुसार, पाइपलाइन मार्ग के 1.5 किलोमीटर के एक खंड के कई हिस्सों को चौड़ा करने की आवश्यकता है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि निर्माण कार्य मौजूदा सड़क मरम्मत योजनाओं में बाधा न बने, IGGL और लोक निर्माण विभाग (PWD) के अधिकारियों ने घटनास्थल पर आपसी समन्वय की चर्चा की।
परियोजना की रूपरेखा और लागत
मंत्री लालछनजोवा ने बताया कि IGGL लगभग ₹491 करोड़ की अनुमानित लागत से मिजोरम को त्रिपुरा नेचुरल गैस कंपनी लिमिटेड (TNGCL) के नेटवर्क से जोड़ रही है। यह पहल शुरुआत में मामित और आइजोल ज़िलों को कवर करेगी।
पाइपलाइन की कुल लंबाई 119.45 किलोमीटर है, जिसमें से 15.105 किलोमीटर त्रिपुरा के छह गाँवों से होकर गुज़रेगी और शेष 104.345 किलोमीटर मिजोरम के 20 गाँवों से होकर आइजोल तक पहुँचेगी। समय-सीमा के अनुसार, पाइपलाइन के मार्च-अप्रैल 2027 तक मामित शहर और मार्च-अप्रैल 2028 तक आइजोल ज़िले के सिहमई तक पहुँचने की योजना है।
LPG संकट का समाधान
मंत्री ने स्पष्ट किया कि वैश्विक संघर्षों और ऊर्जा आपूर्ति में व्यवधान के कारण मिजोरम में द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस (LPG) की समय-समय पर किल्लत हो जाती है, जिसका सीधा असर घरेलू खाना पकाने पर पड़ता है। पाइपलाइन के ज़रिए प्राकृतिक गैस की आपूर्ति इस समस्या का स्थायी समाधान मुहैया कराएगी। उन्होंने यह भी आशा व्यक्त की कि भविष्य में प्राकृतिक गैस की उपलब्धता से वाहनों के लिए सीएनजी (CNG) की शुरुआत में भी सुविधा होगी, जिससे पारंपरिक ईंधनों पर राज्य की निर्भरता घटेगी।
पूर्वोत्तर गैस ग्रिड: बड़ी तस्वीर
यह पाइपलाइन व्यापक पूर्वोत्तर गैस ग्रिड परियोजना का अंग है, जिसके तहत पूर्वोत्तर राज्यों में कुल 1,656 किलोमीटर प्राकृतिक गैस पाइपलाइन बिछाने के लिए लगभग ₹9,265 करोड़ का निवेश किया जा रहा है। IGGL एक संयुक्त उद्यम है जिसे इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC), गेल (इंडिया) लिमिटेड, ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) और असम की नुमालीगढ़ रिफाइनरी लिमिटेड (NRL) ने मिलकर प्रवर्तित किया है।
गौरतलब है कि यह परियोजना ऐसे समय में आई है जब पूर्वोत्तर राज्य स्वच्छ ऊर्जा की ओर संक्रमण में लागत और आपूर्ति-श्रृंखला की चुनौतियों से जूझ रहे हैं। मुख्य पाइपलाइन के पूरा होने के बाद TNGCL दोनों ज़िलों में घरों और व्यावसायिक उपभोक्ताओं को PNG कनेक्शन देना शुरू करेगी, जिससे राज्य में स्वच्छ और सुविधाजनक खाना पकाने के ईंधन का युग शुरू होगा।