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मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए स्टडी ग्रुप बनाएं: विधायक रईस शेख का सुनेत्रा पवार को पत्र

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मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए स्टडी ग्रुप बनाएं: विधायक रईस शेख का सुनेत्रा पवार को पत्र

सारांश

सपा विधायक रईस शेख ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मुस्लिम समुदाय के लंबित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए स्टडी ग्रुप बनाने की माँग की है। 2022 का शासन निर्णय सरकार बदलने के बाद ठंडे बस्ते में पड़ा है और 2006 की सच्चर रिपोर्ट के बाद से कोई व्यापक डेटा उपलब्ध नहीं है।

मुख्य बातें

सपा विधायक रईस शेख (भिवंडी ईस्ट) ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण हेतु स्टडी ग्रुप बनाने की माँग की।
2022 में राज्य सरकार ने सर्वेक्षण का जिम्मा टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को सौंपा था और 21 सितंबर 2022 को शासन निर्णय जारी हुआ था, लेकिन सरकार बदलने के बाद यह रुक गया।
2006 में सच्चर समिति की रिपोर्ट के बाद से मुस्लिम समुदाय पर कोई व्यापक अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है।
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की आबादी 11.54 प्रतिशत है और राज्य में 56 मुस्लिम बहुल कस्बे हैं।
शेख ने प्रस्तावित स्टडी ग्रुप का नाम दिवंगत अजित दादा पवार के नाम पर रखने का सुझाव दिया।

समाजवादी पार्टी के विधायक रईस शेख (भिवंडी ईस्ट) ने महाराष्ट्र की उपमुख्यमंत्री एवं अल्पसंख्यक विकास मंत्री सुनेत्रा पवार को पत्र लिखकर मुस्लिम समुदाय के वर्षों से लंबित सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए एक अध्ययन समूह (स्टडी ग्रुप) गठित करने की माँग की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि इस अध्ययन समूह का नामकरण दिवंगत अजित दादा पवार के नाम पर किया जाए, जिन्होंने अल्पसंख्यक मुद्दों को लगातार प्राथमिकता दी थी।

मुख्य माँग और पृष्ठभूमि

शेख ने अपने पत्र में उल्लेख किया कि 2013 में महाराष्ट्र सरकार द्वारा गठित डॉ. मेहबूब-उर-रहमान स्टडी ग्रुप ने मुस्लिम समुदाय का सामाजिक और शैक्षणिक सर्वेक्षण कराने की सिफारिश की थी। इसके बाद 2022 में राज्य सरकार ने यह जिम्मेदारी टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को सौंपी और 21 सितंबर 2022 को इस संबंध में शासन निर्णय भी जारी किया गया। हालाँकि, सरकार बदलने के बाद यह सर्वेक्षण आगे नहीं बढ़ पाया।

डेटा की कमी और सच्चर रिपोर्ट का संदर्भ

विधायक ने बताया कि 2006 में सच्चर समिति की रिपोर्ट के बाद से मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति पर कोई व्यापक और अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है। यह ऐसे समय में महत्वपूर्ण हो जाता है जब महाराष्ट्र की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी 11.54 प्रतिशत है और राज्य में 56 मुस्लिम बहुल कस्बे हैं।

सर्वेक्षण की आवश्यकता

शेख के अनुसार, मुस्लिम समुदाय की आर्थिक स्थिति, सरकारी योजनाओं तक पहुँच, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे का व्यापक अध्ययन अत्यंत जरूरी है। उनका तर्क है कि इस तरह के सर्वेक्षण से समुदाय की वास्तविक स्थिति का आकलन होगा और सरकार को क्षेत्र-विशेष नीतियाँ बनाने में सहायता मिलेगी। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे सर्वे सीमित लागत में आउटसोर्स एजेंसियों के माध्यम से किए जा सकते हैं, जैसा कि सरकार पहले अन्य समुदायों के लिए कर चुकी है।

अजित पवार के नाम पर स्टडी ग्रुप का प्रस्ताव

रईस शेख ने प्रस्तावित अध्ययन समूह को दिवंगत अजित दादा पवार को श्रद्धांजलि के रूप में उनके नाम पर रखने का सुझाव दिया। उनके अनुसार, अजित पवार के प्रयासों से ही अल्पसंख्यक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान और अल्पसंख्यक आयोग जैसी महत्वपूर्ण संस्थाओं की स्थापना संभव हो पाई थी।

आगे क्या

अब यह देखना होगा कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार इस पत्र पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं और महाराष्ट्र सरकार 2022 के उस शासन निर्णय को पुनर्जीवित करने की दिशा में कोई कदम उठाती है या नहीं। यह माँग ऐसे समय में आई है जब राज्य में अल्पसंख्यक कल्याण नीतियों को लेकर राजनीतिक विमर्श तेज होता जा रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन सत्ता परिवर्तन के साथ प्राथमिकताएँ बदल गईं। असली सवाल यह है कि क्या महाराष्ट्र की मौजूदा सरकार डेटा-आधारित अल्पसंख्यक नीति को राजनीतिक दबाव से अलग रखकर आगे बढ़ा सकती है। बिना स्वतंत्र और पारदर्शी सर्वेक्षण के, सरकारी योजनाओं का लाभ वास्तव में जरूरतमंद तक पहुँचा या नहीं — यह जानना संभव ही नहीं होगा।
RashtraPress
29 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

रईस शेख ने सुनेत्रा पवार को पत्र में क्या माँग की है?
सपा विधायक रईस शेख ने उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार से मुस्लिम समुदाय के सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण के लिए एक स्टडी ग्रुप गठित करने की माँग की है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया है कि इस समूह का नाम दिवंगत अजित दादा पवार के नाम पर रखा जाए।
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय का सामाजिक-आर्थिक सर्वेक्षण पहले क्यों नहीं हो पाया?
2022 में राज्य सरकार ने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज को सर्वेक्षण की जिम्मेदारी सौंपी थी और 21 सितंबर 2022 को शासन निर्णय भी जारी हुआ था। हालाँकि, सरकार बदलने के बाद यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पाई।
सच्चर समिति की रिपोर्ट और इस माँग का क्या संबंध है?
2006 में सच्चर समिति ने मुस्लिम समुदाय की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का व्यापक विश्लेषण किया था। विधायक रईस शेख का कहना है कि उसके बाद से कोई व्यापक अद्यतन डेटा उपलब्ध नहीं है, जिससे नीति-निर्माण में बाधा आती है।
महाराष्ट्र में मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या कितनी है?
विधायक रईस शेख के पत्र के अनुसार, मुस्लिम समुदाय महाराष्ट्र की कुल आबादी का 11.54 प्रतिशत हिस्सा है। राज्य में 56 मुस्लिम बहुल कस्बे हैं।
प्रस्तावित स्टडी ग्रुप का नाम अजित पवार के नाम पर क्यों रखने का सुझाव दिया गया?
रईस शेख के अनुसार, दिवंगत अजित दादा पवार ने अल्पसंख्यक समुदाय से जुड़े मुद्दों को लगातार आगे बढ़ाया और उनके प्रयासों से अल्पसंख्यक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान तथा अल्पसंख्यक आयोग जैसी संस्थाएँ स्थापित हो पाईं। उनकी स्मृति को सम्मान देने के उद्देश्य से यह सुझाव दिया गया है।
राष्ट्र प्रेस
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