19 सितंबर 2026
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मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में 35 से अधिक छात्र बीमार, विश्वकर्मा पूजा प्रसाद से फूड पॉइजनिंग की आशंका

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मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में 35 से अधिक छात्र बीमार, विश्वकर्मा पूजा प्रसाद से फूड पॉइजनिंग की आशंका

सारांश

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में 35 से ज़्यादा छात्र एक साथ बीमार पड़े — विश्वकर्मा पूजा के प्रसाद पर शक। कार्यवाहक प्राचार्य ने जल्दबाज़ी में फूड पॉइजनिंग मानने से इनकार किया और उच्च स्तरीय जाँच का आश्वासन दिया। हॉस्टल स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में।

मुख्य बातें

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में 19 सितंबर 2026 की देर शाम 35 से अधिक छात्र एक साथ बीमार पड़े।
उल्टी, दस्त, बुखार और कमज़ोरी के लक्षणों के बाद सभी को सदर अस्पताल, मुंगेर ले जाया गया; उपचार के बाद अधिकांश को छुट्टी दे दी गई।
विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर 18 सितंबर को तैयार किए गए प्रसाद को संभावित कारण माना जा रहा है, हालाँकि अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
एक असिस्टेंट प्रोफेसर और कई स्टाफ सदस्य भी बीमार बताए जा रहे हैं।
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ.
शंभू शंकर ने उच्च स्तरीय जाँच का आदेश दिया; लापरवाही साबित होने पर कार्रवाई का आश्वासन दिया।

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज, बिहार के हॉस्टल में 19 सितंबर 2026 की देर शाम 35 से अधिक छात्र अचानक बीमार पड़ गए — उनमें उल्टी, दस्त, बुखार और कमज़ोरी जैसे लक्षण देखे गए। कॉलेज प्रशासन ने तुरंत एंबुलेंस बुलाकर सभी बीमार छात्रों को सदर अस्पताल, मुंगेर पहुँचाया, जहाँ प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश को वापस हॉस्टल भेज दिया गया।

घटनाक्रम: कब और कैसे हुई बीमारी

रिपोर्टों के अनुसार, गुरुवार 18 सितंबर को कॉलेज परिसर में विश्वकर्मा पूजा के अवसर पर प्रसाद तैयार किया गया था। छात्रों, प्रोफेसरों और कॉलेज स्टाफ सदस्यों ने यह प्रसाद ग्रहण किया। कथित तौर पर कुछ छात्रों में गुरुवार को ही लक्षण उभरने लगे थे, लेकिन शुक्रवार की देर शाम बड़ी संख्या में छात्रों ने एक साथ बीमारी की शिकायत की, जिससे हॉस्टल में अफरातफरी मच गई।

एक असिस्टेंट प्रोफेसर और कॉलेज के कई स्टाफ सदस्य भी बीमार बताए जा रहे हैं। फूड पॉइजनिंग को संभावित कारण माना जा रहा है, हालाँकि अधिकारियों के अनुसार बीमारी की वास्तविक वजह की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

अस्पताल में इलाज और स्थिति में सुधार

सदर अस्पताल के चिकित्सक डॉ. फैजुद्दीन ने बताया कि तीन दर्जन से अधिक छात्रों को दस्त, बुखार और कमज़ोरी के लक्षणों के चलते चिकित्सा सहायता दी गई। उपचार के बाद उनकी स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें कॉलेज हॉस्टल वापस भेज दिया गया।

गौरतलब है कि एक ही समय पर इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के बीमार पड़ने की सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन ने बिना देर किए कार्रवाई की, जिसे तत्काल प्रतिक्रिया के रूप में सराहा जा रहा है।

प्रशासन की प्रतिक्रिया और जाँच का आश्वासन

कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर कॉलेज स्टाफ के साथ हॉस्टल पहुँचे और स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा, 'यह कहना जल्दबाजी होगी कि बीमारी का कारण फूड पॉइजनिंग है।' उन्होंने आगे बताया कि प्रसाद केवल छात्रों ने नहीं, बल्कि प्रोफेसरों और स्टाफ सदस्यों ने भी खाया था, इसलिए मामले की गहन जाँच ज़रूरी है।

