मुंबई में कांग्रेस सांसद के PA पर SRA धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ₹5.57 करोड़ की ठगी का आरोप
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई पुलिस ने 2 अगस्त 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के एक मौजूदा सांसद के निजी सहायक (PA) के खिलाफ स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) आवास कक्षों से जुड़े बड़े पैमाने की धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और झूठे आश्वासनों के ज़रिए कई लोगों से कुल ₹5.57 करोड़ की ठगी की।
मुख्य घटनाक्रम
एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने SRA और सहकारी आवास कार्यालयों के जाली पत्र, मुहरें और हस्ताक्षर तैयार कर पीड़ितों को आवास आवंटन का वादा किया। इन फर्जी दस्तावेजों में आवंटन पत्र, कब्जा प्रमाण-पत्र और कमरों के हस्तांतरण से जुड़े भ्रामक बयान शामिल थे।
आरोप है कि यह रैकेट कई वर्षों तक चला और अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली तथा माटुंगा सहित मुंबई के विभिन्न इलाकों में PAP (Project Affected Persons) आवास कक्षों के नाम पर ठगी की गई।
आरोपों का स्वरूप
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने सरकारी चैनलों तक विशेष पहुँच होने का दावा करके और PAP आवास कक्ष दिलाने का भरोसा दिलाकर उन्हें तथा अन्य पीड़ितों को जाल में फँसाया। कथित तौर पर यह साजिश सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिसमें एक से अधिक लोग शामिल बताए जा रहे हैं।
एफआईआर में उल्लिखित फर्जी दस्तावेजों की विविधता — आवंटन पत्र से लेकर कब्जा प्रमाण-पत्र तक — यह संकेत देती है कि आरोपियों को SRA की प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी जानकारी थी।
पुलिस की कार्रवाई
मुंबई पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जाँच जारी है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।
आम जनता पर असर
SRA आवास योजनाएँ मुंबई के लाखों निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए जीवनरेखा हैं। इस तरह के रैकेट न केवल पीड़ितों की जमापूँजी लूटते हैं, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों को भी उनके अधिकार से वंचित करते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब SRA योजनाओं में पारदर्शिता की माँग पहले से ही ज़ोर पकड़ रही है।
क्या होगा आगे
जाँच एजेंसियाँ कथित तौर पर उन सभी पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्हें इस रैकेट में निशाना बनाया गया। मामले में राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच की दिशा और गति पर नज़र रखी जा रही है।