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क्या मध्य प्रदेश ने गणतंत्र दिवस पर 87 उम्रकैद के दोषियों की समय से पहले रिहाई का आदेश दिया?

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क्या मध्य प्रदेश ने गणतंत्र दिवस पर 87 उम्रकैद के दोषियों की समय से पहले रिहाई का आदेश दिया?

सारांश

मध्य प्रदेश सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस के मौके पर 87 उम्रकैद के दोषियों की समय से पहले रिहाई का निर्णय लिया है। यह कदम जेलों में भीड़भाड़ कम करने और पुनर्वास को बढ़ावा देने के उद्देश्य से उठाया गया है। क्या यह निर्णय समाज में सुधार लाने में सहायक होगा?

मुख्य बातें

आजीवन कारावास के 87 दोषियों की समय से पहले रिहाई का आदेश।
जेलों में भीड़भाड़ कम करने की दिशा में एक कदम।
रिहाई सख्त सुरक्षा उपायों के अधीन होगी।
सामाजिक पुनर्वास को बढ़ावा देने का प्रयास।
मामले की गहन जांच के बाद ही रिहाई।

भोपाल, 12 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश सरकार ने 77वें गणतंत्र दिवस से पूर्व एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। राज्य सरकार ने राज्यभर की जेलों से 87 आजीवन कारावास के दोषियों की समय से पहले रिहाई को मंजूरी दी है।

जेल विभाग ने 27 मई 2025 के एक निर्देश के तहत 481 मामलों की विस्तृत समीक्षा के बाद यह आदेश जारी किया।

एक आधिकारिक बयान के अनुसार, जिला स्तरीय समितियों ने कानूनी प्रावधानों, मामले की पृष्ठभूमि और प्रासंगिक तथ्यों के आधार पर प्रत्येक मामले की जांच की। कुल समीक्षा किए गए मामलों में से 394 दोषी समय से पहले रिहाई के लिए अपात्र पाए गए।

यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 432, 433 और 433(ए) के तहत लिया गया है, जो राज्य को विशिष्ट शर्तों के तहत सजा माफ करने या कम करने का अधिकार देती है।

अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि रिहाई सख्त सुरक्षा उपायों के अधीन होगी।

हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित अपील वाले कैदी तभी पात्र होंगे जब उनके मामलों का समाधान 26 जनवरी 2026 तक हो जाएगा।

इसके साथ ही जिन कैदियों पर जुर्माना लगाया गया है, उन्हें जुर्माना अदा करना होगा या अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा, जबकि अन्य मामलों में सजा काट रहे दोषियों को रिहाई से पहले अपनी सजा पूरी करनी होगी।

जिन व्यक्तियों के मुकदमे लंबित हैं, वे विचाराधीन कैदी बने रहेंगे और अंतरराज्यीय मामलों में रिहाई से पहले स्थानांतरण हो सकता है।

आजीवन कारावास के दोषियों के अलावा, सात गैर-आजीवन कारावास कैदियों को सजा में छूट दी गई है।

अधिकारियों ने कहा कि अस्वीकृति मुख्य रूप से उन मामलों में हुई है जहां दोषियों ने राज्य नीति के तहत आवश्यक 20 वर्ष का कारावास (छूट सहित) पूरा नहीं किया था।

गणतंत्र दिवस के अवसर पर उठाया गया यह कदम पुनर्वास को बढ़ावा देने और जेलों में भीड़भाड़ कम करने के उद्देश्य से की जाने वाली वार्षिक पहल का हिस्सा है। साथ ही मामले-दर-मामले की गहन जांच के माध्यम से सार्वजनिक सुरक्षा सुनिश्चित करता है।

जेल सुधार के पैरोकारों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे मानवीय सिद्धांतों के अनुरूप बताया है। हालांकि, उन्होंने समाज में पुनर्एकीकरण सुनिश्चित करने के लिए रिहाई के बाद के व्यवहार की निगरानी के महत्व पर जोर दिया।

मध्य प्रदेश की जेलों में हजारों कैदी बंद हैं। ऐसे में ये पहल सरकार के न्याय और दयालुता के बीच संतुलन बनाने के प्रयासों को दर्शाती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

यह भी आवश्यक है कि रिहाई के बाद इन व्यक्तियों की निगरानी की जाए ताकि समाज में उनकी पुनः एकीकरण की प्रक्रिया सुचारू हो सके।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कौन से कैदियों को रिहाई मिलेगी?
87 उम्रकैद के दोषियों को रिहाई मिलेगी, जबकि जिनके मुकदमे लंबित हैं, वे विचाराधीन कैदी रहेंगे।
यह निर्णय किस कानून के तहत लिया गया है?
यह निर्णय दंड प्रक्रिया संहिता, 1973 की धारा 432, 433 और 433(ए) के तहत लिया गया है।
क्या रिहाई में कोई शर्तें हैं?
हाँ, रिहाई सख्त सुरक्षा उपायों के अधीन होगी और जुर्माना अदा करने की आवश्यकता होगी।
राष्ट्र प्रेस
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