18 सितंबर 2026
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मुंबई में कांग्रेस सांसद के PA पर SRA धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ₹5.57 करोड़ की ठगी का आरोप

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मुंबई में कांग्रेस सांसद के PA पर SRA धोखाधड़ी का मामला दर्ज, ₹5.57 करोड़ की ठगी का आरोप

सारांश

मुंबई में कांग्रेस सांसद के निजी सहायक पर SRA आवास कक्षों के नाम पर ₹5.57 करोड़ की ठगी का आरोप। फर्जी आवंटन पत्र, जाली मुहरें और झूठे वादों से कई पीड़ितों को निशाना बनाया गया। पुलिस ने BNS की धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जाँच शुरू की।

मुख्य बातें

मुंबई पुलिस ने 2 अगस्त 2026 को कांग्रेस सांसद के PA के खिलाफ SRA आवास धोखाधड़ी में FIR दर्ज की।
आरोपियों पर कई वर्षों में शिकायतकर्ता और अन्य पीड़ितों से ₹5.57 करोड़ ठगने का आरोप।
ठगी के लिए SRA और सहकारी आवास कार्यालयों के जाली पत्र, मुहरें और हस्ताक्षर इस्तेमाल किए गए।
प्रभावित इलाकों में अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली और माटुंगा शामिल हैं।
मामला भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत दर्ज; जाँच जारी।

मुंबई पुलिस ने 2 अगस्त 2026 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के एक मौजूदा सांसद के निजी सहायक (PA) के खिलाफ स्लम पुनर्वास प्राधिकरण (SRA) आवास कक्षों से जुड़े बड़े पैमाने की धोखाधड़ी और जालसाजी के मामले में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। शिकायतकर्ता के अनुसार, आरोपियों ने फर्जी दस्तावेजों और झूठे आश्वासनों के ज़रिए कई लोगों से कुल ₹5.57 करोड़ की ठगी की।

मुख्य घटनाक्रम

एफआईआर में दर्ज शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने SRA और सहकारी आवास कार्यालयों के जाली पत्र, मुहरें और हस्ताक्षर तैयार कर पीड़ितों को आवास आवंटन का वादा किया। इन फर्जी दस्तावेजों में आवंटन पत्र, कब्जा प्रमाण-पत्र और कमरों के हस्तांतरण से जुड़े भ्रामक बयान शामिल थे।

आरोप है कि यह रैकेट कई वर्षों तक चला और अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली तथा माटुंगा सहित मुंबई के विभिन्न इलाकों में PAP (Project Affected Persons) आवास कक्षों के नाम पर ठगी की गई।

आरोपों का स्वरूप

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि आरोपियों ने सरकारी चैनलों तक विशेष पहुँच होने का दावा करके और PAP आवास कक्ष दिलाने का भरोसा दिलाकर उन्हें तथा अन्य पीड़ितों को जाल में फँसाया। कथित तौर पर यह साजिश सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई, जिसमें एक से अधिक लोग शामिल बताए जा रहे हैं।

एफआईआर में उल्लिखित फर्जी दस्तावेजों की विविधता — आवंटन पत्र से लेकर कब्जा प्रमाण-पत्र तक — यह संकेत देती है कि आरोपियों को SRA की प्रशासनिक प्रक्रियाओं की गहरी जानकारी थी।

पुलिस की कार्रवाई

मुंबई पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों की पहचान कर ली गई है और जाँच जारी है। अभी तक किसी की गिरफ्तारी की पुष्टि नहीं हुई है।

आम जनता पर असर

SRA आवास योजनाएँ मुंबई के लाखों निम्न-आय वर्ग के परिवारों के लिए जीवनरेखा हैं। इस तरह के रैकेट न केवल पीड़ितों की जमापूँजी लूटते हैं, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों को भी उनके अधिकार से वंचित करते हैं। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में सामने आया है जब SRA योजनाओं में पारदर्शिता की माँग पहले से ही ज़ोर पकड़ रही है।

क्या होगा आगे

जाँच एजेंसियाँ कथित तौर पर उन सभी पीड़ितों की पहचान करने में जुटी हैं जिन्हें इस रैकेट में निशाना बनाया गया। मामले में राजनीतिक संवेदनशीलता को देखते हुए जाँच की दिशा और गति पर नज़र रखी जा रही है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंबई में कांग्रेस सांसद के PA पर क्या आरोप हैं?
कांग्रेस सांसद के निजी सहायक (PA) पर SRA आवास कक्षों के आवंटन का वादा करके फर्जी दस्तावेजों के ज़रिए पीड़ितों से ₹5.57 करोड़ ठगने का आरोप है। मुंबई पुलिस ने 2 अगस्त 2026 को भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत FIR दर्ज की है।
SRA आवास धोखाधड़ी में किन इलाकों को निशाना बनाया गया?
एफआईआर के अनुसार, अंधेरी, सांताक्रूज, बांद्रा, कांदिवली और माटुंगा सहित मुंबई के कई इलाकों में PAP आवास कक्षों के नाम पर ठगी की गई। आरोपियों ने इन स्थानों पर कमरे दिलाने के झूठे वादे किए।
आरोपियों ने धोखाधड़ी के लिए किन तरीकों का इस्तेमाल किया?
कथित तौर पर आरोपियों ने SRA और सहकारी आवास कार्यालयों के जाली पत्र, फर्जी मुहरें और नकली हस्ताक्षर तैयार किए। इसके अलावा फर्जी आवंटन पत्र और कब्जा प्रमाण-पत्र जारी कर पीड़ितों को गुमराह किया गया।
मुंबई पुलिस ने इस मामले में क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के तहत FIR दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। अभी तक गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जाँच जारी है।
इस मामले का SRA आवास लाभार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
इस तरह के रैकेट वास्तविक SRA लाभार्थियों को उनके अधिकार से वंचित करते हैं और उनकी जमापूँजी भी लूट लेते हैं। यह मामला SRA प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और डिजिटल सत्यापन की ज़रूरत को फिर से रेखांकित करता है।
राष्ट्र प्रेस
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