मध्य प्रदेश कांग्रेस के 62 विधायक राष्ट्रपति भवन जाएंगे, मीनाक्षी नटराजन नामांकन निरस्त पर न्याय की माँग
सारांश
मुख्य बातें
मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र निरस्त किए जाने के बाद भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) का विरोध प्रदर्शन तेज़ हो गया है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने 10 जून को ऐलान किया कि पार्टी के सभी 62 विधायक शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति के समक्ष अपना पक्ष रखेंगे और विधायकों के मताधिकार के कथित दुरुपयोग पर न्याय की गुहार लगाएंगे।
मुख्य घटनाक्रम
कांग्रेस ने बुधवार को भोपाल के रोशनपुरा चौराहे पर उपवास का आयोजन किया, जिसमें पार्टी के वरिष्ठ नेता, विधायक और पदाधिकारी बड़ी संख्या में शामिल हुए। यह प्रदर्शन मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पत्र को निरस्त किए जाने के विरोध में आयोजित किया गया था।
पटवारी ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस के विधायक राष्ट्रपति को यह बताएंगे कि वे ढाई से तीन लाख मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं और उनके मताधिकार का दुरुपयोग किया गया है। पटवारी के अनुसार, यह मामला केवल एक विधायक का नहीं, बल्कि लाखों मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों का है।
सरकार पर हमला
पटवारी ने मध्य प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी (BJP) सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि राज्य में 'भ्रष्टाचार जड़ों तक पहुँच गया है' और इसका सरगना राज्य का मुख्यमंत्री है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य में 'वोट की चोरी' आम नागरिकों के जीवन को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित कर रही है।
गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब मध्य प्रदेश में कांग्रेस विधानसभा चुनाव में बड़ी हार के बाद विपक्ष की भूमिका में है और राज्यसभा सीट उसके लिए राजनीतिक पुनर्वापसी का अवसर थी।
आगे के आंदोलन की चेतावनी
पटवारी ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति भवन मार्च केवल शुरुआत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आने वाले समय में बड़े आंदोलन करने की तैयारी में है और राज्य की जनता को इसमें भागीदार बनाया जाएगा। पार्टी का उद्देश्य इस मुद्दे को जन-जन तक पहुँचाना है।
आम जनता पर असर
कांग्रेस के अनुसार, नामांकन निरस्त होने से उन लाखों मतदाताओं की आवाज़ दबी है जिन्होंने कांग्रेस विधायकों को चुना था। विपक्ष का तर्क है कि विधायकों का मत देने का अधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और इसमें किसी भी प्रकार की बाधा संवैधानिक मूल्यों के विरुद्ध है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह घटनाक्रम मध्य प्रदेश में कांग्रेस को जमीनी स्तर पर एकजुट करने का अवसर दे सकता है, जो पिछले चुनाव में बिखरी हुई नज़र आई थी।