डॉ. शंभू शंकर ने स्पष्ट किया कि बीमारी का सटीक कारण जानने के लिए उच्च स्तरीय जाँच कराई जाएगी और जाँच में यदि कोई लापरवाही सामने आई तो दोषियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाएगी।

पृष्ठभूमि: छात्रावास स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा

यह ऐसे समय में आया है जब देशभर के कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों के हॉस्टल और मध्याह्न भोजन योजनाओं में खाद्य गुणवत्ता को लेकर सवाल उठते रहे हैं। बिहार में भी इससे पहले कई सरकारी संस्थानों में खान-पान संबंधी शिकायतें दर्ज हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सामूहिक आयोजनों में तैयार प्रसाद या भोजन के भंडारण और स्वच्छता पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है।

आगे क्या होगा

उच्च स्तरीय जाँच समिति के गठन के बाद बीमारी के कारण की पुष्टि होने की उम्मीद है। जाँच रिपोर्ट आने पर यह स्पष्ट होगा कि प्रसाद तैयार करने, भंडारण या वितरण में कहाँ चूक हुई। कॉलेज प्रशासन से अपेक्षा की जा रही है कि भविष्य में सामूहिक भोजन और प्रसाद वितरण के लिए स्वच्छता प्रोटोकॉल को और कड़ा किया जाए।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह सवाल भी उठता है कि प्रसाद तैयार करने से पहले बुनियादी स्वच्छता जाँच क्यों नहीं हुई। जब तक उच्च स्तरीय जाँच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती और जवाबदेही तय नहीं होती, यह घटना महज़ एक और हॉस्टल हादसे की सूची में जुड़ने का जोखिम उठाती है।
RashtraPress
19 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में छात्र क्यों बीमार पड़े?
19 सितंबर 2026 को मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज के हॉस्टल में 35 से अधिक छात्र उल्टी, दस्त, बुखार और कमज़ोरी के लक्षणों के साथ बीमार पड़े। विश्वकर्मा पूजा के लिए 18 सितंबर को तैयार किए गए प्रसाद को संभावित कारण माना जा रहा है, हालाँकि अधिकारियों ने अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
बीमार छात्रों का इलाज कहाँ हुआ और अभी उनकी स्थिति कैसी है?
सभी बीमार छात्रों को कॉलेज प्रशासन द्वारा बुलाई गई एंबुलेंस से सदर अस्पताल, मुंगेर ले जाया गया। डॉ. फैजुद्दीन की देखरेख में इलाज के बाद अधिकांश छात्रों की स्थिति में सुधार हुआ और उन्हें वापस हॉस्टल भेज दिया गया।
क्या केवल छात्र ही बीमार हुए या स्टाफ भी प्रभावित हुआ?
रिपोर्टों के अनुसार, एक असिस्टेंट प्रोफेसर और कॉलेज के कुछ स्टाफ सदस्य भी बीमार बताए जा रहे हैं। कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर ने स्वयं पुष्टि की कि प्रसाद छात्रों के साथ-साथ प्रोफेसरों और स्टाफ ने भी खाया था।
इस मामले में कॉलेज प्रशासन क्या कार्रवाई कर रहा है?
कार्यवाहक प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर ने उच्च स्तरीय जाँच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि जाँच में यदि कोई लापरवाही सामने आई तो दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल बीमारी के सटीक कारण की पुष्टि होना बाकी है।
विश्वकर्मा पूजा का प्रसाद और यह बीमारी कैसे जुड़े हैं?
18 सितंबर को कॉलेज में विश्वकर्मा पूजा के लिए प्रसाद तैयार किया गया था जिसे छात्रों, प्रोफेसरों और स्टाफ ने खाया। कुछ छात्रों में गुरुवार को ही लक्षण दिखे, लेकिन शुक्रवार शाम बड़ी संख्या में बीमार पड़ने के बाद प्रसाद को संभावित कारण माना जा रहा है। हालाँकि प्राचार्य ने स्पष्ट किया है कि जाँच से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुँचना जल्दबाज़ी होगी।
राष्ट्र प्रेस
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