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चांदीवाल आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करें: अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र गवर्नर को लिखा पत्र

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चांदीवाल आयोग रिपोर्ट सार्वजनिक करें: अनिल देशमुख ने महाराष्ट्र गवर्नर को लिखा पत्र

सारांश

चांदीवाल आयोग की 1,400 पन्नों की रिपोर्ट चार साल से महाराष्ट्र सरकार के पास दबी है। अनिल देशमुख ने अब राज्यपाल का दरवाज़ा खटखटाया है — 11 पत्रों के बाद भी जब मुख्यमंत्री कार्यालय चुप रहा, तो यह कदम उठाना पड़ा।

मुख्य बातें

अनिल देशमुख ने 17 जून 2026 को राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र लिखकर चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का अनुरोध किया।
चांदीवाल आयोग ने 26 अप्रैल 2022 को 1,400 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी, जो चार साल बाद भी सार्वजनिक नहीं हुई।
आयोग का गठन मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के उस आरोप की जांच के लिए हुआ था, जिसमें देशमुख पर ₹100 करोड़ मासिक वसूली का लक्ष्य तय करने का आरोप था।
देशमुख ने मुख्यमंत्री को 11 पत्र और संबंधित सचिवों को भी पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
देशमुख ने राज्यपाल से रिपोर्ट प्रकाशित करने और देरी के कारणों की जांच करने का निर्देश देने की मांग की है।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) के नेता और महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने 17 जून 2026 को महाराष्ट्र के राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा को पत्र लिखकर मांग की है कि वे राज्य सरकार को चांदीवाल आयोग की अंतिम रिपोर्ट तत्काल सार्वजनिक करने का निर्देश दें। यह आयोग मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह द्वारा देशमुख पर लगाए गए ₹100 करोड़ की मासिक वसूली के आरोपों की जांच के लिए गठित किया गया था।

मामले की पृष्ठभूमि

मार्च 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री को लिखे एक पत्र में परमबीर सिंह ने आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों को ₹100 करोड़ की मासिक 'वसूली' का लक्ष्य दिया था। देशमुख ने इन आरोपों को सिरे से नकारा था। बाद में बॉम्बे उच्च न्यायालय ने सीबीआई को प्रारंभिक जांच का आदेश दिया, जिसके बाद देशमुख ने गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।

राज्य सरकार ने इन आरोपों की जांच के लिए बॉम्बे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.यू. चांदीवाल की अध्यक्षता में एक जांच आयोग का गठन किया था।

रिपोर्ट चार साल से दबी है

देशमुख ने राज्यपाल को लिखे पत्र में बताया कि चांदीवाल आयोग ने 26 अप्रैल 2022 को अपनी 1,400 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। इसके बावजूद रिपोर्ट मिलने के चार साल बाद तक महाराष्ट्र सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया है।

यह ऐसे समय में आया है जब जांच की पारदर्शिता को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठाता रहा है। गौरतलब है कि किसी भी जांच आयोग की रिपोर्ट को समयबद्ध तरीके से सार्वजनिक करना लोकतांत्रिक जवाबदेही का बुनियादी तकाज़ा माना जाता है।

देशमुख के प्रयास

अनिल देशमुख के अनुसार, उन्होंने रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग को लेकर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री को 11 पत्र लिखे हैं। इसके अलावा उन्होंने संबंधित विभागों के मुख्य सचिव और सचिवों को भी पत्र भेजे हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया नहीं मिली है।

राज्यपाल से क्या मांग

देशमुख ने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से दो स्पष्ट मांगें रखी हैं — पहली, राज्य सरकार को 1,400 पन्नों की पूरी रिपोर्ट प्रकाशित करने का निर्देश दिया जाए; और दूसरी, रिपोर्ट सार्वजनिक करने में हुई देरी के कारणों की जांच की जाए। आलोचकों का कहना है कि रिपोर्ट को दबाए रखना न्यायिक प्रक्रिया की भावना के विरुद्ध है।

आगे क्या होगा

अब यह देखना होगा कि राज्यपाल कार्यालय इस पत्र पर क्या रुख अपनाता है और क्या महाराष्ट्र सरकार चार साल से लंबित इस रिपोर्ट को जनता के सामने रखती है। यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में पारदर्शिता और जवाबदेही की बहस को नई धार दे सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वही रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग कर रहा है, जबकि सरकार चुप है। महाराष्ट्र में सत्ता परिवर्तन के बाद भी रिपोर्ट दबी रही — यह सवाल उठाता है कि क्या रिपोर्ट में ऐसे तथ्य हैं जो किसी के लिए असुविधाजनक हैं। बिना सार्वजनिक जवाबदेही के, ऐसे आयोगों की विश्वसनीयता खोखली हो जाती है।
RashtraPress
2 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चांदीवाल आयोग क्या है और इसका गठन क्यों हुआ था?
चांदीवाल आयोग बॉम्बे उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति के.यू. चांदीवाल की अध्यक्षता में गठित जांच आयोग है। इसका गठन मुंबई के पूर्व पुलिस आयुक्त परमबीर सिंह के उस आरोप की जांच के लिए हुआ था जिसमें तत्कालीन गृह मंत्री अनिल देशमुख पर ₹100 करोड़ मासिक वसूली का लक्ष्य तय करने का आरोप लगाया गया था।
चांदीवाल आयोग की रिपोर्ट कब सौंपी गई और अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं हुई?
आयोग ने 26 अप्रैल 2022 को अपनी 1,400 पन्नों की अंतिम रिपोर्ट महाराष्ट्र सरकार को सौंप दी थी। रिपोर्ट मिलने के चार साल बाद भी सरकार ने इसे सार्वजनिक नहीं किया है; सरकार की ओर से देरी का कोई आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।
अनिल देशमुख ने राज्यपाल को पत्र क्यों लिखा?
देशमुख के अनुसार, उन्होंने मुख्यमंत्री को 11 पत्र और संबंधित विभागों के सचिवों को भी पत्र लिखे, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसके बाद उन्होंने राज्यपाल जिष्णु देव वर्मा से अनुरोध किया कि वे राज्य सरकार को रिपोर्ट प्रकाशित करने और देरी की जांच करने का निर्देश दें।
परमबीर सिंह ने अनिल देशमुख पर क्या आरोप लगाए थे?
मार्च 2021 में परमबीर सिंह ने तत्कालीन मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर आरोप लगाया था कि देशमुख ने पुलिस अधिकारियों के लिए ₹100 करोड़ की मासिक 'वसूली' का लक्ष्य तय किया था। देशमुख ने इन आरोपों से इनकार किया था और बॉम्बे उच्च न्यायालय द्वारा सीबीआई जांच का आदेश दिए जाने के बाद गृह मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
इस मामले में आगे क्या हो सकता है?
अब राज्यपाल कार्यालय के रुख पर सबकी नज़र है। यदि राज्यपाल सरकार को निर्देश देते हैं, तो 1,400 पन्नों की रिपोर्ट सार्वजनिक होने से महाराष्ट्र की राजनीति में नई हलचल मच सकती है। देरी के कारणों की जांच की मांग भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।
राष्ट्र प्रेस
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