मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में 35 से अधिक छात्र बीमार, विश्वकर्मा पूजा प्रसाद से फूड पॉइजनिंग की आशंका
सारांश
मुख्य बातें
मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज, बिहार के हॉस्टल में 19 सितंबर 2026 की देर शाम 35 से अधिक छात्र अचानक बीमार पड़ गए — उनमें उल्टी, दस्त, बुखार और कमज़ोरी जैसे लक्षण देखे गए। कॉलेज प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर सभी बीमार छात्रों को सदर अस्पताल, मुंगेर पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश को वापस हॉस्टल भेज दिया गया।
घटनाक्रम: कब और कैसे हुई बीमारी
रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार 18 सितंबर को कॉलेज परिसर में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर प्रसाद तैयार किया गया था। छात्रों, प्रोफेसरों और कॉलेज स्टाफ सदस्यों ने यह प्रसाद ग्रहण किया। कथित तौर पर कुछ छात्रों में गुरुवार को ही लक्षण उभरने लगे थे, लेकिन शुक्रवार की देर शाम बड़ी संख्या में छात्रों ने एक साथ बीमारी की शिकायत की, जिससे हॉस्टल में अफरातफरी मच गई।
एक असिस्टेंट प्रोफेसर और कॉलेज के कई स्टाफ सदस्य भी बीमार बताए जा रहे हैं। फूड पॉइजनिंग को संभावित कारण माना जा रहा है, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार बीमारी की वास्तविक वजह की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
अस्पताल में इलाज और स्थिति में सुधार
सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. फैजुद्दीन ने बताया कि तीन दर्जन से अधिक छात्रों को दस्त, बुखार और कमज़ोरी के लक्षणों के चलते चिकित्सा सहायता दी गई। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें कॉलेज हॉस्टल वापस भेज दिया गया।
गौरतलब है कि एक ही समय पर इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के बीमार पड़ने की सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने बिना देर किए कार्रवाई की, जिसे तत्काल प्रतिक्रिया के रूप में सराहा जा रहा है।
प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच का आश्वासन
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर कॉलेज स्टाफ के साथ हॉस्टल पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा, 'यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीमारी का कारण फूड पॉइजनिंग है।' उन्होंने आगे बताया कि प्रसाद केवल छात्रों ने नहीं, बल्कि प्रोफेसरों और स्टाफ सदस्यों ने भी खाया था, इसलिए मामले की गहन जाँच ज़रूरी है।
डॉ. शंभू शंकर ने स्पष्ट किया कि बीमारी का सटीक कारण जानने के लिए उच्च स्तरीय जाँच कराई जाएगी और जाँच में यदि कोई लापरवाही सामने आई तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।
पृष्ठभूमि: छात्रावास स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा
यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टल और मध्याह्न भोजन योजनाओं में खाद्य गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बिहार में भी इससे पहले कई सरकारी संस्थानों में खान-पान संबंधी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सामूहिक आयोजनों में तैयार प्रसाद या भोजन के भंडारण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।
आगे क्या होगा
उच्च स्तरीय जाँच समिति के गठन के बाद बीमारी के कारण की पुष्टि होने की उम्मीद है। जाँच रिपोर्ट आने पर यह स्पष्ट होगा कि प्रसाद तैयार करने, भंडारण या वितरण में कहाँ चूक हुई। कॉलेज प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि भविष्य में सामूहिक भोजन और प्रसाद वितरण के लिए स्वच्छता प्रोटोकॉल को और कड़ा किया जाए।