मिजोरम में सब्सिडी घोटाला: ईडी ने 3.41 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ चार्जशीट पेश की
सारांश
Key Takeaways
- ईडी ने मिजोरम में सब्सिडी घोटाले की जांच शुरू की।
- 3.41 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई।
- धोखाधड़ी में शामिल मुख्य आरोपी रवि गुलगुलिया है।
- कई फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सब्सिडी का दावा किया गया।
- ईडी ने 38.40 लाख रुपए की संपत्तियों को कुर्क किया।
आइजोल, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने सोमवार को मनी लॉन्ड्रिंग के एक मामले में विशेष न्यायालय में रवि गुलगुलिया और अन्य आरोपियों के खिलाफ अभियोजन शिकायत (प्रॉसिक्यूशन कंप्लेंट) प्रस्तुत की है। यह मामला केंद्र सरकार की सब्सिडी में कथित तौर पर व्यापक धोखाधड़ी और उससे जुड़े धन शोधन से संबंधित है।
ईडी की यह जांच मिजोरम पुलिस के एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर प्रारंभ हुई थी। एसीबी ने भारतीय दंड संहिता, 1860 और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 के विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।
जांच में पता चला कि मुख्य आरोपी रवि गुलगुलिया ने डॉ. मार्गरेट एम. वारते के साथ मिलकर एक आपराधिक साजिश बनाई। इस साजिश के तहत आइजोल, मिजोरम के निकट 'मिजो कार्बन प्रोडक्ट्स (एमसीपी)' नामक एक कोक उत्पादन इकाई की स्थापना की गई। आरोप है कि इस इकाई का वास्तविक उत्पादन करने का उद्देश्य नहीं था, बल्कि केंद्र सरकार की सब्सिडी का धोखाधड़ी से लाभ उठाना था।
ईडी की जांच में यह भी सामने आया कि जिस समय सब्सिडी का दावा किया गया, उस समय यह इकाई वास्तव में गैर-परिचालन (बंद) थी। इसके बावजूद, आरोपियों ने उत्पादन, माल के परिवहन, कच्चे माल की खरीद और डीजल की खपत से संबंधित कई फर्जी और मनगढ़ंत दस्तावेज तैयार किए।
इन दस्तावेजों के आधार पर लगभग 2.47 करोड़ रुपए की केंद्रीय परिवहन सब्सिडी (सीटीएस) और 93.90 लाख रुपए की केंद्रीय पूंजी निवेश सब्सिडी (सीसीआईएस) का दावा किया गया। इस प्रकार, कुल मिलाकर लगभग 3.41 करोड़ रुपए की अवैध आय उत्पन्न हुई।
जांच एजेंसी के अनुसार, जैसे ही सब्सिडी की राशि प्राप्त हुई, इसे विभिन्न संस्थाओं और बैंक खातों के माध्यम से एक सुनियोजित तरीके से घुमाया गया ताकि उसकी वास्तविक उत्पत्ति को छिपाया जा सके। ये सभी संस्थाएं और खाते रवि गुलगुलिया के नियंत्रण में हैं, जिनमें रवि गुलगुलिया एंड संस (एचयूएफ), शिवरात्रि कमोडिटीज प्राइवेट लिमिटेड, थर्डवेव सप्लायर्स प्राइवेट लिमिटेड, गुलगुलिया ट्रेड कॉर्पोरेशन और यश मार्केटिंग इंडिया शामिल हैं।
इन खातों के जरिए धन को कई हिस्सों में बांटकर और जटिल लेन-देन के माध्यम से अंततः आरोपी के व्यक्तिगत खातों और “ग्लोबल एंट्रेड” नामक फर्म में मिला दिया गया। ग्लोबल एंट्रेड एक पार्टनरशिप फर्म है, जिस पर भी रवि गुलगुलिया का नियंत्रण है, और इस फर्म को लगभग 45 लाख रुपए की अवैध राशि प्राप्त हुई।
ईडी ने इस मामले में पहले ही सख्त कदम उठाते हुए पीएमएलए, 2002 की धारा 5 के तहत 38.40 लाख रुपए की अचल संपत्तियों को कुर्क कर लिया है। एजेंसी का कहना है कि इस मामले में आगे की जांच जारी है और आने वाले समय में और भी खुलासे हो सकते हैं।