मध्य प्रदेश: अल्पवर्षा की आशंका के बीच CM मोहन यादव ने किसानों को वैज्ञानिक खेती अपनाने के दिए निर्देश
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने 2 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित मंत्रालय में उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की अध्यक्षता करते हुए स्पष्ट किया कि राज्य के किसान संभावित अल्पवर्षा की चुनौती का मुकाबला वैज्ञानिक सोच और सुनियोजित तैयारी से करेंगे। उन्होंने कहा कि इस स्थिति को संकट नहीं, बल्कि बेहतर कृषि योजना का अवसर मानकर चला जाए।
समीक्षा बैठक में क्या हुआ
मुख्यमंत्री यादव ने गुरुवार को किसान कल्याण एवं कृषि विकास, जल संसाधन, उद्यानिकी, पशुपालन, मत्स्य पालन, सहकारिता तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पूर्व तैयारियों की गहन समीक्षा की। बैठक में सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने और किसानों को समय पर आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए।
किसानों के लिए मुख्य दिशा-निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि किसानों को कम पानी और कम अवधि में तैयार होने वाली फसलों की ओर व्यापक स्तर पर प्रेरित किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से ज्वार, बाजरा, उड़द, मूंग, तुअर तथा कोदो-कुटकी जैसी मोटे अनाज एवं दलहनी फसलों को अपनाने पर जोर दिया। यादव ने कहा कि ये फसलें न केवल कम जल में बेहतर उत्पादन देती हैं, बल्कि किसानों के लिए आर्थिक रूप से भी अधिक लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं।
बुआई में जल्दबाजी से बचने की सलाह
मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि किसानों को जल्दबाजी में बुआई करने से बचना चाहिए। उन्होंने निर्देश दिए कि खेतों में पर्याप्त नमी बनने के बाद ही बुआई की जाए और नमी संरक्षण के उपाय अपनाए जाएं। साथ ही उन्नत किस्मों तथा आधुनिक कृषि तकनीकों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया।
कृषि विस्तार तंत्र को सक्रिय करने के आदेश
यादव ने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों एवं विषय विशेषज्ञों के सुझावों को प्रभावी ढंग से किसानों तक पहुँचाया जाए, ताकि वे स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप उपयुक्त फसल का चयन कर सकें। इसके लिए कृषि विस्तार तंत्र को और अधिक सक्रिय बनाने के निर्देश दिए गए। गौरतलब है कि देश के अन्य राज्यों की तरह मध्य प्रदेश में भी इस मानसून सत्र में अल्पवर्षा की संभावना जताई जा रही है, जिसे देखते हुए राज्य सरकार ने समय रहते तैयारियाँ तेज कर दी हैं।
आगे क्या होगा
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार संभावित अल्पवर्षा की स्थिति पर सतत निगरानी रखे हुए है। सभी संबंधित विभागों को पूर्व नियोजित कार्य योजना के अनुसार समन्वित रूप से कार्य करने और किसानों को हर संभव तकनीकी एवं प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। यह देखना होगा कि विभागीय समन्वय ज़मीनी स्तर पर कितना प्रभावी साबित होता है।