ईडी ने मिजोरम में सब्सिडी घोटाले के खिलाफ पहली चार्जशीट दर्ज की

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ईडी ने मिजोरम में सब्सिडी घोटाले के खिलाफ पहली चार्जशीट दर्ज की

सारांश

मिजोरम की राजधानी आइजोल में सरकारी सब्सिडी के फर्जी दावों के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने पहली चार्जशीट दाखिल की है। यह घोटाला लगभग 3.41 करोड़ रुपये की अवैध आय से जुड़ा है। जानें इस मामले की पूरी जानकारी।

Key Takeaways

  • ईडी ने मिजोरम में सब्सिडी घोटाले पर चार्जशीट दाखिल की।
  • मुख्य आरोपी रवि गुलगुलिया के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप हैं।
  • इस घोटाले से लगभग 3.41 करोड़ रुपये की अवैध आय उत्पन्न हुई।
  • ईडी ने 38.40 लाख रुपये की संपत्तियों को अटैच किया है।
  • जांच जारी है और इसकी प्रगति पर निगरानी रखी जाएगी।

आइजोल, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मंगलवार को सूचना दी कि उसने मिजोरम की राजधानी आइजोल में सरकारी सब्सिडी के फर्जी दावों से जुड़े मामले में पहली चार्जशीट दाखिल की है।

ईडी के आइजोल सब-जोनल कार्यालय ने 30 मार्च को धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 (पीएमएलए) की धारा 45 और 44 के तहत आइजोल स्थित विशेष अदालत में रवि गुलगुलिया और अन्य के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में चार्जशीट प्रस्तुत की।

ईडी द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, यह जांच मिजोरम पुलिस के भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी, जिसमें भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की विभिन्न धाराएं शामिल थीं।

आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जांच में यह पाया गया कि रवि गुलगुलिया ने मार्गरेट एम. वार्टे के साथ मिलकर आइजोल के पास मेसर्स मिज़ो कार्बन प्रोडक्ट्स (एमसीपी) के नाम से एक कोक उत्पादन इकाई स्थापित की थी। इसका मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार की सब्सिडी को धोखाधड़ी से प्राप्त करना था।

जांच में यह भी पाया गया कि संबंधित यूनिट उस समय चालू नहीं थी जब दावे किए गए थे। फिर भी, फर्जी दस्तावेज तैयार कर केंद्रीय परिवहन सब्सिडी (सीटीएस) के तहत लगभग 2.47 करोड़ रुपये और केंद्रीय पूंजी निवेश सब्सिडी (सीसीआईएस) के तहत 93.90 लाख रुपये का दावा किया गया।

ईडी के अनुसार, इस संपूर्ण घोटाले से लगभग 3.41 करोड़ रुपये की अवैध आय उत्पन्न हुई।

जांच में यह भी सामने आया कि जब सब्सिडी की राशि प्राप्त हुई, तो इसे कई कंपनियों और बैंक खातों के माध्यम से घुमाया गया। ये खाते रवि गुलगुलिया के नियंत्रण में थे, जिनमें रवि गुलगुलिया एंड संस (एचयूएफ), मेसर्स शिवरात्रि कमोडिटीज़ प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स थर्डवेव सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड, मेसर्स गुलगुलिया ट्रेड कॉर्पोरेशन और मेसर्स यश मार्केटिंग इंडिया शामिल थीं।

ईडी के अनुसार, इन पैसों को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर सर्कुलर ट्रांजैक्शन के जरिए घुमाया गया और अंततः मुख्य आरोपी के निजी खातों तथा मेसर्स ग्लोबल एंट्रेड में ट्रांसफर किया गया, जहां 45 लाख रुपये की संदिग्ध राशि पहुंची।

इस मामले में, ईडी ने पहले ही पीएमएलए की धारा 5 के तहत 38.40 लाख रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच कर दिया है। फिलहाल, इस मामले में आगे की जांच जारी है।

Point of View

NationPress
02/04/2026

Frequently Asked Questions

ईडी ने चार्जशीट कब दाखिल की?
ईडी ने 30 मार्च को चार्जशीट दाखिल की।
इस घोटाले में मुख्य आरोपी कौन है?
मुख्य आरोपी रवि गुलगुलिया है।
घोटाले से कितनी अवैध आय उत्पन्न हुई?
इस घोटाले से लगभग 3.41 करोड़ रुपये की अवैध आय उत्पन्न हुई।
क्या ईडी ने पहले से कोई संपत्ति अटैच की है?
हाँ, ईडी ने 38.40 लाख रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से अटैच किया है।
इस मामले में आगे की जांच कब तक चलेगी?
इस मामले में आगे की जांच जारी है, और इसकी प्रगति पर निगरानी रखी जाएगी।
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